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मई में सेवामुक्त हो रहे हैं डीजीपी डीके पांडेय लेकिन नक्सल मुक्त झारखंड बनाने का उनका दावा हो गया फेल

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Saurav Singh

Ranchi: झारखंड के डीजीपी डीके पांडेय 31 मई 2019 को अपने पद से सेवा मुक्त हो जाएंगे. लेकिन इनका झारखंड को नक्सल मुक्त बनाने का दावा फेल हो गया. बता दें कि डीजीपी ने 2016 में घोषणा की थी दिसंबर 2017 में पूरे झारखंड राज्य से नक्सलियों का सफाया हो जाएगा.

जबकि ये मुमकिन नहीं हो पाया और ये डेडलाइन एक साल बढ़ गयी. इसके बाद साल 2017 में राज्य को उग्रवाद से मुक्त कराने का दावा करने वाले राज्य के पुलिस महानिदेशक डीके पांडेय ने दावा किया कि साल 2018 के अंत तक राज्य को पूरी तरह से नक्सल मुक्त कर दिया जायेगा. लेकिन ये भी दावा फेल हो गया. झारखंड में अभी भी नक्सली संगठन समय-समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं.

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13 जिला अभी भी अति नक्सल प्रभावित

झारखंड के 13 जिला अभी भी अति नक्सल प्रभावित जिलों की सूची में है. जिनमें रांची, दुमका, खूंटी, गुमला, लातेहार, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम,गिरिडीह,पलामू, गढ़वा, चतरा, लोहरदगा और बोकारो शामिल है.

वहीं राज्य के सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग, धनबाद और गोड्डा को संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है. जबकि जामताड़ा, पाकुड़, रामगढ़ और कोडरमा को कम संवेदनशील जिले की श्रेणी में रखा गया है. देवघर और साहेबगंज में नक्सली गतिविधि नहीं है.

झारखंड पुलिस का दावा-राज्य में अब सिर्फ 550 नक्सली

झारखंड पुलिस का दावा है कि राज्य में अब सिर्फ 550 माओवादी बचे हैं. लेकिन 550 माओवादियों से लड़ने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल लगे हुए हैं. जिनमें सीआरपीएफ की 122 कंपनी, आईआरबी की 5 कंपनी और झारखंड जगुआर की 40 कंपनी फोर्स लगी हुई है.

इतनी भारी संख्या में सुरक्षा बल के तैनात होने के बावजूद भी झारखंड से पूरी तरह से माओवाद का खात्मा नहीं हो पा रहा है. समय-समय पर माओवादी छोटी-बड़ी घटना को अंजाम देकर अपनी उपस्थिति भी दर्ज करवा रहे हैं.

नक्सलियों ने की है चुनाव बहिष्कार की घोषणा

हर बार की तरह इस बार भी लोकसभा चुनाव का नक्सली संगठन बहिष्कार कर रहे हैं. लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही नक्सलियों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है.

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जहां लगातार नक्सली और पुलिस आमने सामने हो रहे हैं, तो वहीं नक्सलियों के द्वारा सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से जंगलों में छिपा कर रखे गये विस्फोटकों को पुलिस लगातार बरामद कर रही है.

गौरतलब है कि नक्सली संगठन प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बहुत पहले ही चुनाव के बहिष्कार की घोषणा कर चुके हैं. नक्सली लगातार पोस्टरबाजी कर लोगों में दहशत फैलाने का काम भी कर रहे हैं.

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इन जिलों में अभी भी सक्रिय है माओवादियों का दस्ता

गढ़वा, लातेहार व गुमला के सीमावर्ती क्षेत्र में विमल यादव और बुद्धेश्वर यादव का दस्ता सक्रिय है.चाईबासा, सरायकेला, छोटानागपुर और गोयलकेरा में माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य व एक करोड़ का इनामी किशन दा उर्फ प्रशांत बोस, अनमोल उर्फ समर जी, मेहनत उर्फ मोछू, चमन उर्फ लंबू, सुरेश मुंडा व जीवन कंडुलना का दस्ता सक्रिय है.

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गिरिडीह-जमुई और कोडरमा-नवादा बॉर्डर पर करुणा,पिंटू राणा व सिंधू कोड़ा का दस्ता सक्रिय है. हजारीबाग-चतरा-गया बॉर्डर पर माओवादी रिजनल कमेटी सदस्य इंदल गंझू और आलोक का दस्ता सक्रिय है.

बोकारो जिला के बेरमो अनुमंडल के नक्सल प्रभावित चतरोचट्टी और जगेश्वर बिहार थाना के जंगली क्षेत्र में एक करोड़ का इनामी माओवादी नेता मिथिलेश सिंह दस्ता सक्रिय है.

औरंगाबाद, पलामू, गया, चतरा बॉर्डर पर सैक सदस्य संदीप दस्ता, संजीत और विवेक का दस्ता सक्रिय है. इसके अलावा घाटशिला, पटंबा, पुरुलिया सीमा पर माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य असीम मंडल और मदन का दस्ता सक्रिय है.

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