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क्या #GharGharRaghubar अभियान को बीजेपी ने नकार दिया!

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: चुनाव से पहले लोगों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या बीजेपी का घर-घर रघुवर अभियान बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने ठंडे बस्ते में डाल दिया. चर्चा वाजिब इसलिए है क्योंकि जिस जोशोखरोश के साथ इस अभियान की शुरुआत हुई थी, उससे ज्यादा तेजी से इस अभियान को ठंडे बस्ते में जाते देखा जा रहा है.

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अभियान के तहत अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों और दूसरे बड़े पदधारियों को जनसंपर्क अभियान चलाना था और उस अभियान को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना था. लेकिन अभियान के शुरुआत के दिन सिर्फ ऐसा हो पाया.

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हटिया विधायक नवीन जायसवाल, कांके विधायक जीतू चरण राम समेत कुछ विधायकों ने अभियान की शुरुआत की जानकारी ट्विटर पर पोस्ट कर दी. लेकिन दूसरे दिन से ही यह अभियान ठंडे बस्ते में चला गया.

बीजेपी के ही कुछ लोगों को कहना है कि पार्टी में इस बात को लेकर काफी नाराजगी थी. इसलिए धीरे-धीरे इसे साइडलाइन किया जा रहा है.

पीएम मोदी, अमित शाह, ओम माथुर और लक्ष्मण गिलुआ ने भी किया किनारा

कहने को तो इस अभियान की शुरुआत की घोषणा खुद पार्टी के अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने की थी. लेकिन खुद वो कभी भी मीडिया के सामने या अपने क्षेत्र में इस अभियान में शामिल होते नहीं देखे गये. सोशल मीडिया में भी लक्ष्मण गिलुआ ने इस बात का जिक्र एक बार भी नहीं किया.

12 सितंबर की पीएम मोदी की आम सभा जाहिर तौर पर एक चुनावी सभा मानी जा रही है. पीएम मोदी ने अपने भाषण में चुनावी बाण भी चलाये. लेकिन उनकी जुबान पर एक बार भी घर-घर रघुवर का नारा नहीं आया. उन्होंने बीजेपी को वोट देने अपील की, लेकिन अभियान का जिक्र नहीं किया.

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18 सितंबर को जामताड़ा की आम सभा में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ तौर से कहा कि जिस तरह से आपने नरेंद्र मोदी को दोबारा पीएम बनाया उसी तरह झारखंड में रघुवर दास को मौका दीजिए. लेकिन उन्होंने घर-घर रघुवर का जिक्र एक बार भी नहीं किया.

न्यूज विंग ने झारखंड विधानसभा के चुनाव प्रभारी ओपी माथुर से भी इस बाबत बात करने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने सवाल को टाल दिया. उन्होंने कहा कि इस बात की जानकारी उन्हें नहीं है. पता कर बतायेंगे.

पहले ही दिन सरयू राय ने बदल दिया था नाम

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नौ सितंबर को राज्य सरकार में मंत्री और पश्चिमी जमशेदपुर से विधायक सरयू राय ने भी अपने बिष्टुपुर आवास में जनसंपर्क कार्यालय की शुरुआत की और रविवार को क्षेत्र के दो इलाके सोनारी और बिष्टुपुर में जनसंपर्क अभियान भी चलाया. लेकिन उनके बैनर में घर-घर रघुवर के बजाए घर-घर भाजपा, घर-घर कमल का नारा लिखा था.

पूछने पर सरयू राय ने यह कहा कि घर-घर रघुवर के नारे से न ही सहमत हैं और न ही खुश हैं. क्योंकि हमेशा पहले पार्टी होती है. दोनों पार्टी के कार्यकर्ता हैं. अपने-अपने तरीके से काम कर रहे हैं.

अभियान की शुरुआत से पहले ही सरयू राय ने तीन सितंबर को ट्वीट कर कहा था कि “झारखंड प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ से दूरभाष पर बात हुई. उन्हें सलाह दिया कि चुनावी दृष्टि से जनसम्पर्क अभियान का नारा  “घर घर कमल” तय करें. यह वाक्य केवल नारा नहीं होगा बल्कि निष्ठा का प्रतीक भी होगा. मेरा यह सुझाव उन्हें अच्छा लगा. दिल्ली लौटते ही आज उनसे मिलूंगा.”

विधायक ने कहा- अंदर ही अंदर था विरोध

बीजेपी के एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर न्यूज विंग से कहा कि इस अभियान को लेकर शुरू से ही अंदर ही अंदर विरोध था. इसलिए धीरे-धीरे इसे साइडलाइ किया जा रहा है. इससे अच्छा है कि घर-घर कमल के नारे के साथ अभियान चले.

मेरे हर बूथ पर चल रहा है यह अभियानः नवीन जायसवाल, विधायक बीजेपी

मामले पर हटिया विधानसभा के विधायक नवीन जायसवाल का कहना है कि मुझे मेरे विधानसभा क्षेत्र का पता है. मेरे क्षेत्र के हर बूथ और हर मंडल लेवल पर घर-घर रघुवर अभियान चल रहा है. ऐसा कहना गलत है कि अभियान ठंडे बस्ते में चला गया है.

ठंडा हो गया घर-घर रघुवर का नाराः आलमगीर आलम, विधायक कांग्रेस

घर-घर रघुवर अभियान एकदम ठंडे बस्ते में चला गया. यह जो अभियान है उसे पब्लिक ने नकार दिया है. आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण कर रहा हूं, लोगों का कहना है कि हमने पिछली बार बीजेपी को वोट देकर गलती की. कई इलाकों में लोगों का यह कहना है कि पहले उनके यहां बिजली आती थी. लेकिन अब वह भी नहीं आती. यह सरकार सिर्फ नाम और नारों की मार्केटिंग कर रही है. जैसे एक खराब सामान को बेचने के लिए मार्केटिंग की जाती है, उसी तरह बीजेपी मार्केटिंग कर जनता को फंसाने की कोशिश कर रही है.

यह बीजेपी का आंतरिक मामलाः कुणाल षाड़ंगी

इस मामले में भला मैं क्या कह सकता हूं. यह बीजेपी का आंतरिक मामला है. वो घर-घर रघुवर चलाये या कुछ और जेएमएम को इससे फर्क नहीं पड़ता.

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