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बेंगलुरु  : आरबीआई ने चेताया था, पर  कर्नाटक सरकार ने चुप्पी साध ली, और हो गया 15 हजार करोड़ का हलाल घोटाला

आरबीआई ने कर्नाटक सरकार को इस्लामिक बिजनेस मॉड्यूल के नाम पर धोखाधड़ी  के लंबंध में चेताया था, पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया

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Bengaluru : आरबीआई ने कर्नाटक सरकार को इस्लामिक बिजनेस मॉड्यूल के नाम पर धोखाधड़ी  के लंबंध में चेताया था, पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया. इसी का फायदा उठाते हुए बेंगलुरु में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हुए एक बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया. खबर है कि इस अरबों रुपये के हलाल घोटाले से पहले इसके बारे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कर्नाटक सरकार को चेताया था,  लेकिन पूर्व की सिद्धरमैया सरकार और मौजूदा कुमारस्वामी सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की. नतीजतन घोटाले के शिकार हुए सैकड़ों लोगों ने अपनी जीवन भर की कमाई खो दी.

हलाल की कमाई के फेर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपनी जमा पूंजी गंवा दी. घोटालेबाजों ने मुस्लिम समुदाय को धार्मिक मान्यता का फायदा उठाकर शिकार बनाया.   बेंगलुरु में हुए अरबों रुपये के हलाल घोटाले से जुड़े जो दस्तावेज सामने आये हैं उनसे पता चलता है कि आरबीआई ने 2017 में सरकार से आईएमए सहित आधा दर्जन फर्जी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी,  ताकि धोखाधड़ी को रोक जा सके, लेकिन बावजूद इसके  सिद्धरमैया सरकार ने इसे नजरअंदाज किया. बाद में मौजूदा कुमारस्वामी सरकार ने भी इसे अनदेखा कर दिया.

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आम लोग हलाल कमाई के नाम पर बरबाद हो गये

दस्तावेज में आरबीआई की सलाहकार समिति की सिफारिश में साफ कहा गया है कि आईएमए एमबीडैंट के साथ-साथ कई अन्य कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये,  ताकि धोखाधड़ी से बचा जा सके. लेकिन तब के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और बाद में कुमारस्वामी ने इन कंपनियों के खिलाफ जरूरी कदम नहीं उठाये, कुल मिलकर लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हो गया. इसमें आम लोग हलाल कमाई के नाम पर बरबाद हो गये. .राज्यसभा के पूर्व डिप्टी चेयरमैन रहमान खान ने इस मामले को लेकर सवाल उठाये हैं.

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आरबीआई के निर्देश के बावजूद सरकार चुप क्यों रही?

. उन्होंने कहा कि आरबीआई के निर्देश के बावजूद सरकार चुप क्यों रही? पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की. दो साल तक यह लोग क्या कर रहे थे? आयकर विभाग के छापे के बावजूद आईएमए अपना धंधा कैसे करता रहा?आईएमए ने एक लाख रुपये के बदले हर महीने तीन हजार रुपये देने का वादा किया था. मौलवी और आलिमों ने इसे जायज  ठहरया . नतीजा यह हुआ कि किसी ने घर और जेवर गिरवी रखकर पैसे दिये  तो किसी ने पेंशन की सारी रकम इसमें लगा दी. आईएमए का मालिक मंसूर खान पर निवेशकों का पैसा लेकर भागने का आरोप है. वह कहां है, किसी को पता नहीं है.

बता दें कि 2018 में राज्य सरकार ने इन कंपनियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए नोटिस तो जारी किये, लेकिन यह सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहे. इस्लाम में ब्याज लेना या देना हराम है, इसलिए मुसलमान बैंकों में पैसा रखना नहीं चाहते. इसी का फायदा इस्लामिक बिजनेस मॉड्यूल के नाम पर  उठाया गया. इसका मतलब अरबों रुपये की इस धोखाधड़ी की जानकारी सरकार को थी. आरबीआई ने चेतावनी भी दी, लेकिन इसके बावजूद तब के मुख्यमंत्री सिद्धारमैय्या और मौजूद कुमारस्वामी ने आईएमए घोटाले को रोकने की कोशिश नहीं की.

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