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राज्य में संघर्ष की तकतों को कमजोर करने की हो रही है सजिश, प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने पर उपवास पर बैठे समाज कर्मी

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Ranchi:  बिरसा मुंडा के समाधि स्थल की प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने के विरोध में आदिवासी संगठनों के द्वारा रांची बंद का आह्वान किया गया था. शंतिपूर्ण बंद करने निकले सैकड़ों युवाओं को हिरसात में लिया गया.

जिन्हे कैंप जेल में रखा गया. हालांकि बंद का असर रांची के कुछ स्थानों पर ही दिखा. वहीं दूसरी ओर राज्य के जानेमाने सामाजिक कर्मी बिरसा मुंडा शहीद स्थल की प्रतिमा क्षतिग्रस्त किये जाने के विरोध में उपवास पर बैठे.

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सामाजिक कर्याकताओं और जनआंदोलनो के अगुवा का मानना है कि यह सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. ताकि राज्य में प्रतिरोध की अवाज को समाप्त किया जा सके.

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संक्रमण के दौर से गुजर रहा राज्यः चन्द्र मार्डी

समाधि स्थल पर उपवास पर बैठे कुमार चन्द्र मार्डी कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार झारखंड के शहीदों को सम्मान नहीं देती. सिर्फ उनका नाम लेकर राजनीति करने का काम कर रही है.

झारखंड की मिट्टी के लिए हजारों लोगों ने कुर्बानी दी. जिसकी बदौलत राज्य मिला. झारखंड आज संक्रमण के दौर से गुजर रहा है. ऐसे में आदिवासी मूलवासी को मिलकर झारखंडी समाज को बचाना होगा.

जब तक राज्य में शोषण और अन्याय रहेगा तब तक झारखंडी समाज बिरसा के रास्ते पर चलकर संघर्ष करता रहेगा. अगर झारखंडी आने वाले खतरे से सचेत नहीं हुए तो, आदिवासियों, मूलवासियों के मान-सम्मान पर जोरदार चोट होगी. राज्य बनने के पीछे जो भावना थी सब खत्म कर दिया जायेगा.

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राज्य में हैं पांच हजार बिरसाइत

झारखंड में बिरसा का संदेश को अपने जीवन का मूल मंत्र बना कर चलने वाले परिवारों की संख्या पांच हजार से अधिक है जो बिरसाइत के नाम से जाने जाते है. जंगलों के बीच रहकर बिरसा के संदेश को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाये हुए हैं. बिरसाइत मांस-मदिरा का सेवन नही करते.

बिरसा मुंडा की पूजा भागवन की तरह करते हैं. बिरसा के समाधि स्थल पर बनी प्रतिमा के क्षतिग्रस्त किये जाने से दुखी हैं. फिर भी राज्य के लोगों को शोषण से मुक्ति की डहर बिरसा डहर को बताते हैं.

बिरसा के रास्ते पर चलकर ही होगी विश्व की रक्षाः दिना मुंडा

रोन्हे गांव के बिरसाइत दिना मुंडा कहते हैं भगवान बिरसा मुंडा का संदेश जल, जंगल, जमीन पर समाज और समुदाय का अधिकार के लिए संघर्ष करना रहा है. साथ ही मांस-मदिरा, नशा-पान छोड़कर सच्चाई के रास्ते पर समाज और देश-दुनिया को बचाया जा सकता है.

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संगठित होकर शोषण के खिलाफ खड़ा होना होगा. बिरसा के रास्ते पर राज्य का शायद ही कोई नेता चल रहा है. क्योंकि इस रास्ते पर चल कर सिर्फ समुदाय और समाज का चिंतन है. यहां व्यक्तिगत स्वाथ नहीं है. बिरसा ने कहा था कि उलगुलान का अंत नहीं है.

निंदनीय है बिरसा की प्रतिमा का क्षतिग्रस्त होनाः रतन तिर्की

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बिरसा शहीद स्थल पर उपवास पर बैठे रतन तिर्की करते हैं बिरसा मुंडा की प्रतिमा का क्षतिग्रस्त होना काफी निंदनीय है. आदिवासी समाज को हक की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित करने वाले महापुरुष का राज्य में अपमान किया जा रहा है. बिरसा मुंडा के शहीद स्थल पर बनी प्रतिमा क्षतिग्रस्त कर दी गयी. सरकार सिर्फ बिरसा का नाम लेती है.

लेकिन बिरसा की प्रतिमा की हिफाजत करने और उन्हें सम्मान देने में विफल रही. समाधि स्थल पर गंदगी फैली हुई है. मांस मदिरा की बिक्री भी इस स्थल के निकट की जाती है. सरकार को चाहिए इन्हें दूसरे स्थान पर हस्तांतरित करे. सरकार महापुरुषों को सम्मान नहीं दे सकी है. ऐसे में अब समाज के लोगों को शहीदों-महापुरुषों की प्रतिमा की सुरक्षा के लिए आगे आना होगा.

महापुरुषों का इतिहास राज्य के लिए सबसे महत्वपूर्णः दयामणि बरला

दयामणि बरला कहती हैं बिरसा मुंडा एवं राज के शहीद महापुरुषों का इतिहास राज्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. 9 जून को शहीद दिवस के 5 दिन बाद ही बिरसा शहीद स्थल की प्रतिमा खंडित की गयी.

राज में चल रहे संघर्षों का यह अपमान है. झारखंड की धरती में देशभर के नायकों की प्रतिमा बन रही है. लेकिन सरकार बिरसा मुंडा की शहीद स्थल की रक्षा नहीं कर सकी. राज्य में अधिकारों के लिए लड़ाई को समाप्त करने का यह साजिश है.

युवा वर्ग में दिखा आक्रोश

शहीद स्थाल पर उपावस में बैठे युवाओं में भी काफी आक्रोश दिखा. सुनिल मिंज कहते हैं राज्य को अशांत करने का कोई प्रयास कर रहा है. साथ ही आदिवासी दलित और पिछड़ा वर्ग अपने अधिकार के लिए संगठित न हो सके इसके लिए निशाना बनाया जा रहा है.

समाधि स्थल पर नयी प्रतिमा स्थापित करने की जरूरत है. इसके लिए युवाओं को आगे आना होगा. उपवास में बलराम, धीरज पांडे, राकेश रोशन किड़ो, प्रभाकर तिर्की, अलोका, अकाश, अजय ओड़िया, सोनू, राजू मुर्मू सहित कई युवा मौजूद रहे.

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