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मनमानी : बिना क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में रजिस्ट्रेशन के चल रहा था बोकारो जनरल अस्पताल

आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने का दबाव बनाने पर उजागर हुई प्रबंधन की लापरवाही, प्रक्रिया हुई शुरू

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Bokaro : झारखंड के बड़े अस्पतालों में शुमार बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) अब तक बिना क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के रजिस्ट्रेशन के चल रहा था. विडंबना तो यह है कि चार दशक पुराने इस अस्पताल की इस मनमानी या लापरवाही को आज तक जिला स्वास्थ्य विभाग नजरअंदाज किए हुए था.

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बोकारो जनरल अस्पताल की यह मनमानी शायद अब भी उजागर नहीं होती अगर कुछ दिन पूर्व आये मुख्यमंत्री रघुवर दास और केंद्रीय इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना की सुविधा नहीं होने पर चिंता व्यक्त नहीं की होती. दोनों ने बोकारो स्टील प्लांट मैनेजमेंट को तुरंत बीजीएच को आयुष्मान भारत से जोड़ने का निर्देश दिया. बीजीएच का स्वामित्व और रखरखाव बोकारो स्टील प्लांट (BSL) द्वारा किया जाता है.

आदेश को धरातल पर उतारने के लिए बोकारो जनरल अस्पताल मैनेजमेंट आयुष्मान भारत स्कीम  से जुड़ने की प्रक्रिया शुरू कर जिला स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काटने लगा. चूंकि आयुष्मान भारत स्कीम से जुड़ने के लिए अस्पतालों को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है, बीजीएच से इसके सर्टिफिकेट की मांग की गयी,  जिसे देने में उसने असमर्थता जाहिर की.

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सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया स्वास्थ्य कार्यालय को हुई जानकारी

सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को देख, बीजीएच प्रबंधन ने बृहस्पतिवार को जिला स्वास्थ्य कार्यालय में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के सर्टिफिकेट के लिए आवेदन दे दिया. इसी वक्त जिला स्वास्थ्य कार्यालय को यह पता चला  कि अब तक बीजीएच बिना क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में रजिस्ट्रेशन के चल रहा था.

बोकारो के सिविल सर्जन अशोक कुमार पाठक ने कहा, “गुरुवार को  बीजीएच ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत पंजीकरण के लिए आवेदन किया था जिसका हमने शनिवार को प्रोविजनल दे दिया. यह आश्चर्यजनक है कि आज तक बीजीएच जैसे बड़े अस्पताल ने इस अधिनियम में पंजीकरण नहीं कराया था. यह हमें तब पता चला है जब बीजीएच ने आयुष्मान भारत योजना के तहत काम शुरू करने के लिए पहल की.

इस संबंध में बीजीएच के आवेदन को जिला एम्पनेल समिति को भेज दिया गया है जिसे अगले सप्ताह राज्य स्वास्थ्य कमिटी को भेजा जायेगा. सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात जिला डेटा प्रबंधक कंचन कुमारी ने कहा कि बीजीएच को आयुष्मान भारत योजना से NOC मिलने के बाद यहां भी बीमित लोगों  का कैशलेस उपचार 5 लाख रुपये तक हो सकेगा.

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आयुष्मान में अपनी सभी सुविधाएं देने से बचने की कोशिश में प्रबंधन

जिला स्वास्थ्य विभाग ने हालांकि यह चिंता जतायी है कि बीजीएच ने इतना बड़ा अस्पताल होने के बावजूद आयुष्मान भारत स्कीम के अंतर्गत केवल आर्थोपेडिक्स, जनरल मेडिसिन, सर्जरी  और शिशु रोग का उपचार प्रदान करने का उल्लेख किया है. बीजीएच ने अपने न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी, बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी, कार्डियोलॉजी, नेत्र रोग आदि जैसे सुपर-स्पेशियलिटी विभागों को आयुष्मान के लाभार्थियों से दूर रखा है.

कंचन ने कहा, “बीजीएच को अपने हर विभाग का दरवाजा आयुष्मान के लाभार्थियों के लिए खोलना चाहिए. बोकारो जिले में आयुष्मान भारत स्कीम से पहले ही 20 निजी अस्पताल और  डायग्नोस्टिक ​​केंद्र जुड़े हुए हैं. वे कम या ज्यादा बीजीएच द्वारा उल्लेखित सामान्य विशेषज्ञता प्रदान करते हैं जैसे सर्जरी, चिकित्सा आदि.  दरअसल आयुष्मान लाभार्थियों को न्यूरोसर्जरी, ऑन्कोलॉजी, कार्डियोलॉजी में उपचार का लाभ उठाने के लिए बाहर जाना पड़ता है. बीजीएच को गरीबों के लिए सोचना चाहिए.”

बीजीएच प्रबंधन ने हालांकि मंत्रियों के कहने पर आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत जुड़ने के लिए अपना कदम बढ़ाया है, पर वह अंदर से काफी उत्सुक नहीं दिख रहा है. बीजीएच में 140 डॉक्टरों, 250 पैरा मेडिकल स्टाफ, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और लगभग 10 विभिन्न विभागों के साथ इतना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर है,  पर आयुष्मान लाभार्थियों के लिए केवल 25 बेड का यूनिट खोलने का मन बनाया है जो नाकाफी है.

हर साल इलाज कराते हैं साढ़े आठ लाख रोगी  

बीजीएच में हर साल करीब 8.5 लाख रोगी अपना इलाज कराने आते हैं जिसमें पचास हजार अस्पताल में भर्ती होते हैं. संभवत: आयुष्मान भारत को सितंबर के दूसरे सप्ताह से पहले बीजीएच में लॉन्च किया जायेगा.

बीएसएल के कम्यूनिकेशन हेड मणिकांत धान ने कहा कि “बीजीएच अब तक आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकृत नहीं है. हमने इसके लिए प्रक्रिया शुरू की है.”

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