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मंत्री लुईस मरांडी के विधानसभा क्षेत्र में डोभा के पानी से प्यास बुझा रहे ग्रामीण

14 सरकारी कुआं फिर भी गांव प्यासा, सड़क कई वर्षों से अधूरी, डोभा को कुआं का रूप देने का प्रयास कर रहे ग्रामीण

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Dumka: दुमका विधानसभा अन्तर्गत मसलिया प्रखंड के कठलिया पंचायत के चौलीटांड़ गांव के ग्रामीण पीने के पानी को तरस रहे हैं. सूबे के कल्याण का जिम्मा सरकार के जिस मंत्री पर है वह अपने विधानसभा का कल्याण नहीं कर सकी हैं. ग्रामीणों कहते हैं कि गांव में विकास के वादे भाजपा सरकार करती है, लेकिन मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही पानी और सड़क की समस्या का समाधान नहीं हुआ है. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में ग्रामीण मजबूरन वोट का बहिष्कार करने की सोच रहे हैं.

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चौलीटांड़ गांव में कुल 6 टोले चिरुघुटू टोला, हिसाह टोला, जोजो टोला, जोगमांझी टोला, मांझी टोला, बंडीयह टोला हैं. गांव में लगभाग 120 आदिवासी परिवारों के घर हैं. गांव की जनसंख्या लगभग 650 के करीब है. गांव में मात्र तीन सरकारी चापाकल हैं, जिनमें से एक चापाकल चार वर्षों से खराब है. इसके अलावा स्कूल और आंगनबाड़ी का एक-एक चापाकल है. पानी की समस्या को लेकर ग्रामीण कहते हैं कि गांव में कुल 14 सरकारी कुआं हैं जिनका निर्माण 1998-99 और 2002-03 में हुआ था. जिनमें 11 कुआं में पानी सूख गया है और तीन कुआं में कुछ पानी है.

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गांव के चिरुघुटू टोला की स्थिति बहुत दयनीय है. यहां कोई भी चापाकल नहीं है. यहां के ग्रामीण डोभा को ही कुआं का रूप देने का कोशिश कर रहे हैं, ताकि मवेशी आदि इसमें ना गिरें. इसका ही पानी पीते हैं. वह भी अब सूखने के कगार पर है. यहां भी ग्रामीणों को लाइन लगानी पड़ती है. पानी रिसने/ज़मा होने का इंतजार ग्रामीण करते हैं, तब जाकर पानी लेते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कम चापाकल होने के कारण ग्रामीणों को पीने का पानी का बहुत दिक्कत से मिल रहा है. पूरा समय पानी लेने के लिए चापाकल में लाइन लगाने में ही बर्बाद हो जाता है. ग्रामीणों ने कहा गांव में चापाकल कम होने के कारण स्कूल और आंगनबाड़ी के चापाकल से भी पानी लिया जाता है, जिस कारण अपने ही बच्चों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है, लेकिन ग्रामीण भी मजबूर हैं.

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गांव की सड़क भी है जर्जर

मनरायडीह से कोलाबगान तक जानेवाली सड़क चौलीटांड़ गांव के पास कई वर्षों से अधूरी है. यहां सिर्फ बोलडर बिछा कर छोड़ दिया गया है. इससे ग्रामीणों को आने-जाने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. ग्रामीण कहते हैं सरकार अगर पेयजल की समस्या से गांव को निजाद नहीं दिला सकी और र्जजर सड़क का जल्द निर्माण नहीं होता तो आगामी विधानसभा चुनाव में ग्रामीण मजबूरन वोट का बहिष्कार करेने का निर्णय लेंगे. ग्रामीण कहते हैं कि सभी टोला में दो-दो नया चापाकल और सोलर टंकी लगा दिया जाता तो गांव में पेयजल के संकट से निजात मिल सकती है. सभी टोले के ग्रामीण अगस्त माह में बैठक कर वोट बहिष्कार का निर्णय लेंगे.

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ग्रामीणों की बैठक में गांव की समस्या पर चर्चा की गयी. इस बैठक में मोलिंदर सोरेन, पालटन सोरेन, मानवेल सोरेन, सरिता मुर्मू, पुलिस सोरेन, रुपए बास्की, मदन बास्की, मुसूच सोरेन, विजय सोरेन, रूपलाल बास्की, सुनिराम सोरेन, मनोज बास्की, सनोदी मुर्मू, तालसी हेम्ब्रोम, फुलमुनी टुडू, शांति सोरेन, सुशान्ति मुर्मू, मंगली टुडू, गणेश बास्की, सलोनी सोरेन, सुमिता सोरेन, मोना सोरेन, रानी हांसदा, लिलमुनी मुर्मू, बसंती हांसदा, नियाती टुडू, चुंडा सोरेन के साथ काफी संख्या में महिला और पुरुष उपस्थित थे.

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