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चतरा संसदीय सीट: बड़ा सवाल क्या चतरा में फ्रैंडली मैच खेलेगी कांग्रेस या हटेगी पीछे?

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  • नाम वापस लेने की अंतिम तिथि बता डॉ अजय ने दिया इशारा
  • लड़ाई कांग्रेस और आरजेडी के बीच, मजा ले रहे जेएमएम और जेवीएम
  • नहीं सुलझा विवाद, फिर भी कांग्रेस अध्यक्ष कह रहे “मजबूत है यूपीए महागठबंधन”
  • पांच बैठकों के बाद भी चतरा की तस्वीर साफ नहीं

Nitesh Ojha

Ranchi: राजनीति में कुछ भी मुमकिन है. कब-कौन नेता किस ओर पाला बदले यह कोई नहीं जानता. कम से कम झारखंड में बने महागठबंधन के संदर्भ में तो यह बात सटीक बैठती है.

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चतरा संसदीय सीट में उम्मीदवार दिये जाने के लिए गत 17 जनवरी से 31 मार्च तक महागठबंधन की पांच बैठक हुई. लेकिन जिस तरह आरजेडी पलामू सहित चतरा की मांग पर अड़ा है. उससे जेएमएम और जेवीएम तो नहीं लेकिन कांग्रेस तो जरूर ही असमंजस में पड़ गयी है.

चतरा पर असमंजस लेकिन गठबंधन मजबूत

रविवार को जेएमएम नेता के आवास पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने दावा किया कि महागठबंधन में आरजेडी मजबूती के साथ खड़ा है. लेकिन चतरा सीट को लेकर अबतक कोई हल नहीं निकलने से पार्टी के लिए ऊहापोह की स्थिति तो बन ही गयी है.

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अब डॉ अजय अब खुद ही कह रहे है कि 12 अप्रैल उम्मीदवार के नाम वापस लेने की तिथि है. ऐसे में अब सवाल खड़ा होता है कि क्या कांग्रेस चतरा सीट छोड़ेगी या आरजेडी के साथ पार्टी फ्रैंडली चुनाव लड़ेगी?

हालांकि, आरजेडी नेता ने फ्रेंडली चुनाव लड़ने की बात कही थी. दरअसल, 23 मार्च की बैठक में चतरा सीट कांग्रेस के खाते में जाने के बाद आरजेडी नेता संजय यादव ने कहा था कि चतरा पर पार्टी फ्रेंडली चुनाव लड़ सकती है.

पांच बैठकों में से तीन में आरजेडी शामिल हुआ, फिर भी चतरा की तस्वीर साफ नहीं हो पायी है.

कब-कब हुई बैठक

• महागठबंधन में शामिल दलों (कांग्रेस, जेएमएम, जेवीएम और आरजेडी) की पहली बैठक 17 जनवरी को हेमंत सोरेन के आवास पर हुई थी. आरजेडी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अन्नापूर्णा देवी की उपस्थिति में डॉ अजय कुमार ने दावा किया कि सभी दल मिलकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ेगे.

सीट शेयरिंग की बात आयी, तो कहा कि कांग्रेस 7, जेएमएम 4, जेवीएम 3 और आरजेडी 1 सीट पर चुनाव लडेगी. लेकिन इसे पुख्ता तीन माह तक नहीं किया जा सका. मामला दिल्ली तक पहुंचा.

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• 16 मार्च को हेमंत सोरेन और बाबूलाल मरांडी ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की. बाद में तीन दलों ने कहा कि महागठबंधन और सीट शेयरिंग पर सहमति बन गई है. जो भी संशय था, उसे दूर कर लिया गया है.

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सभी घटक दल जेएमएम प्रमुख शिबू सोरेन की मौजूदगी में उनके आवास पर महागठबंधन और सीट शेयरिंग की घोषणा करेंगे. लेकिन इस बैठक में आरजेडी शामिल नहीं हुआ. दरअसल वह पलामू के साथ चतरा सीट की मांग पर अड़ा था.

• एक बार फिर सीट शेयरिंग पर 23 मार्च को बाबूलाल मरांडी के आवास पर बैठक हुई. आरजेडी उपस्थित तो रहा, लेकिन पलामू और चतरा सीट को लेकर अड़ा रहा.

