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आखिर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पर गाज क्यों गिरी!  खड़गे अकेले क्यों पड़े

आखिर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा क़्यों हटाये गये. उच्चस्तरीय सलेक्शन कमेटी में शामिल  कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के विरोध भी क्यों अनसुना कर दिया गया. आलोक वर्मा को हटाने की दलील में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन चीफ जस्टिस द्वारा मनोनीत सदस्य जस्टिस एके सीकरी ने क्यों किया?

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NewDelhi : आखिर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा क़्यों हटाये गये. उच्चस्तरीय सलेक्शन कमेटी में शामिल  कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के विरोध भी क्यों अनसुना कर दिया गया. आलोक वर्मा को हटाने की दलील में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन चीफ जस्टिस द्वारा मनोनीत सदस्य जस्टिस एके सीकरी ने क्यों किया?   सूत्रों के अनुसार इस सवाल का जवाब देश की खुफिया एजेंसी रॉ द्वारा पकड़ी गयी टेलिफोन बातचीत में छिपा हुआ है. अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी)ने अपनी जांच रिपोर्ट में रॉ द्वारा पकड़ी गयी टेलिफोन बातचीत के आधार पर ही आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार और ड्यूटी में लापरवाही का आरोप लगाया था. इसके कारण ही सीबीआई के 50 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी सीबीआई चीफ को हटाने का निर्णय लिया गया. अधिकारियों ने जानकारी दी कि पीएम मोदी की अध्यक्षता वाले उच्चस्तरीय पैनल ने सीवीसी रिपोर्ट में वर्मा के खिलाफ लगाये गये आठ आरोपों पर गंभीरता से विचार किया. बता दें कि यह बैठक गुरुवार को ऐसे समय में हुई जब मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई चीफ वर्मा को फिर से बहाल किया था. लेकिन अंतत:   पैनल ने 2:1 के बहुमत से  एके वर्मा को हटाने का फैसला लिया. पैनल में शामिल कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का विरोध दरकिनार किया गया. पैनल के तीसरे सदस्य जस्टिस एके सीकरी द्वारा सरकार का पक्ष लेते ही वर्मा पर गाज गिर गयी

सीवीसी रिपोर्ट में रिसर्च ऐंड अनैलिसिस विंग (रॉ)के इंटरसेप्ट्स भी शामिल है

खबरों के अनुसार सीवीसी रिपोर्ट में विवादित मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के केस के बारे में जानकारी है.  इसमें दावा किया गया है कि केस की जांच कर रही सीबीआई की टीम इस मामले में हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना को एक आरोपी बनाना चाहती थी लेकिन वर्मा को यह मंजूरी नहीं था. इस केस की जांच स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना कर रहे थे, जिन्हें वर्मा के साथ 23 अक्टूबर को सरकार ने जबरन छुट्टी पर भेज दिया था. अधिकारियों के अनुसार सीवीसी रिपोर्ट में रिसर्च ऐंड अनैलिसिस विंग (रॉ)के इंटरसेप्ट्स भी शामिल हैं, जिसमें सीबीआई में नंबर वन के हाथों में पैसा जाने की बात की गयी है. संयोग से, सना अस्थाना के खिलाफ दर्ज एक केस में शिकायतकर्ता है, जिसमें उसने इस बात की जानकारी दी है कि कैसे बिचौलिए को घूस दी गयी थी. उसने रॉ के सेकंड-इन-कमांड सामंत गोयल के नाम का भी जिक्र किया है,जिनके बारे में कहा गया कि वह बिचौलिए मनोज प्रसाद को बचाने में शामिल थे. एक अन्य मामला सीबीआई द्वारा गुरुग्राम में भूमि अधिग्रहण के बारे में दर्ज शुरुआती जांच से संबंधित है.

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सीवीसी ने आरोप लगाया है कि वर्मा का नाम इस केस में शामिल है और कम से कम 36 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है.  आयोग ने मामले की सघन जांच का सुझाव दिया था.  सीवीसी ने आरोप लगाया था कि वर्मा ने IRCTC केस में एक अधिकारी को बचाने की कोशिश की, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद शामिल थे. आयोग का यह भी आरोप था कि वर्मा दागी अधिकारियों को सीबीआई में लाने की कोशिश कर रहे थे.

 

Bharat Electronics 10 Dec 2019

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