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देश नहीं झुकने दूंगा-देश नहीं बिकने दूंगा कहते-कहते सब बेचते जा रहे

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Surjit Singh

केंद्र में भाजपा की दूसरी बार सरकार है. नरेंद्र मोदी दोबारा देश के प्रधानमंत्री हैं. आपने अभी तक नहीं भूली होंगी. उनकी वो बातें. देश नहीं झुकने दूंगा-देश नहीं बिकने दूंगा. पर, हो क्या रहा है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण हर दिन घोषणा कर रही है. तारीखें तय कर रहीं हैं.

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किसी ना किसी सरकारी कंपनी के बिकने का. साफ है देश नहीं झुकने दूंगा-देश नहीं बिकने दूंगा का नारा देते-देते भाजपा की सरकार एक-एक कर सबकुछ बेचते चली जा रही है.

तीन दिन पहले वित्त मंत्री ने कहा था, इंडियन एयरलाइंस और भारत पेट्रोलियम को अगले साल बेच दिया जायेगा. 21 नवंबर को अखबारों में खबर हैः सरकार पांच कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी. उन कंपनियों में भारत पेट्रोलियम के अलावा भारतीय जहाजरानी निगम, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, टिहरी हाईड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी.

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Bharat Electronics 10 Dec 2019

एक और खबर है 21 नवंबर के अखबारों में. वह यह कि भारत सरकार देश की चार सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों को 42000 करोड़ रुपये की राहत देगी. उन कंपनियों में एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और जियो शामिल है. क्योंकि इन कंपनियों ने सरकार से अपील किया था कि अगर उन्हें सरकार की तरफ से राहत नहीं मिली, तो कंपनियां डूब जायेंगी.

ये दोनों खबरें क्या कहती हैं. निजी कंपनियों को घाटे या वित्तीय संकट से निकालने के लिए सरकार हजारों-लाखों करोड़ रुपये की राहत दे सकती है. लेकिन सरकारी कंपनियों को बेचती रहेगी. या कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को बेचती रहेगी.

झारखंड में भी भाजपा की सरकार आने के बाद वर्ष 2015 में यही हुआ था. रघुवर सरकार ने सबसे पहला काम यही किया था कि बिजली कंपनी पतरातू थर्मल पावर लिमिटेड को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी के हाथों सौंप दिया.

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करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी एनटीपीसी को दे दी. वह भी कौड़ी के भाव में. इसमें कई तरह से और कई स्तरों पर नियमों को तोड़ा गया. तो क्या भाजपा की सरकारों का यही तरीका है, काम करने का. सरकारी कंपनियों को बेचते रहो और कहते रहोः देश नहीं झुकने दूंगा-देश नहीं बिकने दूंगा.

भारत पेट्रोलियन कॉरपोरेशन लिमिटेड कंपनी के मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि यह कंपनी वर्तमान में लाभ में है. फिर उसे क्यों बेचा जा रहा है. इसपर कोई जवाब देने वाला नहीं. इस कंपनी को बेचने से पहले मोदी सरकार ने वर्ष 2016 में कंपनी के राष्ट्रीयकरण संबंधी कानून को रद्द किया.

ताकि इस कंपनी को किसी निजी या विदेशी कंपनी को बेचने के लिए संसद से अनुमति ही ना लेनी पड़े.

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भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन देश की सबसे बड़ी पेट्रोल-डीजल रिटेलर कंपनी है. वर्ष 2018-19 में इस कंपनी ने 7132 करोड़ रुपये का लाभ कमाया है. इससे पहले के वर्ष 2017-18 में 7976 करोड़ रुपया और वर्ष 2016-17 में 8039 करोड़ रुपया.

नुकसान में चल रही कंपनियों को बेचने की बात तो समझ में आती है. पर फायदे में चल रही कंपनियों को बेचने का मकसद क्या हो सकता है. व्यवसायिक नजरिये से तो ऐसे कदम किसी बड़े कॉरपोरेट घराने को मदद पहुंचाने वाला ही माना जायेगा. और यह काम किसकी सरकार कर रही है.

जिसने नारा दिया थाः देश नहीं झुकने दूंगा-देश नहीं बिकने दूंगा. इस नारे से ही मंत्रमुग्ध होते रहिये. तब तक सभी सरकारी कंपनियां निजी हाथों में चली जायेंगी.

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