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व्यावहारिक और वैज्ञानिक थी बुद्ध की शिक्षा

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Ranchi: बुद्ध यानी ज्ञानी/प्रकाश. इनकी शिक्षा व्यावहारिक और पूर्णतः वैज्ञानिक थी. इनकी शिक्षा कृषि और व्यापार व वाणिज्य के अनुकूल थी. इनकी शिक्षा वास्तव में कृषि और वाणिज्य को बढ़ावा देनेवाली थी. बुद्ध अहिंसा पर जोर देते थे, जिससे कृषि कर्म के लिए जानवर/बैल उपलब्ध हुए तथा जानवरों से प्राप्त गोबर कृषि के लिए खाद. बुद्ध पशु बलि के सख्त विरोधी थे. उन्होंने सूदखोरी को मान्यता दिया, जिससे व्यवसाय को बढ़ावा मिला. बुद्ध के पहले यज्ञ प्रथा, जटिल कर्मकांड, पशुबलि प्रचलित थी, जिससे समय, धन और पशुओं की हानि होती थी और इस प्रकार उस वक्त प्रचलित धार्मिक विचार कृषि कर्म और व्यापार के लिए अनुकूल नहीं था. उस समय ऐसी मान्यता थी कि समुद्र पार करना और सूदख़ोरी आदि से धर्म की हानि होती है.

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बौद्ध धर्म में ईश्वर का कोई अस्तित्व नहीं था. पुरोहितवाद का कोई स्थान नहीं था. कोई ऊंच-नीच नहीं था. समानता पर आधारित धर्म था. साथ ही साथ गौतम बुद्ध का व्यक्तिव आकर्षक था. उन्हें तत्कालीन राजाओं का समर्थन प्राप्त हुआ तथा वे साल के 8 माह यानी बारिश को छोड़ कर प्रचार-प्रसार करते थे. प्रचार हेतु मिशनरीज व्यवस्था विकसित करनेवाले पहले धर्माचार्य थे. मतलब कि उन्होंने धर्म प्रचारक नियुक्त किये, संघ बनाये और इन भिक्षुओं को रहने के लिए मठ बनवाये, जिसे विहार कहा जाता था. विहारों को अत्यधिक संख्या होने की वजह से ही बिहार राज्य का नाम बिहार पड़ा.

उस वक्त की सामाजिक व्यवस्था में ऊंच-नीच की व्यवस्था थी. जो निम्न स्थान रखते थे और जो शांति प्रिय थे और जीवकोपार्जन हेतु जो कृषि और व्यापार करते थे. वे सभी देखते देखते ब्राह्मण धर्म को छोड़ कर बौद्ध धर्म को अपना लिये.

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देखते-देखते भारत से बौद्ध धर्म ने ब्राह्मणों को अपदस्थ कर दिया और विश्व का प्रमुख धर्म बन गया. श्रीलंका, जावा, सुमात्रा, चीन, जापान, बर्मा, कम्बोडिया आदि देशों का यह प्रमुख धर्म बन गया. इनके धर्म में आडम्बर नहीं था. सरल व सहज था. खर्चीला नहीं था जो इसे अनूठा धर्म बनाता था.

इनके जन्म पर एक ज्योतिषी ने घोषणा की थी कि यह बालक बड़ा होकर या तो चक्रवर्ती सम्राट बनेगा या सन्यासी. इनके पिता अपना उत्तराधिकारी यानी राजा बनाना चाहते थे तथा इसके लिए कई प्रयत्न किये पर नियति को कुछ और मंजूर था, उन्होंने सन्यासी बन कर विश्व का प्रथम गुरु यानी शिक्षक बन कर मानवता को एक नयी दिशा दिये. लोगों के जीवन को हिंसामुक्त और नैतिक बनाया. भारत आगे चल कर इनकी शिक्षा के बल पर ही जगत गुरु बना तथा सोने की चिड़िया कहलाया.

मानवता को राह दिखानेवाले बुद्ध को एशिया की ज्योति कहा जाता है जो पूर्णतः सत्य है. इनकी शिक्षा ने ही मोहनदास को महात्मा गांधी बनने में मदद की. आज सम्पूर्ण विश्व में अतिवाद, भौतिकवाद, अनैतिकता तथा हिंसा  का बोलबाला है, ऐसी स्थिति में बुद्ध के मध्यम मार्ग और अहिंसा की नीति से ही मानवता की रक्षा सम्भव है.

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