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सरकार के निर्देश पर एयर इंडिया ने प्रमोशन और नयी नियुक्तियां पर लगायी रोक

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New Delhi: राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया ने अपने कर्मचारियों की पदोन्नति और नये कर्मचारियों की नियुक्ति रोक दी है.

खबर है कि केंद्र सरकार के सख्त निर्देश पर ये कदम उठाया गया है. निजीकरण से पहले सरकार ने एयर इंडिया को ये कदम उठाने के निर्देश दिये हैं.

सरकार द्वारा एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया जल्द शुरू किए जाने की उम्मीद है. एयर इंडिया पर 50,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज का बोझ है.

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एक अधिकारिक सूत्रों ने कहा कि विनिवेश प्रक्रिया के लिए एयरलाइन के 15 जुलाई तक बही खाते को बंद कर दिया गया है. बोलियां मंगाने के लिए इन्हीं वित्तीय ब्यौरों का इस्तेमाल किया जाएगा.

सूत्रों की मानें तो, ‘यह निर्देश लगभग एक हफ्ते पहले आया है. इसके अनुसार निजीकरण के प्रस्ताव को देखते हुए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जाना है. और नियुक्तियां और पदोन्नति भी रोक दी जायेंगी.’ यह निर्देश निवेश और जन संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) ने दिया है.

एयर इंडिया ने साधी चुप्पी

इस बारे में एयर इंडिया से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली है. नागर विमानन सचिव प्रदीप सिंह खरोला से भी इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं मिल पाई है.

एयरलाइन के स्थानीय कर्मचारियों की संख्या करीब 10,000 है. फिलहाल एयर इंडिया का प्रतिदिन का राजस्व 15 करोड़ रुपये है. एयर इंडिया पर कुल लगभग 58,000 करोड़ रुपये का कर्ज है.

वित्त वर्ष 2018-19 में विमानन कंपनी को 7,600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. सरकार ने 2018 में एयर इंडिया की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी के विनिवेश का प्रयास किया था, लेकिन यह सफल नहीं हो पाया था.

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वित्तीय लेनदेन सलाहकार ईवाई ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सरकार द्वारा अपने पास 24 प्रतिशत हिस्सेदारी और अधिकार रखने के फैसले और ऊंचे कर्ज के बोझ की वजह से विनिवेश प्रक्रिया विफल रही.

नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तीन जुलाई को राज्यसभा को बताया कि सरकार एयर इंडिया बचाने के लिए उसका निजीकरण करना होगा.

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उन्होंने कहा था कि हिस्सेदारी बिक्री से पहले सरकार एयरलाइन को परिचालन की दृष्टि से अधिक व्यावहारिक बनाना चाहती है.

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