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महागठबंधन में जगह नहीं मिलने के बाद सीपीआई की चुनावी रणनीतिः हजारीबाग, चतरा व दुमका से देगी प्रत्याशी

कांग्रेस की जिद्द के कारण गठबंधन में नहीं मिली पार्टी को सीट- भुवनेश्वर मेहता

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Ranchi: महागठबंधन में जगह मिलने की चाह पूरी नहीं होने के बाद भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी अपने दमखम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. पार्टी ने राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए सीटों की घोषणा कर दी. पार्टी की ओर से इस चुनाव के लिए हजारीबाग, दुमका और चतरा से उम्मीदवार दिया जाएगा. जिसकी तैयारी कर ली गई है.

उक्त जानकारी पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता ने प्रेस वार्ता के दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि हजारीबाग से खुद भुवनेश्वर मेहता चुनाव की कमान संभालेंगे. वहीं दुमका से सेनापति मुर्मू और चतरा के उम्मीदवार के नाम की घोषण दो दिन बाद की जाएगी.

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उन्होंने कहा कि राज्य कार्यकारिणी की बैठक में भी निर्णय लिया गया कि सांप्रदायिक ताकतों को चुनाव में हराने के लिए भाकपा पूरी ताकत झोंक देगी.

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दुखद है महागठबंधन में कांग्रेस का जिद्द पर अड़ना

उन्होंने कहा कि काफी दुखद है कांग्रेस का जिद्द पर अड़ना, वो भी हजारीबाग सीट के लिए. पहले भी पार्टी ने महागठबंधन में सीटों को लेकर कई बार चर्चाएं की. लेकिन कोई हल नहीं निकला.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह ध्यान में रखना चाहिए की हजारीबाग में भाजपा को मात देने वाली पार्टी सिर्फ भाकपा है. ऐसे में महागठबंधन में हजारीबाग सीट भाकपा को देना चाहिए था. इस संबध में कई बार कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार और प्रभारी आरपीएन सिंह से वार्ता की गई थी. फिर भी पार्टी का कहीं भी कांग्रेस के साथ टकराव नहीं है.

हठधर्मिता छोड़े कांग्रेस

महागठबंधन की ओर से सीटों की घोषणा हो जाने के बाद भी मेहता ने कहा कि अब भी पार्टी को उम्मीद है कि कांग्रेस हजारीबाग सीट भाकपा के लिए छोड़ देगी.

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कांग्रेस को अब अपनी हठधर्मिता छोड़नी चाहिए. फुरकान असांरी को गोड्डा से समर्थन देने की बात में उन्होंने कहा कि इस पर चार-पांच दिन बाद निर्णय लेंगे.

कांग्रेस ने नहीं छोड़ी सीट

सीपीआई नेता मेहता ने कहा कि कांग्रेस ने भाकपा के लिए कोई सीट नहीं छोड़ी. जबकि मांग सिर्फ हजारीबाग की की जा रही थी. महागठबंधन में बाबूलाल मरांडी को ऐसे जगह से खड़ा किया गया, जहां से माले के उम्मीदवार है.

वहीं कांग्रेस ने भी राजमहल में उम्मीदवार दिया, जबकि वहां सीपीआइएम के उम्मीदवार हैं. ऐसे में कांग्रेस ने कहीं भी सीट नहीं छोड़ी. लेकिन फिर भी जहां-जहां वामपंथी एकता है. वहां तो पार्टी वामपंथियों को समर्थन देगी ही.

साथ ही जिन सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार है, उन्हें भी पार्टी समर्थन देंगी. क्योंकि इस चुनाव में पार्टी का उद्देश्य बीजेपी को सत्ता से हटाना है.

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