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मनी लॉन्ड्रिंग का मामला :  पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ प्रदीप कुमार ने ईडी की विशेष अदालत में किया सरेंडर,  जेल भेजे गये

सुप्रीम कोर्ट ने 1.76 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सभी आरोपियों को सक्षम अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था.

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Ranchi :  झारखंड कैडर के सेवानिवृत आईएएस अधिकारी डॉ प्रदीप कुमार और उनके सगे भाई राजेंद्र कुमार ने ईडी की विशेष अदालत में  मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को सरेंडर कर दिया. दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लेकर भेजा जेल भेज दिया गया. उन पर वर्ष 2005 से 2009 के बीच लगभग एक करोड़, 76 लाख रुपए मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 1.76 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सभी आरोपियों को सक्षम अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था. प्रदीप कुमार के सहयोगी श्यामल चक्रवती ने भी इस मामले में पूर्व में सरेंडर किया था.

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 1991 बैच के आईएएस हैं डॉ प्रदीप,रांची डीसी भी रहे हैं

1991 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ प्रदीप रांची के डीसी रह चुके हैं . डॉ प्रदीप के स्वास्थ्य सचिव के पद पर रहने के दौरान दवा खरीद घोटाले में उनकी और उनके करीबियों की भूमिका रही .सीबीआई ने इस मामले में डॉ प्रदीप को गिरफ्तार किया था.लंबे वक्त तक वह इस मामले में जेल में बंद रहे.जेल से छूटने के बाद रघुवर सरकार ने डॉ प्रदीप को कई प्रमंडलों में कमिश्नर का प्रभार दिया था. डॉ प्रदीप दुमका के कमिश्नर पद से पिछले साल रिटायर हुए थे.

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 ईडी ने की थी संपति जब्त

जानकारी के अनुसार ईडी ने मनी लाउंड्रिंग एक्ट के तहत डॉ प्रदीप कुमार और उनके करीबियों की रांची, उदयपुर, कोलकाता और बेंगलुरु की संपत्ति जब्त की थी. इन संपत्ति का रजिस्ट्री मूल्य करीब दो करोड़ रुपये था, जबकि बाजार मूल्य 10 करोड़ रुपये बताया जाता है. ईडी ने झारखंड में पहली बार किसी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की संपत्ति मनी लाउंड्रिंग एक्ट के तहत जब्त की  थी.

ईडी  ने जांच में पाया गया था कि डॉ प्रदीप कुमार ने अपने भाई राजेंद्र कुमार, सीए नीरज केजरीवाल, दो व्यापारी श्यामल चक्रवर्ती और धर्मेंद्र कुमार धीरज के साथ मिलीभगत कर मनी लाउंड्रिंग की थी.  आरोप है कि डॉ प्रदीप से काम कराने के एवज में श्यामल चक्रवर्ती ही रिश्वत की वसूली करता था. उस राशि को चल-अचल संपत्ति में निवेश करता था. डॉ प्रदीप ने रिटर्न फाइल करने के लिए एचयूएफ बनाया था.इसका प्रमुख अपने छोटे भाई राजेंद्र कुमार को बना दिया था.

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इसके बाद एचयूएफ के माध्यम से फिक्स्ड डिपोजिट, इंदिरा विकास पत्र और किसान विकास पत्र में निवेश किया था. श्यामल चक्रवर्ती और राजेंद्र ने पार्टनरशिप में एक फार्म मेसर्स एसआर इंटर पार्टनर बनाया इसके जरिये डॉ प्रदीप कुमार ने रिश्वत की राशि का निवेश किया था.

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 सीबीआई ने इन धाराओं में दर्ज किया था मामला

सीबीआई ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में हुए घोटाले में डॉ प्रदीप कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 15 और आइपीसी की धारा 120बी, 420, 467 और 471 के तहत रांची में मामला दर्ज किया था. कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें कहा था कि आइएएस डॉक्टर प्रदीप कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी राशि का गबन किया.

साथ ही आय से अधिक संपत्ति भी अर्जित की. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी डॉ प्रदीप कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी. बता दे डॉ प्रदीप कुमार 1991 बैच के आइएएस अधिकारी हैं. वह एकीकृत बिहार में पटना के डीसी रह चुके हैं. इसके अलावा वह रांची के डीसी भी रहे हैं. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में हुए घोटाले में डॉ कुमार को रांची के बिरसा मुंडा जेल होटवार भी लंबे समय तक रहना पड़ा था.

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