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मुख्य सचिव ने पूछा जेसीएनएल का क्या है मामला, स्पष्ट करें

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  • सीआइआइ की शिकायत को एनोनीमस साबित करने पर जुटा महकमा
  • कहा जा रहा है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग के प्रावधानों से नहीं बनता है मामला

Ranchi: राज्य सरकार ने झारखंड कम्युनिकेशन नेटवर्क लिमिटेड (जेसीएनएल) के 490 करोड़ की निविदा मामले पर सूचना प्रावैधिकी और ई-गवर्नेंस विभाग से पूरी जानकारी मांगी है. मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव के कार्यालयों समेत अन्य जगहों पर जेसीएनएल की ओर से निकाली गयी भारत ब्राड बैंड नेटवर्क लिमिटेड की निविदा में बरती गयी अनियमितता को लेकर भारतीय औद्योगिक महासंघ (सीआइआइ) की तरफ से शिकायत की गयी है. शिकायतवाद में केंद्रीय सतर्कता आयोग के नियमों का पालन नहीं करने की बातें कही गयी हैं. उधर इस शिकायत के बाद विभाग में हलचल काफी तेज हो गयी है. इस शिकायत को दबाने की सारी कोशिशें शुरू कर दी गयी हैं. यह कहा जा रहा है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के गाइडलाइन के आधार पर एनोनीमस शिकायत के आधार पर किसी काम को बाधित नहीं किया जा सकता है. इसे लेकर सीआइआइ के पत्र को ही फरजी बताया जा रहा है. यह कहा जा रहा है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझ कर सीआइआइ के लेटर हेड का इस्तेमाल कर सभी जगहों पर शिकायत कर दी है.

पहले ही टेंडर में फंसा मामला

सूचना प्रावैधिकी विभाग की तरफ से गठित जेसीएनएल के पहले टेंडर में ही विवाद हो गया है. राज्य के 11 जिलों में ब्राडबैंड कनेक्टिविटी सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाने को लेकर निविदा आमंत्रित की गयी थी. पहली बार निकाली गयी निविदा का डीपीआर तीन सौ करोड़ था. इसमें शिरकत करनेवाली कंपनियों ने न्यूनतम 490 करोड़ की बोली लगा दी. यह बोली तय लागत से 40 फीसदी से अधिक थी. आनन-फानन में सरकार की तरफ से इस निविदा को रद्द कर दिया गया. जानकारी के अनुसार इसके बाद न्यूनतम इस्टीमेट 490 करोड़ कर दिया गया. दूसरी बार की निविदा में तीन कंपनियों ने भाग लिया है. इसका टेक्निकल बिड खोल दिया गया है. तकनीकी रूप से क्वालिफाई करनेवाली कंपनी का फायनांसियल बिड खोला जायेगा. जेसीएनएल का दूसरा टेंडर वाहनों को किराये पर रखने का है. इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.

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जेसीएनएल में सक्रिय हैं मात्र दो ही व्यक्ति

2017 में गठित जेसीएनएल में दो ही व्यक्ति ज्यादा सक्रिय हैं. इसमें सीइओ यूपी शाह और उनके सहयोगी अनुराग लकड़ा शामिल हैं. अनुराग लकड़ा कांट्रैक्ट पर नियुक्त हैं. इनके द्वारा ही सभी निविदा का निष्पादन किया जाता है. निदेशक मंडल की एक भी वार्षिक आम सभा (एजीएम) अब तक नहीं हुई है. इसका ब्योरा भी कंपनी लॉ बोर्ड को नहीं सौंपा गया है.

पूर्व में आइटी से संबंधित सभी आधारभूत संरचना का काम करता रहा है जैप आइटी

सूचना प्रावैधिकी विभाग की एजेंसी जैप आइटी की तरफ से राज्य में सूचना तकनीक से संबंधित सभी आधारभूत संरचना विकसित करने का काम किया जाता रहा है. जैप आइटी की तरफ से राज्य के स्टेट वाइड एरिया नेटवर्किंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, मुख्यमंत्री डैश बोर्ड समेत सभी विभागों के कंप्यूटरीकरण करने का काम किया जा रहा है. इतना ही नहीं राजस्व एवं भूमि सुधार, मानव संसाधन विभाग, परिवहन और अन्य विभागों के लिए वेब पोर्टल बनाने का भी काम जैप आइटी के द्वारा ही किया जाता रहा है. जैप आइटी की तरफ से कई विभागों में एंड्रॉयड फोन भी दिये गये हैं. अब ग्रामीण क्षेत्रों में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने को लेकर जीसीएनएल का सहयोग लिया जा रहा है.

क्या कहता है विभाग

आइटी विभाग के निदेशक यूपी शाह का कहना है कि झारखंड के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आइटी नेटवर्किंग की सुविधा स्थापित करने को लेकर बीबीएनएल के साथ समझौता हुआ है. पहले चरण में बीबीएनएल की तरफ से रांची, लोहरदगा, रामगढ़, सरायकेला-खरसांवा, साहेबगंज, पलामू, लातेहार, हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, कोडरमा, देवघर में केबुल बिछाने से लेकर अन्य कार्य किया गया है. अब बचे हुए जिलों के लिए जेसीएनएल ने निविदा आमंत्रित की है. उन्होंने कहा कि आइटी निदेशक के रूप में उनका डेपूटेशन (प्रतिनियुक्ति) सिर्फ एक वर्ष बचा है. उन्होंने कहा है कि पूर्व में जेसीएनएल की निविदा आमंत्रित करने को लेकर राज्य मंत्रिमंडल की सहमति ली गयी थी. इसे रद्द करने पर भी अधिकारियों से परामर्श लिया गया है.

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