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डेड बोरिंग को रेन वाटर हार्वेस्टिंग में बदलने की निगम की योजना अधर में

करीब दो साल पहले बनी थी योजना, दो एजेंसियों को मिला था काम

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  • बहाना बना काम नहीं हो सका शुरू, अब एक एजेंसी को ब्लैकलिस्टेड करने का आदेश

Ranchi :  शहर में डेड हो चुके करीब 400 बोरिंग को रेन वाटर हार्वेस्टिंग में बदलने की एक योजना दो साल से अधर में है. गर्मी में शहरवासियों को होने वाली पानी की किल्लत को देखते हुए निगम की यह योजना मिल का पत्‍थर साबित हो सकती थी. काम करने के लिए फरवरी 2019 में निगम ने दो एजेंसियों (गुरु कंस्ट्रक्‍शन और बिल्ड वर्क) को जिम्मा दिया.

अब जानकारी यह है कि योजना पूरा होना तो दूर, अभी तक काम भी शुरू नहीं हो सका है. काम शुरू नहीं हाने की स्थिति नगर आयुक्त ने दोनों एजेंसियों में से एक बिल्ड वर्क को ब्लैक लिस्टेड करने का आदेश निगम जल बोर्ड को दिया है.

वहीं दूसरी तरफ शहर के हर वार्ड में पांच-पांच रेन वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल बनाने की पहल पर भी काम अब तक शुरू नहीं हो सका है. निगम परिषद की मार्च माह में हुई बैठक में यह प्रस्ताव बजट में लाया गया था. ऐसे मे एक बार फिर से इस गर्मी में भी शहर के कई इलाकों के लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है.

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फरवरी 2019 में वर्क ऑडर, काम नहीं हो सका शुरू

जल बोर्ड के एक अधिकारी का कहना है कि शहर में निगम के करीब 400 ऐसे बोरिंग हैं, जो वर्तमान में पूरी तरह से ठप है. जल संरक्षण की दिशा में निगम के अधिकारियों ने इसे रेन वाटर हार्वेस्टिंग के रूप में बदलने की योजना बनायी थी.

इसके लिए करीब 12 एजेंसियों को निगम ने इम्पैनल किया था. दिसंबर 2018 में इसके लिए टेंडर निकाला गया, जिसमें उपरोक्त दो एजेंसियों को काम मिला था. फरवरी 2019 में वर्क ऑडर भी जारी किया गया. लेकिन इसमें से एक बिल्ड वर्क अपने पारिवारिक समस्या की बात कर काम नहीं करने का बहाना बना रहा है. वहीं गुरू कंस्ट्रक्‍शन एजेंसी ने भी अभी तक काम शुरू नहीं किया है.

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हो रही अंधाधुंध बोरिंग,वाटर हार्वेस्टिंग फेल

मालूम हो कि रांची में अंडरग्राउंड वाटर लेवल की स्थिति बहुत ही खराब है. अंधाधुंंध बोरिंग और भवन निर्माण की वजह से अत्यधिक जल का दोहन किया जा रहा है. दस साल पहले जहां 200 फीट तक पानी आसानी से मिल जाया करता था.

वहीं, अब 400 फीट तक भी नहीं मिल पा रहा है. राजधानी में ऐसे करीब एक लाख 58 हजार मकान है जो नगर निगम से रजिस्टर्ड हैं. लेकिन अब तक मात्र 12,000 के करीब घरों में ही हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की गयी है. जबकि हर साल नगर निगम की ओर से 100 से ज्यादा घरों के नक्शों को स्वीकृत किया जाता है.

मतलब साफ है कि रजिस्टर्ड घर होने के बाद भी रांची में करीब एक लाख घर ऐसे हैं, जो नक्शा करके बनाये गये हैं और उनमें वाटर हार्वेस्टिग की कोई व्यवस्था नहीं है.

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अब नयी योजना में काम कर रहा निगम

ठप हो चुके बोरिंग में रेन वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक पर निगम ने जो सख्ती दिखायी थी, वह किसी काम की नहीं रही. ऐसे में शहर का बड़ा इलाका पानी के संकट से जूझ रहा है.

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इसे देखते हुए अब शहर के हर वार्ड में पांच-पांच रेन वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल बनाने की पहल की गयी है. इसी तरह पार्कों व मैदानों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचना निर्माण की बात की गयी है. हालांकि नयी योजना का प्रस्ताव पास हो चुका है, लेकिन काम शुरू नहीं किया गया है.

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