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बोकारो : निर्माण के 10 साल बाद भी शुरू नहीं हुआ ITI, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज का भी वादा अधूरा

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Bokaro : पूरे देश में औद्योगिक जिले के रूप में बोकारो की पहचान है. यहां देश के सार्वजनिक क्षेत्र में सबसे अधिक स्टील उत्पादन करने वाली बोकारो स्टील प्लांट, कोल इंडिया के कई माईंस, दामोदर वैली निगम के पावर प्लांट सहित कई छोटी-बड़ी इकाई है. बावजूद इसके यहां के युवाओं को तकनीकि रूप से दक्ष बनने का सपना सालों से अधूरा है.

पिछली सरकार ने कसमार, तेनुघाट और चंदनकियारी में आईटीआई कॉलेज का भवन बनवाया था. इस भवन को बने लगभग 10 साल हो गए लेकिन अभी तक इसको शुरू नहीं किया गया है. इतना ही नहीं बोकारो जनरल अस्पताल से भी जोड़कर इसे चालू कराने का सपना वर्षों से दिखाया जा रहा है. लेकिन उसे पूरा करने की दिशा में किसी भी तरह का कोई कदम नहीं उठाया गया.

वहीं बोकारो स्टील प्लांट से जोड़कर इंजीनियरिंग काॅलेज स्थापना को लेकर बीते वर्षो में सिर्फ ब्यानबाजी की गयी. बोकारो स्टील प्लांट से मेडिकल काॅलेज निर्माण के लिए जमीन लिए जाने की प्रक्रिया भी शुरू करने का दावा नेताओं ने किया, लेकिन इन पांच वर्षो में हुआ कुछ भी नहीं.

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साल 2009 में बनकर तैयार हुआ था ITI भवन

तेनुघाट में आईटीआई भवन साल 2009 में राज्य श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से बनवाया गया था. इसके निर्माण में करीब चार करोड़ का खर्च आया था. लेकिन आजतक यहां कॉलेज की शुरुआत नहीं हो सकी. भवन जब से बना है तब से बेकार पड़ा है. भवन के चारों ओर झाड़ियां उग गयी है.

यह हाल सिर्फ तेनुघाट में बने भवन का नहीं है. कसमार और चंदनकियारी के कुसुमकियारी गांव में बने भवन का हाल भी कुछ ऐसा ही है. हालांकि कसमार में कुछ दिनों पहले कौशल विकास प्रशिक्षण की शुरुआत की गयी है. लेकिन चंदनकियारी में बना भवन अभी भी यहां पढ़ाई शुरू होने के इंतजार में है. इन तीनों स्थानों पर आईटीआई की पढ़ाई शुरू हो जाने से ग्रामीण क्षेत्र के युवा तकनीकि रूप से दक्ष होते. जिससे कि उन्हें रोजगार में आसानी होती.

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जिले में उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं

पूरे राज्य में बोकारो शहर बौद्धिक शहर के रूप में जाना जाता है. यहां कई राज्यों से बच्चे आकर 10वीं और 12वीं की पढ़ाई करते हैं. लेकिन 12वीं की पढ़ाई के बाद यहां पर किसी भी प्रकार की उच्च शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है.

यहां अक भी मेडिकल या इंजीनियरिंग काॅलेज नहीं है. जिसकी वजह से यहां के छात्रों को 12वीं तक की पढ़ाई करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए शहर से बाहर जाना पड़ता है. यहां के लोगों का कहना है कि अगर उच्च शिक्षा के लिए यहां कॉलेज खुल जाते तो हमें काफी सुविधा होती. इस दिशा में ध्यान देने की जरूरत है लेकिन सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की कोई पहल नहीं की जा रही है.

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