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सीबीआई का आरटीआई कार्यकर्ता को बैंक फ्रॉड मामले में जारी लुकआउट सर्कुलर के बारे में  बताने से इनकार

सीबीआई ने आरटीआई कानून की धारा 8(1) (एच) का उल्लेख किया जो ऐसी सूचना मुहैया कराने से उसे छूट प्रदान करता है

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NewDelhi : सीबीआई  ने जांच पर प्रभाव पड़ने की बात कह कर आरटीआई  कानून के तहत लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) की संख्या बताने से इनकार कर दिया है , जो सीबीआई ने 2014 और 2019 के बीच बैंक और वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में आरोपियों को पकड़ने के लिए जारी किये हैं. सीबीआई ने कहा कि इससे जारी जांच पर प्रभाव पड़ सकता है. सूचना मांगने वाले  पुणे के आरटीआई कार्यकर्ता विहार दुर्वे  के अनुसार सीबीआई  ने  लुकआउट सर्कुलर जारी करने के बाद सक्षम प्राधिकारियों की ओर से प्राप्त आदेशों की जानकारी  देने से  मना  कर दिया. जानकारी के अनुसार सीबीआई ने आरटीआई कानून की धारा 8(1) (एच) का उल्लेख किया जो ऐसी सूचना मुहैया कराने से उसे छूट प्रदान करता है जो किसी आरोपी की गिरफ्तारी या अभियोजन पर प्रतिकूल असर डाल सकती है.

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सीबीआई की ओर से यह जवाब  आरटीआई कार्यकर्ता  द्वारा सीबीआई, विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय में आरटीआई अर्जी दायर करने के बाद आया है. जान लें कि आरटीआई के माध्यम से बैंक धोखाधड़ी के फरार आरोपियों के खिलाफ जांच के संबंध में जानकारी मांगी  गयी थी.

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 2014 से 2019 में बैंक लोन डिफॉल्टर भगोड़ों की संख्या मांगी थी

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विहार  दुर्वे ने कहा कि सीबीआई  ने अपने अधिकारियों द्वारा भगोड़ों को वापस लाने के लिए कानूनी और यात्रा सेवाओं पर किये गये  खर्च के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी.  सीबीआई ने धारा 8 (1) (एच) और आरटीआई कानून की धारा 24 के तहत खुलासे से छूट का उल्लेख किया, विदेश मंत्रालय ने उसकी अर्जी गृह मंत्रालय को भेजते हुए कहा कि मामला आव्रजन ब्यूरो (इमिग्रेशन ब्यूरो) के अधिकार क्षेत्र के तहत जुड़ा हुआ है.इमिग्रेशन ब्यूरो इंटेलिजेंस ब्यूरो की एक इकाई है जिसे आरटीआई कानून के पारदर्शी प्रावधानों से छूट प्राप्त है जब तक कि आवेदनकर्ता भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों से जुड़ी कोई सूचना नहीं मांगता.

दुर्वे ने  वित्त मंत्रालय से 2014 से 2019 में बैंक लोन डिफॉल्टर भगोड़ों की संख्या मांगी थी लेकिन मंत्रालय की ओर से  कोई सूचना नहीं दी गयी. साथ ही लुकआउट नोटिस को कमजोर करने के बारे में भी सूचना मांगी थी जिसमें गिरफ्तारी के बजाय महज सूचना देने की बात कही गयी थी लेकिन उस पर भी  कोई जानकारी नहीं  मुहैया करायी गयी.

31 भगोड़े उद्योगपति सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं

जान लें कि पिछले साल मार्च में सरकार ने संसद में जानकारप दी थी  कि शराब कारोबारी विजय माल्या, हीरा कारोबारी नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, जतिन मेहता और सहित 31 भगोड़े उद्योगपति सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं.  इसके अलावा  सीबीआई को  चेतन जयंतिलाल संदेसरा, दीप्ति चेतन , सुनील रमेश रूपाणी, पुष्पेश कुमार बैद, जयकुमार रेवाभाई पटेल, सुरेंद्र सिंह, अंगत सिंह, हरसाहिब सिंह, हरलीन कौर, आशीष जोबनपुत्रा, निशल मोदी की भी तलाश है. कहा था कि  विदेश मंत्रालय को विजय  माल्या, जोबनपुत्रा, बैद, संजय कालरा, वर्षा कालरा और आरती कालरा के प्रत्यर्पण अनुरोध सीबीआई से मिले हैं .

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