न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

चौकीदार के कारण आखिर क्यों ग्रामीण बना माओवादी, जानिए सबजोनल कमांडर प्रदीप सिंह चेरो की पूरी कहानी

1,721

Manoj Dutt Dev

Latehar: लातेहार, झारखंड के अति नक्सल प्रभावित जिलों में से एक है. इलाके में कई माओवादियों की तूती बोलती है. उनका खौफ है. इन्हीं में से एक नाम है प्रदीप सिंह चेरो. माओवादी सबजोनल कमांडर प्रदीप सिंह पर आज की तारीख में पांच लाख का ईनाम सरकार ने घोषित कर रखा है.

प्रशासन ने प्रदीप के सरेंडर की राशि पांच लाख रुपये घोषित की है. लेकिन 2011 से पहले प्रदीप सिंह भी एक आम और सरल ग्रामीण हुआ करता था. और एक घटना ने उसके पूरी जिंदगी बदल कर रख दी.

इसे भी पढ़ेंःकहीं ‘राम’ की वजह से ‘टहल’ ना जाये रांची में ‘बीजेपी’

Trade Friends

आखिर कैसे ग्रामीण प्रदीप बना सबजोनल कमांडर

जिले के खालसा बरियातू का रहनेवाला प्रदीप सिंह चेरो, उपेंद्र सिंह चेरो और प्रियंका देवी का पुत्र है. जो आठ साल पहले अपने परिवार के भरन-पोषण के लिए राज्य के बाहर भी जाकर मेहनत मजदूरी करता था. प्रदीप की कहानी उसके पिता उपेंद्र ने न्यूज विंग के साथ साझा की है.

2011 में प्रदीप सिंह की भतीजी की शादी हो रही थी. इसी दौरान गांव के ही कुछ लोग शराब के नशे में धुत होकर आये और हंगामा करने लगे. शंकर सिंह चेरो, विजय सिंह चेरो, धीरज सिंह चेरो, रोहित सिंह चेरो, बिंदु सिंह चेरो कुछ अन्य लोगों के साथ शादी समारोह में घुस आये और बारातियों एवं घर वालों से बेवजह लड़ने लगे.

इस दौरान दूल्हा सहित उसके भाइयों को और घर वालों के साथ मार पीट की गई. इस लड़ाई में प्रदीप भी पिटाया था. बाद में सभी का इलाज सदर अस्पताल में हुआ था.

किसी तरह शादी संपन्न हुई, इसके बाद पूरे मामले की जानकारी एसपी को दी गई. एसपी ने मामले को संबंधित थाना भेजा. जहां बरियातू थाने के दारोगा ने चौकीदार बालकेश से पूरे मामले की जानकारी अकेले में ली.

लेकिन मामले को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई. एसपी से भी दोबारा फरियाद करने पर पीड़ित परिवार को डांट फटकार ही मिली. घटना पर कार्रवाई तो दूर उसके महज तीन दिनों के बाद आरोपियों ने एक होटल में प्रदीप और उसके चचेरे भाई सुरेन्द्र सिंह चेरो के साथ फिर से मारपीट की.

सुरेंद्र ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई और पुलिस को सूचना दी. जिसके बाद प्रदीप सिंह की जान बच सकी. बाद भी चौकीदार बालकेश के साथ ही पुलिस ने प्रदीप को अस्पताल भेजा.

प्रदीप के पिता का आरोप है कि इस पूरे मामले में चौकीदार ने पीड़ित प्रदीप और उसके परिवार का पक्ष नहीं लेते हुए पुलिस को भी गुमराह करने का काम किया. न्याय नहीं मिलने से निराश प्रदीप जख्मी हालत में ही घर पहुंचा और घंटों रोता रहा.

प्रदीप के पिता कहते हैं कि रोते-रोते प्रदीप उस दिन जो अपने घर निकला दोबारा नहीं लौटा. कुछ दिनों के बाद उनके परिवार को पता चला कि प्रदीप माओवादी संगठन में शामिल हो गया है. आज की तारीख में प्रदीप सिंह चेरो भाकपा माओवादी का तीन नंबर एरिया कमेटी दक्षिणी लातेहार का सब जोनल कमांडर है और क्षेत्र में सक्रिय है.

SGJ Jewellers

इसे भी पढ़ेंःकर्जदार बना गयी येदियुरप्पा की मेजबानीः जानें ‘टॉयलेट-कर्ज कथा’ की पूरी कहानी

किसी तरह होता है गुजारा- उपेंद्र सिंह

माओवादी प्रदीप का घर

अपनी माली हालत का जिक्र करते हुए उपेंद्र सिंह ने बताया कि थोड़ी सी जमीन में सब्जी उगाते हैं. प्रदीप की पत्नी पुनीता धर्मपुर सब्जी बाज़ार में बेचने जाती है.

kanak_mandir

घर में कुछ मवेशी है, उसी को चराते हैं. छोटा बेटा और एक पोता दूसरे राज्यों में कमाने जाते हैं जिससे घर चलता है. माओवादी बने चुके प्रदीप द्वारा रुपये भेजने की बात से उन्होंने साफ इनकार किया.

