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CM अपने 5 साल के कार्यकाल में 3 बार कर चुके हैं झारखंड से उग्रवाद खात्मे की घोषणा, बावजूद इसके राज्य में हो रही नक्सल हिंसा

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Ranchi: राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने पांच साल के कार्यकाल में झारखंड से उग्रवाद के खात्मे के लिए तीन बार घोषणा कर चुके हैं. इसके बावजूद भी राज्य में नक्सल हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रहा है.

हालांकि पहले की तुलना में अब भले ही नक्सल हिंसा कम हो गयी है लेकिन खत्म नहीं हुई है. बहुत कोशिशों के बावजूद भी इस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड पूरे देश में नक्सल मामले में दूसरे स्थान पर है. वर्तमान में झारखंड के 13 जिले अति नक्सल प्रभावित श्रेणी में शामिल हैं.

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सीएम ने कब की थी राज्य से उग्रवाद के खात्मे की घोषणा

घाटशिला (पूर्वी सिंहभूम) में 19 मार्च 2018 को रंकणी महोत्सव को संबोधित करते हुए सीएम रघुवर दास ने कहा था कि राज्य सरकार अभी बिजली कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दे रही है.

उन्होंने इसी वर्ष दीपावली से पहले राज्य के हर घर को रोशन करने की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार 24 घंटे बिजली देने की व्यवस्था कर रही है. सीएम ने यह भी घोषणा की है कि पूरे राज्य से वर्ष 2018 तक उग्रवाद का सफाया कर दिया जाएगा.

6 मार्च 2017 मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा था कि 2017 में उग्रवाद का सफाया हो जाना चाहिए. इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दे दी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि उग्रवाद का मुखौटा ओढ़कर कुछ लोग विकास कार्य में लगी मशीनों को जला रहे हैं.

इसलिए उन्होंने नक्सल प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुवा में चेतावनी दी थी कि आत्मसमर्पण करो, वर्ना मारे जाओगे. इससे पहले वर्ष 2016 में भी मुख्यमंत्री और तत्कालीन डीजीपी डीके पांडेय पूरे साल यह कहते रहे थे कि बस इस साल के अंत तक नक्सलवाद खत्म हो जाएगा.

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देश के 30 नक्सल प्रभावित जिलों में 13 जिले झारखंड के हैं

झारखंड में भले नक्सली कमजोर पड़ गये हैं और झारखंड पुलिस लगातार नक्सलियों के खात्मे के लिए अभियान चला रही है. इसके बावजूद भी देश के 30 नक्सल प्रभावित जिलों में 13 जिले झारखंड के हैं, जो सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों की सूची में हैं.

सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों के मामले में झारखंड पहले स्थान पर है, तो वहीं छत्तीसगढ़ के 8 जिले सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों के साथ दूसरे स्थान पर है.

झारखंड के ये जिले सर्वाधिक नक्सल प्रभावित

झारखंड के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों में खूंटी, गुमला, लातेहार, सिमडेगा, पश्चिम सिंहभूम, रांची, दुमका, गिरिडीह, पलामू, गढ़वा, चतरा, लोहरदगा और बोकारो हैं.

सरायकेला,पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग,धनबाद, गोड्डा भी नक्सलवाद की समस्या से जूझ रहे हैं. वहीं कम संवदेनशील जिलों में कोडरमा, जामताड़ा, पाकुड़ और रामगढ़ है. जबकि देवघर-साहेबगंज नक्सल प्रभावित नहीं माना गया है.

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नक्सली अपने पांव पसारने की कवायद में जुटे हैं

झारखंड में पिछले आठ सालों में नक्सल प्रभावित इलाकों के क्षेत्रफल में कमी आयी है. हालांकि, इस बीच नक्सली अपने पांव पसारने की कवायद में जुटे हुए हैं, लेकिन सुरक्षाबलों की चौकसी, केंद्र-राज्यों के आपसी समन्वय, राष्ट्रीय नीति और एक्शन प्लान के कारण नक्सलियों को इसमें सफलता नहीं मिल रही है.

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा नक्सल समस्या से निबटने के लिए लागू की गयी राष्ट्रीय नीति और एक्शन प्लान के बेहतर क्रियान्वयन से देश भर में नक्सली इलाकों में काफी सुधार आया है. पिछले पांच साल में नक्सली समस्या पर काफी हद तक काबू पाया गया है.

झारखंड में हुई 3357 नक्सली हिंसा, मारे गये 997 लोग 

नक्सली हिंसा और मारे गये लोगो में छत्तीसगढ़ का स्थान पहला है, जबकि झारखंड दूसरे और बिहार तीसरे स्थान पर है. गृह मंत्रायल की रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न नक्सली संगठनों में सीपीआइ माओवादी सबसे खतरनाक है और 88% हिंसा इसी संगठन ने की है.

2010 से 2018 तक करीब 10660 नक्सली हिंसा हुई है. इसमें अकेले छत्तीसगढ़ में 1370 लोग मारे गये. झारखंड में 3357 नक्सली हिंसा हुई और 997 लोग मारे गये, जबकि बिहार में 1526 नक्सली हिंसा में 387 लोग मारे गये.

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