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जानिये क्रिकेट वर्ल्ड कप टीम का चयन करनेवाले एमएसके प्रसाद और अन्य चयनकर्ता खुद कितना खेले

सोमवार को वर्ल्ड कप 2019 के लिए भारतीय क्रिकेट टीम की घोषणा हुई

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New Delhi: भारत जैसे देश में जहां क्रिकेट गली-गली में खेला जाता है, गेंद-बल्ले के इस खेल की लोकप्रियता का आलम ये है कि एक तरफ़ मैच चल रहा होता है और दूसरी तरफ़ स्टेडियम में या टीवी से चिपककर मैच देख रहा तकरीबन हर शख्स अपना एक्सपर्ट कमेंट दे रहा होता है.

ऐसे में तो उन लोगों की ज़िम्मेदारी का अंदाज़ा लगाया ही जा सकता है कि तीसरी बार भारत को विश्व चैंपियन बनाने के इरादे से सात समंदर पार भेजी जा रही टीम चुनने का दारोमदार जिन व्यक्तियों पर था, वो अपने ‘टेस्ट’ में कामयाब हुए या नहीं.

टीम के चयन का ज़िम्मा बीसीसीआइ की राष्ट्रीय चयन समिति पर था और इसकी अगुवाई कर रहे थे एमएसके प्रसाद. प्रसाद के अलावा समिति में देवांग गांधी, शरणदीप सिंह, जतिन परांजपे और गगन खोड़ा शामिल रहे.

दिलचस्प ये है कि वनडे के दुनिया के सबसे अहम टूर्नामेंट वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया का चयन करने वाले इन पंचों का वनडे इंटरनेशनल का बहुत अधिक अनुभव नहीं है.

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एमएसके प्रसाद एंड कंपनी का वनडे अनुभव देखा जाए तो पांचों ने कुल मिला कर सिर्फ़ 31 वनडे मैच खेले हैं और इनमें से किसी को वर्ल्ड कप में खेलने का मौका भी नहीं मिला. तो एक नज़र उन चयन समिति के उन ‘पंचों’ पर जिन्होंने वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया का चयन किया.

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एमएसके प्रसाद- मुख्य चयनकर्ता

43 साल के मन्नवा श्रीकांत प्रसाद आंध्र प्रदेश के गुंटूर में पैदा हुए. विकेटकीपर बल्लेबाज़ रहे प्रसाद ने आंध्र प्रदेश की तरफ़ से प्रथम श्रेणी मैचों में छह शतक ज़रूर लगाए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका प्रदर्शन दमदार नहीं रहा.

कुल जमा छह टेस्ट और 17 वनडे मैचों का अनुभव एमएसके प्रसाद के पास है. प्रसाद ने वनडे मैचों में 14.55 के मामूली औसत से 131 रन बनाए और उनका उच्चतम स्कोर रहा 63 रन. विकेट के पीछे उन्होंने 14 कैच लपके और सात मर्तबा अपनी फुर्ती से बल्लेबाज़ों को स्टंप आउट किया.

प्रसाद ने 14 मई 1998 को मोहाली में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ अपने वनडे करियर की शुरुआत की थी. उस मैच में उन्हें बल्लेबाज़ी का मौका नहीं मिला. मुक़ाबले में उन्होंने ना तो कोई कैच लपका और न ही वो कोई स्टंपिंग कर सके.

इसे संयोग ही कहा जाएगा कि प्रसाद का आख़िरी वनडे मुक़ाबला भी पहले मैच की तरह ही फ़ीका रहा. दिल्ली में 17 नवंबर 1998 को वो आख़िरी बार भारत की वनडे टीम से खेले और उस मैच में भी ना तो उन्हें बल्लेबाज़ी का मौका मिला, न ही कोई कैच या स्टंपिंग ही उनके खाते में आई.

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देवांग गांधी

47 साल के देवांग जयंत गांधी को कुछ जमा 4 टेस्ट और तीन वनडे मुक़ाबलों का अनुभव है.

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देवांग को 17 नवंबर 1999 को टीम इंडिया की वनडे कैप मिली थी. दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला मैदान पर न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ बतौर सलामी बल्लेबाज़ उतरे देवांग अपनी पारी को 30 रन से आगे नहीं बढ़ा सके थे.

बंगाल की तरफ़ से खेलने वाले देवांग ने तीन वनडे मैचों में 16.33 के मामूली औसत से 49 रन बनाए. उनका वनडे करियर ढाई महीने से अधिक नहीं खिंच सका और 30 जनवरी 2000 को उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पर्थ में अपना आख़िरी वनडे मैच खेला.

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शरणदीप सिंह

पंजाब के अमृतसर में जन्में शरणदीप सिंह का अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी कुछ ख़ास नहीं है. दाएं हाथ के ऑफ़ ब्रेक गेंदबाज़ रहे शरणदीप सिंह को कुल जमा 3 टेस्ट और 5 वनडे मैचों का अनुभव है. शरणदीप ने 5 वनडे मैचों में 15.66 की औसत से 47 रन बनाए हैं.

31 जनवरी 2002 को दिल्ली में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपने वनडे करियर की शुरुआत करने वाले शरणदीप अपना करियर 18 अप्रैल 2003 से अधिक नहीं खींच सके और ढाका में दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ मुक़ाबला उनका आख़िरी वनडे इंटरनेशनल मैच साबित हुआ.

शरणदीप ने घरेलू मैचों में पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया.

जतिन परांजपे

मुंबई के जतिन परांजपे का प्रथम श्रेणी मैचों में 46 से अधिक का औसत रहा, लेकिन वो भारत के लिए सिर्फ़ चार वनडे मैच ही खेल सके.

परांजपे ने 28 मई 1998 को ग्वालियर में कीनिया के ख़िलाफ़ पहला वनडे मैच खेला था, लेकिन चोट के कारण वो अपना करियर लंबा नहीं खींच सके. परांजपे ने अपना चौथा और आख़िरी वनडे पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टोरंटो में खेला. इस मैच में वो सिर्फ़ एक रन ही बना सके थे.

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गगन खोड़ा

दाएं हाथ के बल्लेबाज़ गगन खोड़ा ने घरेलू क्रिकेट में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया. 1991-92 में अपने पहले ही रणजी मैच में खोड़ा ने शतक जड़ कर सुर्खियां बटोरी थीं.

प्रथम श्रेणी मैचों में 300 का उच्चतम स्कोर बनाने वाले खोड़ा का अंतरराष्ट्रीय करियर दो वनडे मैचों से आगे नहीं बढ़ सका. खोड़ा ने अपना पहला मैच 14 मई 1998 को बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मोहाली में खेला था.

(बीबीसी से साभार)

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