इसे भी पढ़ेंः मुरी कॉस्टिक पौंड हादसाः हिंडाल्को इंडस्ट्रीज ने बंद किया प्लांट से उत्पादन

पुलिस नहीं करती उचित कार्रवाई: सरोजनी देवी

सरोजनी देवी

माओवादी प्रदीप के छोटे भाई की पत्नी सरोजनी देवी ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि 2011 की घटना उनके परिवार के साथ हुई कोई पहली या आखिरी घटना नहीं थी. कुछ साल पहले उनके जेठ स्व राजेन्द्र सिंह के बड़ा बेटे जितेन्द्र सिंह चेरो को रास्ते में चार लोगों ने बेहरहमी से पीटा था.

घर में उस वक्त पैसे भी नहीं थे. ऐसे में गाय बेचकर उसका इलाज करवाया गया था. बाद में उसकी भी पढ़ाई छोड़वा कर उसे काम करने के लिए बाहर भेज दिया.

दुर्गा आजीविका स्वंय सहायता समूह से जुड़ी सरोजनी ने बताया कि उनके समूह को स्मार्ट फोन मिला था. फोन कर विजय सिंह अश्लील बातें करता था. मामले की जानकारी जब थाने को दी गई, तब उसी चौकीदार ने क्रॉस कन्केशन का बहाना बना कर मामले को रफा-दफा कर दिया.

सरोजनी का कहना है कि अब तो पुलिस से भरोसा भी उठ गया है, जो करना होगा खुद ही करना होगा. डर के कारण घर के बच्चों को अपने रिश्तेदारों के घरों में भेज देते है ताकि वे सुरक्षित रह सके.

सरेंडर कर दें प्रदीप- पत्नी पुनीता देवी

2011 की घटना को याद कर प्रदीप सिंह चेरो की पत्नी पुनीता देवी कहती हैं कि वो दिन वो कभी नहीं भूल सकती हैं. जब घंटों बच्चों से लिपट कर प्रदीप रोता रहा, लाख पूछने पर भी कुछ नहीं बताया.

सबजोनल कमांडर की पत्नी पुनीता देवी

पुनीता चाहती है कि प्रदीप सरेंडर कर दे. लेकिन फिर खुद ही कहती हैं कि शायद ये मुमकिन नहीं है, क्योंकी वो टूटे दिल से पार्टी में गया है.

घटना को याद कर पुनीता ने कहा कि उस दिन अगर चौकीदार ने सच का साथ दिया होता तो आज उसके परिवार की ये हालत नहीं होती. पुनीता आखिरी बार प्रदीप से करमडीह जंगल में मिली थी.

उसे याद कर बताया कि काफी देर प्रदीप से बात हुई. उसने घर और बच्चों का ख्याल रखने को कहा, फिर कभी नहीं मिला.

इसे भी पढ़ेंःप्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का खुद पर नियंत्रण नहीं, प्रदेश की 80 इंडस्ट्रीज सबसे अधिक प्रदूषित, फिर भी…

पुनीता गांव के उन दबंगों को अपने पति प्रदीप सिंह के माओवादी बनने का जिम्मेवार मानती हैं. उनका कहना है कि अगर पुलिस ने अपना काम सही से किया होता तो आज प्रदीप उनके साथ होता.

पुलिस के तत्कालीन पदाधिकारी जिम्मेवार

पूरे मामले को लेकर प्रदीप के परिजन लातेहार जिला पुलिस के तत्कालीन अधिकारियों को जिम्मेवार मानती है. माओवादी सबजोनल कमांडर प्रदीप सिंह चेरो की बड़ी भतीजी गीता की शादी से शुरू हुई, इस कहानी ने आज पूरे परिवार की दशा और दिशा बदल दी है. उस वक्त जिले के एसपी कुलदीप द्वेदी थे. और डीएसपी अजित पीटर डुंगडुंग थे. जबकि सदर थाना के प्रभारी विनय कुमार सिंह और चौकीदार बालकेश थे जो अब सेवानिवृत हो चुके हैं.

प्रदीप सिंह चेरो की कहानी पुलिस अधिकारियों की अनदेखी को बयां करती है. परिवार काफी तकलीफ से गुजारा, न्याय नहीं मिलने की निराशा ने प्रदीप को गलत रास्ते पर चलने पर मजबूर कर दिया. लेकिन ये बात सर्व विदित है कि हथियार उठाना किसी समस्या का समाधान नहीं है. बंदूक से विकास नहीं हो सकता.

इसे भी पढ़ेंःमहिला एवं बाल विकास के अवर सचिव का 40 दिन पहले हुआ ट्रांसफर, अब भी बने हुए हैं अपने पुराने पद पर

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

kohinoor_add

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like