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धनबादः JVM नेता व कोल ट्रांसपोर्ट कंपनी इंचार्ज रंजीत सिंह की हत्या और SSP का हास्यास्पद बयान

इस पुलिस सिस्टम से कुछ उम्मीद नहीं कर सकते

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तथ्यः
-08 अगस्तः कोयले के आउटसोर्सिंग का काम देख रहे रंजीत सिंह के मोबाइल पर फोन आता हैः जेल से गैंग्स आफ वासेपुर का आदमी बोल रहा हूं. रंगदारी नहीं देने का अंजाम बुरा होगा. जिसको खबर करना है कर लेना. रंजीत सिंह ने स्थानीय थाना को सूचना दी, कोई कार्रवाई नहीं हुई. 10 अगस्त को एसएसपी को भी लिखित आवेदन दिया. जिसकी प्रति डीजीपी, डीआईजी और सिटी एसपी को भी भेजी.
-20 अगस्तः मुख्यमंत्री रघुवर दास का बयान आया कि कोयला कारोबार में माफियागिरी को खत्म करें.
-21 अगस्त, दिन के 11.00 बजेः झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने धनबाद में कहा कि कोयलांचल में कानून का राज नहीं है. श्री मरांडी ने एसएसपी से बात की औऱ उनसे मांग की कि जेवीएम नेता रुपेश पासवान पर फायरिंग करने वाले को गिरफ्तार करें.
-21 अगस्त दिन के 2.00 बजेः रंजीत सिंह ने एसएसपी से मिलकर रंगदारी मांगे जाने की जानकारी दी. मीडिया में आयी खबर के मुताबिक, इससे पहले रंजीत सिंह ने एसएसपी को पत्र लिखकर अपनी हत्या की आशंका भी जतायी थी.
-21 अगस्त शाम 5.00 बजेः अपराधियों ने कुसुंडा रेलवे साइडिंग के पास रंजीत सिंह की कार पर फायरिंग करके उनकी हत्या कर दी.
-इससे पहले 19 मई को आउटसोर्सिंग कंपनी से जुड़े संदीप मोदी उर्फ टेनू मोदी की हत्या भी अपराधियों ने गोली मारकर कर दी थी. संदीप मोदी की हत्या भी रंजीत सिंह की तरह ही की गयी थी, जब वह बाईक से घर लौट रहे थे.

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JMM

-ध्यान रहे, पिछले माह डीजीपी डीक पांडेय ने धनबाद के एसएसपी से कहा था, तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि तुम्हारी पोस्टिंग किसी राजनेता ने करायी है.

ऊपर के तथ्य क्या साबित करते हैं. कोयलांचल की राजधानी धनबाद में कानून का राज है या अपराधियों का, कहना मुश्किल है. पर तथ्य एक बात जरुर साबित कर रहा है कि पुलिस का इकबाल नहीं है. पुलिस के काम-काज का तरीका बेहद चिंताजनक और लेट-लतीफी वाला है. धनबाद के एसएसपी और उनकी टीम उन मामलों में भी सुरक्षा देने में नाकामयाब रही, जिसकी जानकारी पुलिस को दी गयी थी. रंजीत सिंह पुलिस से सुरक्षा मांगते रह गये और उनकी हत्या हो गयी.

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10 अगस्त से लेकर 20 अगस्त तक डीजीपी, डीआइजी, धनबाद एसएसपी औऱ सिटी एसपी ने रंजीत सिंह को सुरक्षा नहीं दी. गैंग्स ऑफ वासेपुर की धमकी को हल्के में लिया. ना सुरक्षा दी और ना ही रंगदारी मांगने वाले के खिलाफ कोई कार्रवाई की गयी. नतीजन उसकी हत्या हो गयी. अगर सुरक्षा मुहैया करायी जाती तो शायद रंजीत सिंह की हत्या नहीं होती. देखा जाये तो रंजीत सिंह की हत्या का मामला सीधे-सीधे धनबाद पुलिस और एसएसपी की लापरवाही का मामला है.

