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धनबाद: स्थापित होंगे ‘कीर्ति’ या फिर से ‘सिंह’ इज ‘किंग’

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Akshay Kumar Jha

Ranchi/Dhanbad: धनबाद लोकसभा का इतिहास बताता है कि यह सीट जातीय समीकरण के आधार पर फॉर्वर्ड की है. 1971 से ही यहां फॉर्वर्ड जीतते आए हैं. लिहाजा इस बार भी धनबाद लोकसभा पर भिड़ंत दो फॉर्वर्डों बीच ही है. धनबाद लोकसभा की बात शुरू करने से पहले यह जानना जरूरी है कि 2014 में भाजपा के पीएन सिंह ने पूरे झारखंड में सबसे ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी. इस बार यह जादू चल पाएगा या नहीं इसपर कई तरह के तर्क हैं. महागठबंधन की तरफ से इस सीट पर कीर्ति झा आजाद कांग्रेस से उम्मीदवार हैं. इससे पहले वो तीन बार दरभंगा लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं. बीजेपी से बाहर किए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा है. कभी मोदी की तारीफ करनेवाले आजाद इस बार बीजेपी के खिलाफ आग ऊगल रहे हैं. धनबाद की जनता का मन टटोलने के बाद यह साफ होता है कि इस बार का चुनाव इतना भी आसान नहीं होनेवाला है.

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पीएन सिंह की मुश्किलें

सबसे ज्यादा वोटों से जीत दर्ज करनेवाले पीएन सिंह के सामने कुछ रोड़े हैं. इनमें से सबसे पहला रोड़ा सिंह मेंशन ही दिखायी दे रहा है.

जैसा कि सिंह मेंशन इस बार चुनावी मैदान में दो-दो हाथ करने के मूड में है, उससे बीजेपी को परेशानी हो सकती है. पीएन सिंह क्षत्रिय समाज से हैं. सिंह मेंशन से सिद्धार्थ गौतम के मैदान में उतरने से क्षत्रिय समाज के वोट बंट सकते हैं. इसका सीधा खामियाजा पीएन सिंह को ही भुगतना पड़ सकता है.

दूसरी परेशानी पीएन सिंह के सामने गठबंधन के घटक दल हैं. पिछला चुनाव कांग्रेस, जेवीएम और मासस ने अलग अलग लड़ा था. इस वजह से वोट बिखर गए थे. लेकिन इस बार सभी एक साथ हैं. कांग्रेस से अजय दुबे को पिछली बार करीब 2.5 लाख वोट, जेवीएम से लड़ रहे समरेश सिंह को करीब 90 हजार वोट और मासस से लड़ रहे आनंद महतो को 1.10 लाख वोट आए थे. इस बार ये सभी दल एक साथ हैं.

रवींद्र राय को बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के बाद भूमिहार जाति विशेष के लोग पार्टी से खासे नाराज चल रहे हैं. धनबाद लोकसभा में सिंदरी और चंदनकियारी के अलावा धनबाद सदर में करीब 2.5 लाख वोट भूमिहार जाति के हैं. पिछली बार करीब-करीब यह सभी वोट बीजेपी के पक्ष में पड़े थे. लेकिन इस बार 2014 वाली बात दोहरायी जाए यह तय नहीं.

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कीर्ति झा आजाद के चुनाव का समीकरण

कीर्ति आजाद के सामने पैराशूट उम्मीदवार होने के अलावा और भी कई तरह की मुश्किलें हैं.

बताया जाता है कि जब उनके पिता भागवत झा आजाद सीएम थे तो धनबाद में माफियागिरी खत्म करने के नाम पर क्षत्रिय समाज को चोट पहुंचाने का काम किया था. ऐसे में क्षत्रिय अगर अपने पुराने घाव के दर्द को याद करेंगे तो ये कीर्ति आजाद के खिलाफ जाएगा.

कांग्रेस ने कई उम्मीदवार के होते हुए भी एक ऐसा उम्मीदवार धनबाद के लिए चुना है, जिसका नाता-रिश्ता धनबाद से न के बराबर रहा है. ऐसे में धनबाद की जनता उन्हें कितना पसंद करती है, यह कांग्रेस की रणनीति पर तय होगी.

हालांकि इस बात के आसार कांग्रसी नेताओं के आचरण से कम ही लग रहा है कि भीतरघात हो. लेकिन अंदर ही अंदर क्या होगा. यह कहना अभी जरा जल्दबाजी होगी. वैसे ददई दुबे ने अपना आशीर्वाद कीर्ति आजाद को दे दिया है. मन्नान मलिक के भी तेवर सामान्य हैं. अजय दुबे भी कीर्ति के साथ होने का दावा कर रहे हैं.

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