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Opinion

आरक्षण के ”जिन्न“ को बोतल से बाहर ना निकालें

Lalit Gargमहाराष्ट्र में आरक्षण की मांग को लेकर मराठा आंदोलन की आग जैसे-जैसे तेज होती जा रही है, एक गंभीर संकट की स्थिति बनती जा रही है. मराठा आरक्षण आंदोलन की मांग को लेकर खुदकुशी एवं आत्मदाह करने की संख्या तो बढ़ ही रही है, मराठा…

‘विश्व आदिवासी दिवस’ को भूल गयी झारखंड सरकार

एक ओर पूरी दुनिया में आज की तारीख को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाया जाता है. लेकिन, झारखंड में आदिवासी दिवस को भूला दिया गया. संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा मुकर्रर की गई, यह तारीख में भारत भी हस्ताक्षरी के रूप में है. वही संयुक्त…

भारत में आदिवासी उपेक्षित क्यों है? – गणि राजेन्द्र विजय

Gani Rajendra Vijayअंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस सिर्फ उत्सव मनाने के लिए नहीं, बल्कि आदिवासी अस्तित्व, संघर्ष, हक-अधिकारों और इतिहास को याद करने के साथ-साथ जिम्मेदारियों और कर्तव्यों की समीक्षा करने का भी दिन है. आदिवासियों को उनके अधिकार…

मनरेगा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और दोगुनी जवाबदेही लायी जाये

Deb Maliaमनरेगा की शिकायत निवारण व्यवस्था कानून तो बहुत ही शक्तिशाली है. लेकिन धरातल पर कभी पहुंच ही नहीं पाई. स्थानीय अधिकारी तथा ठेकेदार, मजदूरों और गरीबों के लिए इतने अपरिहार्य बन चुके थे की लाख शोषित होने के बावजूद ग्रामीण मजबूरी…

भारत आखिर क्यों चुप है 34 अनाथ नाबालिग लड़कियों के साथ हुई हैवानियत पर ?

Tirth Nath Akashतारीख बस तारीख ही हमें याद रहती है. कभी शहादत दिवस के रुप में मनाते हैं और कभी जन्मदिवस के रुप में, एक दिवस हिन्दुस्तान को और मनना चाहिए वो है ‘दुष्कर्म दिवस’. हां, शायद यह शब्द शिक्षित समाज के लिए अशोभनीय है लेकिन क्या…

मीडिया पर संपूर्ण नियंत्रण का इरादा अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरा

Faisal Anuragइमरजेंसी के दौरान लाल कृष्‍ण आडवाणी ने कहा था, मीडिया को झुकने के लिए कहा गया तो वह रेंगने लगा. मीडिया के लिए यह उक्ति आज भी प्रासंगिक है. पिछले कुछ समय से मीडिया पर भारी दबाव है और आलम यह है कि सरकार बहादुर के बारे…

छह इंच छोटा करने का अधिकार किस कानून ने दिया है डीजीपी साहब

Faisal Anuragआजकल भाषा की मर्यादा को तार-तार करने की होड़ लगी हुयी है. जो जितने बड़े पद पर है उसकी जुबान भी उसी तरह फिसलती है. इससे ना केवल भाषा अपना अर्थ खोती है बल्कि इसका असर भी समाज पर नकारातमक पड़ता है. इसी क्रम में झारखंड के…

झारखंड के गांव-गांव की आम कहावत “मनरेगा में जो काम करेगा वो मरेगा”

Deb Maliaझारखंड के किसी भी गांव में चले जाइए और नरेगा शब्द का बस ज़िक्र कर दीजिए, उसके बाद आपको जो सुनाई देगा, वो तीन शब्द, झारखंड में पिछले 12 सालो की नरेगा की कहानी को दर्शाता है. “मनरेगा तो मरेगा” या “मनरेगा में जो काम करेगा वो मरेगा”…

क्या भारतीय राजनीति को आपराधिक तत्वों से मुक्त करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे

Faisal Anuragप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपराधिक मामलों में दोषी सांसदों और विधायकों के मामले की त्वारित जांच कराने का वादा किया था. 51 माह बीत जाने के बाद एडीआर ने ऐसे दोषी 64 सांसदों और विधायकों की सूची जारी की है जिनपर गंभीर किस्म…

देश सब देख रहा है

Dr. Neelam Mahendraआज राजनीति केवल राज करने अथवा सत्ता हासिल करने मात्र की नीति बनकर रह गई है. उसका राज्य या फिर उसके नागरिकों के उत्थान से कोई लेना देना नहीं है. यही कारण है कि आज राजनीति का एकमात्र उद्देश्य अपनी सत्ता और वोट बैंक की…