अब जरा रंजीत सिंह की हत्या के बाद अखबारों में छपे धनबाद एसएसपी का बयान पढ़ेः
– रंजीत सिंह ने उनसे मिलकर एक फोन नंबर दिया और कहा कि इस नंबर से उससे रंगदारी मांगी जा रही है. उसे अपनी हत्या की आशंका नहीं थी. (प्रभात खबर, पृष्ठ-एक)

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– रंजीत मिलने आये थे. उन्होंने रंगदारी मांगने की शिकायत की थी. आवेदन में जिस नंबर से धमकी दिये जाने की बात कही गयी थी, उसका लोकेशन ट्रेस करने का आदेश तकनीकी शाखा को दिया था. हत्या में पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं. (दैनिक भाष्कर, पृष्ठ-एक)

– रंजीत ने धमकी भरे कॉल की जानकारी दी थी. पुलिस मोबाइल नंबर के आधार पर जांच कर रही थी. इस बीच उसकी हत्या हो गयी. पुलिस को ठोस सुराग मिले हैं. (हिन्दुस्तान, पृष्ठ-एक)

– रंजीत ने मंगलवार को जान का खतरा बताते हुए शिकायत की थी. उसने दो मोबाइल नंबर से धमकी मिलने की बात कही थी. जिस पर जांच की जा रही है. रंजीत सिंह ने उनसे कोई बॉडीगार्ड की मांग नहीं की थी. (दैनिक जागरण, पृष्ठ-सात)

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चार प्रमुख अखबारों में धनबाद के एसएसपी मनोज रतन चौथे के बयानों का क्या मतलब निकाला जाये. अगर कोई व्यक्ति खुद की जान का खतरा बताता है और बाडीगार्ड नहीं मांगता, तो एसएसपी क्या करेगा. क्या जो व्यक्ति बाडीगार्ड नहीं मांगेगा और उसकी जान पर खतरा होगा, तो पुलिस उसे सुरक्षा नहीं देगी? एसएसपी का काम क्या है? क्या एसएसपी को इतना भी नहीं पता कि इस तरह की रंगदारी के मामलों में जब पीड़ित व्यक्ति पुलिस तक पहुंच जाता है, तब अपराधी क्या करते हैं. क्या एसएसपी का काम सिर्फ यह रह गया है कि मोबाइल नंबर टेक्निकल सेल को देकर अपने काम को खत्म मान लें.

प्रभात खबर में एसएसी का बयान और हास्यस्पद है. उन्होंने कहा है कि रंजीत सिंह ने अपनी हत्या की आशंका नहीं जतायी है. पर, अन्य अखबारों में 10 अगस्त के उस पत्र को हू-ब-हू प्रकाशित किया है, जिसे रंजीत सिंह ने धमकी मिलने के बाद एसएसपी को लिखा था. जिस पत्र की प्रति डीजीपी का कार्यालय और कोयला क्षेत्र के डीआईजी को भेजी थी. पत्र में उसने साफ लिखा था कि मेरे व मेरे परिवार के जान-माल की हानि हो सकती है. तो क्या एसएसपी कार्यालय में रंगदारी के मामलों में आये शिकायत पत्र को भी नहीं पढ़ता है, जो अब यह बयान दे रहे हैं कि रंजीत सिंह ने हत्या की आशंका नहीं जतायी थी.

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बहरहाल, रंजीत सिंह की हत्या के बाद विपक्ष एसएसपी के तबादले की मांग कर रहा है. पुलिस मुख्यालय के स्तर से भी यह महसूस किया जा रहा है कि सबसे जूनियर अफसर को धनबाद जैसे जिले का सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस बनाना बचकाना फैसला था. देखना यह है कि सरकार धनबाद को उसके हाल पर छोड़ देती है या फिर कानून-व्यवस्था को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाती है.

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