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शिक्षकों की प्रोन्नति नहीं होने से राज्य में 3226 माध्यमिक प्राचार्यों के पद रिक्त

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सुदूर क्षेत्रों में पारा शिक्षक संभाल रहे कार्यभार

स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग प्रोन्नति नियमावली के स्थान पर बना रहा नियुक्ति नियमावली

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नियमावली स्वरूप बनकर तैयार, कैबिनेट से पास होने की है देर

Ranchi: राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और प्राचार्यों की कमी बढ़ती ही जा रही है. नियुक्ति और प्रोन्नति के पेंच में नौनिहालों का भविष्य गर्त में जा रहा है. वर्तमान में राज्य में 3226 माध्यमिक प्राचार्यों के पद रिक्त है.

राज्य सरकार की ओर से अगर सही समय में शिक्षकों की प्रोन्नति की जाती को इन पदों को भरा जा सकता था. स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग की ओर से इन शिक्षकों की प्रोन्नति नियमावली के स्थान पर नियुक्ति नियमावली बनायी जा रही है.

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जिसके तहत राज्य के शिक्षकों की प्रोन्नति के स्थान पर सीधे नियुक्ति की जायेगी. विभाग की ओर से भले ही नियुक्ति नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया गया है, लेकिन इसे कैबिनेट में पास किया गया. नियुक्ति नियमावली बनने के बाद ही राज्य में इन पदों को भरा जा सकता है. जो एक लंबी प्रक्रिया होगी.

लगभग बीस सालों से नहीं हुई प्रोन्नति

राज्य के माध्यमिक शिक्षकों की प्रोन्नति लगभग बीस सालों से नहीं हुई है. 2004-05 और 2016 में नियुक्त शिक्षकों को छोड़ कर पूर्व से नियुक्त शिक्षकों की प्रोन्नति नहीं की गयी है. ऐसे में लगभग 41 हजार शिक्षक हैं जो प्रोन्नति से वंचित हैं.

वहीं लगभग तीस हजार शिक्षक हैं जो प्रिंसिपल बनने के लिए जरुरी क्राइटेरिया को पूरा करते हैं. इसके बाद भी इन शिक्षकों की प्रोन्नति नहीं की गयी. फिलहाल स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग की से ओर नियुक्ति नियमावली बनने के बाद ही इन रिक्त पदों को भरा जायेगा.

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कई स्कूलों में पारा शिक्षक हैं प्रभारी प्राचार्य

प्राचार्यों की कमी का आलम ये है कि कई उत्क्रमित स्कूलों में पारा शिक्षक ही प्रभारी प्राचार्य का कार्यभार संभाल रहे हैं. वो भी ऐसे स्कूल जो सुदूर क्षेत्रों में हैं और जहां सरकारी शिक्षक नहीं है.

हालांकि सरकारी निर्देशों के अनुसार, पारा शिक्षकों को प्रभारी प्राचार्य के कार्यों का वहन नहीं करना है. लेकिन विभाग के पास कोई विकल्प नहीं होने के कारण पारा शिक्षक ही प्राचार्य की भूमिका निभा रहे हैं.

वहीं कुछ स्कूल ऐसे हैं, जहां सहायक शिक्षक प्रभारी प्राचार्य की भूमिका में हैं. इस संबंध में कई बार स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग के प्राचार्य से बात करने की कोशिश की गयी, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया.

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