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BJP सांसद समीर उरांव ने कहा था : जमीन दे दो, सत्ता में आते ही लगा देंगे नौकरी, देखें वीडियो

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Ranchi:  भाजपा के राज्यसभा सांसद समीर उरांव के भाई अनिल उरांव ने सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर जिस खतियानी जमीन का रजिस्ट्री कराया, उसके मलिकों के पास अब कोई जमीन नहीं बचा है. जमीन के नाम पर सिर्फ वह टुकड़ा बचा है, जिसपर शीतल उरांव का घर बना है. जमीन का खतियान शीतल उरांव के नाम पर है. जमीन मलिकों का आरोप है कि जमीन का सौदा भाजपा सांसद समीर उरांव के साथ तय हुआ था. तब समीर उरांव ने कहा था : हमलोगों की सरकार बनने वाली है. जमीन दे दो. सत्ता में आने के बाद सरकारी नौकरी लगा देंगे.

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सासंद के भाई ने दो डीड से करायी थी रजिस्ट्री

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उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, समीर उरांव के भाई अनिल उरांव ने चार जुलाई 2017 को दो अलग-अलग डीड से शीतल उरांव के खतियानी जमीन की रजिस्ट्री करायी थी. पहली डीड जिसका नंबर 3563 है, के माध्यम से अनिल उरांव ने थाना नंबर 207, खाता संख्या 233, प्लॉट नंबर 1543, रकबा 9.92 डिसमिल जमीन रजिस्ट्री करवायी थी. जिसकी कीमत 33,29, 896 रुपया दर्ज है. दूसरे डीड का नंबर 3563 है. इसके माध्यम से 13.28 डिसमिल जमीन की खरीद गयी. जिसकी कीमत 44, 57,764 रुपया दर्ज है. जमीन का दोनों टुकड़ा अरगोड़ा अंचल के हरमू रोड स्थित डूंगरी में है. मतलब कुल 23.02 डिसमिल आदिवासी जमीन की खरीद की गयी.

शीतल उरांव के पोते सुखदेव उरांव कहते हैं कि, डूंगरी टोला में मेरे परिवार का 44 डिसमिल जमीन था. जिसे समीर उरांव ने लिया है. जमीन की तय दर भी हमलोगों को नहीं मिली. जमीन खरीदने की पूरी बातचीत भी समीर उरांव के साथ तय किया गया था. लेकिन उन्होंने अपने भाई के नाम से रजिस्ट्री करा ली.

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बार-बार कहने पर भी नहीं मिला जमीन का पैसा

वहीं बिना पैसा लिए रजिस्ट्री कराने के सवाल पर सुखदेव कहते है : जमीन की खरीद बिक्री से पहले तक समीर उरांव हमलोगों के साथ अच्छा व्यवहार करते थे. जिससे बिना पैसा के रजिस्ट्री कर दी है. पैसा नहीं मिलने के कारण दो बार रजिस्ट्री कार्यालय से भी वापस लौट आये थे. परिवार में जो पीने-खाने वाले लोग थे, उन्हें ले जाकर रजिस्ट्री करने का प्रयास भी हुआ.

सुखदेव उरांव कहते हैं : समीर उरांव ने हमलोगों से कहा था कि हम सत्ता में आने वाले हैं, तुम लोग जमीन दे दो. जमीन दे दोगे तो सत्ता में आने पर सबको नौकरी लगा देंगे. यह आश्वासन देकर जमीन की रजिस्ट्री करा लिया गया. रजिस्ट्री के बाद पैसा मांगने पर अब कहा जाता है कि जो मिल गया है, बस उतना ही मिलेगा. अब जो करना है करो लो. अब खेल खत्म हो गया.

कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति और पीएम को भी लिखा पत्र

आरोप है कि जमीन मलिकों को खर्च के नाम पर कुछ पैसा दिया जाता रहा. सरकारी दर एक लाख दस हजार रूपये डिसमिल जमीन की कीमत तय हुई थी. जो जमीन मलिकों को नहीं मिला. अनिल उरांव ने जिस जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम से करायी है, उस जमीन के मालिकों को खर्च के नाम पर कभी 2000 तो कभी 5000  रुपया ही देते रहे.

इस जमीन की खरीद-फरोख्त में की गई गड़बड़ी को लेकर सुखदेव उरांव ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ-साथ अरगोड़ा सीईओ से भी पत्र लिखकर शिकायत की. जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुआ.

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