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सीएम रघुवर दास का कुपोषण मुक्त अभियान और बच्चों का अंडा व आंगनबाड़ी सेविका

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Surjit Singh

दो सितंबर को रांची से प्रकाशित सभी अखबारों में मुख्यमंत्री रघुवर दास का एक वक्तव्य छपा है. उन्होंने कहा हैः राज्य में कुपोषण बड़ी समस्या है. इससे निपटने में सबका सहयोग जरुरी है. बच्चों को पौष्टिक आहार मिले, यह उनका जन्मसिद्ध अधिकार है. मुख्यमंत्री रविवार को मोरहाबादी मैदान में पोषण अभियान व पोषण दौ़ड़ कार्यक्रम में बोल रहे थे. कुपोषण के खिलाफ मुख्यमंत्री की चिंता जायज है.

झारखंड में 47. 8 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं. सत्ता संभालने के करीब पांच साल बाद भी मुख्यमंत्री का यह वक्तव्य न सिर्फ राज्य में बच्चों के हालात को बताने के लिए काफी है. बल्कि इस मामले में उनके सरकार की विफलता भी बता रहा है.

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दो सितंबर को ही सभी अखबारों में एक और खबर छपी है. मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से छोटी. न्यूज ब्रीफ में. शायद अखबारों की मजबूरी रही हो, छोटी खबर छापने की. कुछ अखबारों ने इस खबर को प्रकाशित ही नहीं किया. खबर हैः आंगनबाड़ीकर्मियों का रोषपूर्ण प्रदर्शन जारी.

कुपोषण को खत्म करने में आंगनबाड़ीकर्मियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. और झारखंड के आंगनबाड़ीकर्मी काम नहीं कर रहे हैं. वह अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. फिर झारखंड के बच्चे कुपोषण मुक्त कैसे होंगे.

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राज्य में करीब 39 हजार आंगनबाड़ी केंद्र हैं. हर आंगनबाड़ी केंद्र में एक सेविका और एक सहायिका काम करती है. राज्यभर की सेविका व सहायिका प्रदर्शन कर रही है. इस तरह करीब 78 हजार महिलाओं का आंदोलन रांची से प्रकाशित अखबारों के लिए खबर नहीं है.

सेविका व सहायिका के संगठन ने तीन सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी भी दी है. पर, मेन स्ट्रीम मीडिया में खबर नदारद है. मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की खबर में ”कुपोषण के खिलाफ जंग” हेडिंग से पहले पन्ने पर खबर देने वाले अखबार ने आंगनबाड़ी सेविका के आंदोलन की खबर को जगह ही नहीं दी.

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एक तथ्य यह भी है कि झारखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचने वाले बच्चों को पिछले चार माह से अंडा नहीं मिल रहा है. योजना के तहत बच्चों को प्रति सप्ताह तीन अंडा दिया जाना है. ताकि वह कुपोषण और बीमारी से लड़ सकें.

मई 2019 के बाद से बच्चों के लिए अंडा की सप्लाई बंद है. सरकार और मुख्यमंत्री को इसकी खबर ना होगी, यह संभव नहीं है.

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राज्य का मुखिया होने के नाते कुपोषण को लेकर मुख्यमंत्री की चिंता जायज है. पर, अगर बच्चों को अंडा नहीं देंगे, बच्चों के लिए खाना तैयार करने वाली सेविका व सहायिका ही यह काम नहीं करेगी, तो कुपोषण कैसे मिटेगा.

जब तक कुपोषण दूर करने के लिए चलायी जा रही योजनाओं को ठीक तरीके से लागू नहीं किया जाये, तब तक कुपोषण से लड़ाई, जंग जैसे बयानों का कोई मतलब नहीं. ऐसे वक्तव्य अखबारों की सुर्खियां जरुर बन सकती हैं, पर इससे कुपोषण खत्म नहीं होगा.

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