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जब कोई सहमति नहीं बनी, तो उपस्थित आरजेडी नेता संजय यादव नाराज हो निकल गये. उन्होंने दावा किया कि भले ही एक सीट पलामू आरजेडी को मिले, लेकिन चतरा पर पार्टी फ्रेंडली चुनाव भी लड़ सकती है.

• 24 मार्च को शिबू सोरेन के आवास पर यूपीए गठबंधन के दलों ने सीट शेयरिंग की घोषणा कर दी. केवल एक सीट (पलामू) दिये जाने से नाराज आरजेडी न केवल बैठक में अनुपस्थित रहा, बल्कि चतरा और पलामू सीट पर उम्मीदवार दिये जाने पर अड़ा रहा.

26 मार्च को इसकी अप्रत्यक्ष ऐलान भी हो गया, जब आरजेडी नेता राबड़ी देवी ने सुभाष यादव को पार्टी का सिंबल देकर चतरा से उम्मीदवार बनाने की मंशा जाहिर कर दी.

• जब चतरा पर कोई हल नहीं निकाला, तो 31 मार्च को एक और बैठक हुई. इसमें आरजेडी के नये प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा शामिल हुए. लेकिन चतरा को लेकर कांग्रेस और आरजेडी के बीच पीछे हटने पर कोई आम राय नहीं बन सकी.

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मजबूती के साथ यूपीए गठबंधन में खड़ा है आरजेडी!

चतरा सीट की तस्वीर भले ही साफ नहीं हो सकी है. लेकिन इसके बावजूद झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय कुमार एकबार फिर दावा कर रहे है कि यूपीए गठबंधन में आरजेडी अभी भी मजबूती से खड़ा है.

चतरा सीट पर बातचीत जारी है. कांग्रेस और आरजेडी एक-दूसरे को समझाने की कोशिश कर रहे है. हालांकि इस दौरान डॉ अजय ने यह भी बता दिया कि अगर चतरा पर दोनों दलों में कोई असमन्वय भी बनता है, तो इससे यूपीए के बाकी 13 लोकसभा सीटों पर कोई असर नहीं पडेगा.

फ्रेंडली चुनाव या सीट छोड़ने की बन रही स्थिति

कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान के बाद यह सवाल खड़ा होता है कि चतरा में आरजेडी और कांग्रेस के बीच फ्रेंडली मैच की स्थिति बनेगी. या यूपीए गठबंधन की मजबूती के लिए कांग्रेस इस सीट को छोड़ेगी.

अगर ऐसा होता है कि 24 मार्च को डॉ अजय कुमार के किसी भी सीट पर फ्रेंडली चुनाव नहीं लड़ने के दावे खारिज होते हैं. 31 मार्च की बैठक में उनके बयान से इसका इशारा भी साफ झलकता है.
उन्होंने कि 12 अप्रैल तक उम्मीदवार के नाम वापस लेने की तिथि तय है. चर्चा गरम है, लेकिन बैचेनी की कोई बात नहीं है.

कांग्रेस और आरजेडी के बीच रार, मजा ले रहे जेवीएम और जेएमएम

बात अगर राज्य के 14 सीटों पर चुनाव लड़ने की करें, तो 13 सीटों के बीच तो चारों दलों में कोई विवाद नहीं है. लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं है कि चतरा सीट पर कांग्रेस और आरजेडी के बीच संघर्ष जारी है.

बाकी दो दल जेवीएम को अपने मन मुताबिक दो (कोडरमा और गोड्डा) और जेएमएम को चार सीट (गिरीडीह, जमशेदपुर, दुमका और राजमहल) दी गयी है. ऐसे में भले ही डॉ अजय दावा करें कि यूपीए गठबंधन मजबूती के साथ खड़ा है.

लेकिन वो इस बात से भी इनकार नहीं कर सकते, लड़ाई केवल कांग्रेस और आरजेडी के बीच का ही है. बाकी दोनों दल जेवीएम और जेएमएम तो केवल मजा ही ले रहे है.

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