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इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज ने पीएम मोदी को पत्र लिखा, वंशवाद व जातिवाद से  ग्रसित है न्यायपालिका

पीएम मोदी से सख्त निर्णय लेने का आग्रह, नियुक्तियों की  कसौटी केवल परिवारवाद व जातिवाद

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NewDelhi : हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्तियों पर फिर से सवाल खड़ा हो गया है. खबर है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस और पूर्व प्रमुख सचिव न्याय रंगनाथ पांडेय ने हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्तियों के मामले में  गंभीर आरोप लगाये हैं. इस संबंध में जस्टिस पांडेय ने प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखा है . उसमें लिखा है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्तियों में  निश्चित मापदंड नहीं है. आरोप लगाया है कि नियुक्तियों की  कसौटी केवल परिवारवाद जातिवाद है.

जस्टिस  ने पीएम मोदी को भेजे  पत्र में लिखा है कि दुर्भाग्य से  न्यायपालिका  वंशवाद जातिवाद से बुरी तरह ग्रस्त है. न्यायधीशों के परिवार का सदस्य होना ही अगला न्यायधीश होना सुनिश्चित करता है. उदाहरण दिया कि राजनीति में नेता का मूल्यांकन उसके कार्य के आधार पर चुनावों में जनता करती है. प्रशासनिक अधिकारी को सेवा में आने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की कसौटी पर खरा उतरना होता है.  अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं में योग्यता सिद्ध करनी  पड़ती है.  लेकिन हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति का हमारे पास कोई मापदंड नहीं है.

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 पीएम मोदी से सख्त निर्णय लेने का आग्रह

जस्टिस रंगनाथ पांडेय  पत्र में  लिखा है कि 34 साल के सेवाकाल में उन्हें कई बार हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के जजों को देखने का मौका मिला है.  उनका विधिक ज्ञान संतोषजनक नहीं है.  जब सरकार द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक चयन आयोग (एनजेएसी) की स्थापना का प्रयास किया गया तो सुप्रीम कोर्ट ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप मानते हुए असंवैधानिक घोषित कर दिया.

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जस्टिस ने पिछले सालों में हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के विवाद अन्य मामलों का हवाला देते हुए लिखा है कि न्यायपालिका की गुणवत्ता अक्षुण्णता लगातार संकट की स्थिति में है.  उन्होंने पीएम से आग्रह किया है कि न्यायपालिका की गरिमा को  फिर से स्थापित करने के लिए न्याय संगत कठोर निर्णय लें.

जस्टिस के अनुसार न्यायाधीशों के पास सामान्य विधिक ज्ञान अध्ययन तक उपलब्ध नहीं था. कई अधिवक्ताओं के पास न्याय प्रक्रिया की संतोषजनक जानकारी तक नहीं है. कलीजियम के सदस्यों के पसंदीदा होने की योग्यता के आधार पर न्यायाधीश नियुक्ति कर दिये जाते हैं.  जस्टिस ने इसे  बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति माना है.

  जस्टिस पांडेय ने पत्र में आरोप लगाया  है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजो का चयन बंद कमरों में चाय पार्टी में वरिष्ठ न्यायाधीशों की पैरवी और पसंदीदा होने के आधार पर किया जाता रहा है.  इस प्रक्रिया में गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाता है.  प्रक्रिया को गुप्त रखने की परंपरा पारदर्शिता के सिद्धांत को झूठा करने जैसी है.

कहा कि न्यायिक चयन आयोग के स्थापित होने से न्यायाधीशों को अपने पारिवारिक सदस्यों की नियुक्ति करने में बाधा आने की संभावना बलवती हो रही थी.  सुप्रीम कोर्ट की इस विषय में अति सक्रियता हम सभी के लिए आंख खोलने वाला होना चाहिए.

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