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2016 के बाद राज्य में नहीं लगा सोलर हाइमास्ट लाइट, जो लगाया उसमें भी अधूरा है काम    

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  • 2018-19 और 2019-20 में एक रूपया भी नहीं दिया गया फंड
  • साल 2017-18 का फंड सरकार ने एक साल बाद दिया
  • अब तक मात्र 75 सोलर हाइमास्ट लाइट ही सुदूर क्षेत्रों में लगाये गये

Ranchi :  राज्य में सोलर उर्जा को लगातार प्रमोट किया जा रहा है. साल 2015 के बाद से लगातार इस क्षेत्र में काम भी किया जा रहा है. सोलर उर्जा के तहत ही राज्य में सोलर हाइमास्ट लाइट लगाने थे. लेकिन इस योजना के तहत अब तक मात्र 75 सोलर हाइमास्ट लाइट ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लगाये गये.

लेकिन 75 सोलर हाइमास्ट लाइट लगाने के बाद भी कई हिस्सों में काम बाकी है. कहीं लाइट्स में तार का जोड़ा जाना है तो किसी में और भी कई तरह के काम बाकी हैं.

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साल 2016-17 के लिए राज्य सरकार ने झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी जरेडा को 75 सोलर हाईमास्ट लाइट लगाने का लक्ष्य दिया था. लेकिन साल 2019 अब समाप्ति की ओर है, फिर भी काम पूरी नहीं हो पाया है.

जरेडा से जो जानकारी मिली, उसके मुताबिक 75 सोलर हाईमास्ट लाइट का काम पूरा हो चुका है. लेकिन सुदूर क्षेत्र में लगाये जाने की वजह से कुछ काम बाकी है. इसके बाद से जरेडा की ओर से सोलर हाईमास्ट लाइट नहीं लगाये गये. साथ ही जरेडा की ओर से बताया गया कि साल 2016-17 में 75 सोलर हाईमास्ट के लिए जरेडा ने तीन लाख 38 हजार खर्च किया.

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Bharat Electronics 10 Dec 2019

बजट में होती है देर

साल 2017-18 में भी सरकार की ओर से जरेडा को लक्ष्य दिया गया. लेकिन फंड नहीं दिया गया. साल 2017-18 का फंड सरकार की ओर से अप्रैल 2018 के बाद दिया गया. लेकिन जरेडा की ओर से इसपर काम शुरू नहीं किया गया. पिछले कुछ महीनों से जरेडा 2017-18 के लक्ष्य के लिए सक्रिय है.

लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की गयी है. वहीं साल 2018-19 और 2019-20 में सोलर हाईमास्ट लाईट लगाये जाने के लिए सरकार ने फंड ही नहीं दिया. ऐसे में जरेडा के पास लक्ष्य होते हुए भी काम नहीं किया गया. जरेडा टेंडर के जरिये सोलर हाईमास्ट लाइट लगाती है.

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सुदूर क्षेत्रों में लगाने हैं सोलर हाइमास्ट

उर्जा विभाग के अनुसार, सोलर हाईमास्ट लाइट ऐसे इलाकों में लगाना है, जहां ट्रांसमिशन लाइन आदि लगाने में परेशानी होती है. झारखंड की भौगोलिक दशा को ध्यान में रखते हुए सोलर हाइमास्ट लगाने का निर्णय लिया गया.

जिसमें सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र और हाईवे प्राथमिकता रहे. इसका अन्य उद्देश्य सोलर उर्जा को प्रोत्साहित करना भी है. लेकिन साल 2016 के बाद से राज्य में सोलर हाइमास्ट लगाने में सक्रियता नहीं दिखायी गयी. फिलहाल आचार संहिता की वजह से काम रूका हुआ है.

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