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2010 में ही रांची में पाया गया था डेंगू का मामला

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Ranchi: वर्ष 2010 में ही रांची में डेंगू के मामले देखे गए थे. लेकिन उस वक्त हम सजग नहीं हुए जिसका परिणाम हमे अब भुगतना पड़ रहा है. यही बात यदि उस वक्त लोगों ने समझ ली होती तो शायद यह बीमारी आज इतना विकराल रुप धारण नहीं कर पाती. लेकिन देर से ही सही हम सभी में जागरुता आई, यह अच्छी बात है. ये बातें एनटमॉलॉजस्टि सग्या सिंह ने कही. उन्होनें बताया कि दूसरे राज्यों जैसे दल्लिी और अन्य राज्यों से लोगों का झारखंड में माइग्रेशन रहा है. यह भी एक बड़ी वजह है डेंगू का.

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122 कैंपों में हुई 8855 मरीजों की जांच : सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ भीवी प्रसाद ने बताया कि चिकनगुनिया और डेंगू से प्रभावित इलाकों में कुल 122 कैंप आयोजित किये गये थे. जिसमें 8855 मरीजों के क्लिनिकल इग्जामिनेशन किया गया. इस दौरान लगभग 1303 मरीजों में इसके संभावना पाये गए थे जबकि जांच में 478 मरीज संक्रमित निकले और डेंगु के 24 मरीजों की पहचान कर उनका इलाज किया गया. वहीं कैंप में 46 मरीज में दोनों का संक्रमण पाया गया. राज्य मलेरिया पदाधिकारी विजय नाथ खन्ना ने बताया कि पूरे शहर में 563 लोग चिकनगुनिया से और 102 मरीज डेंगू से संक्रमित पाये गये हैं. इन सभी का ईलाज किया जा रहा है.

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सिविल सर्जन ने की अपील

सिविल सर्जन डॉ वीबी प्रसाद ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि शहर में चिकनगुनिया और डेंगू के मच्छर नहीं पनपे इसके लिए आवश्यक तैयारी जरूर करें. उन्होंने कहा कि इस बार की घटना से सीख लेते हुए हम सभी को और ज्यादा सावधानी बरतनी होगी. अगले मानसुन से पहले या कुछ समय अंतराल में भी व्यापक पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरुक किया जायेगा.

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काफी कम समय में डेंगू पर पाया गया काबु : डॉ गुप्ता

दल्लिी एनसीडीसी से आये डॉ राकेश गुप्ता ने कहा कि उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और पाया कि राज्य और जिला की टीमों ने बेहतर तालमेल से काम किया. यही वजह रही है कि बहुत कम समय में ही प्रभावित क्षेत्रों में नियंत्रण संभव हो सका. उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के अलावा संभावित क्षेत्रों में भी आईईसी का बेहतर इस्तेमाल किया गया और खास कर धार्मिक नेताओं का सकारात्मक सहयोग रहा जिससे स्वास्थ्य विभाग की टीम को इस अभियान में बहुत सहयोग मिला.

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