न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

दुमका : जाहेर टोला में बिना शौचालय के ही लग गया है बोर्ड- ‘खुले में शौच मुक्त गांव’

जामा के अगोईया गांव का जाहेर टोला विकास योजनाओं से है वंचित, ग्रामीण पूछ रहे- कब मिलेगा शौचालय?

659

Dumka : स्वच्छ भारत मिशन ने झारखंड के दुमका जिला स्थित जामा प्रखंड के अगोईया गांव के जाहेर टोला में दम तोड़ दिया है. भले ही सरकार भूल गयी हो, ग्रामीणों को शौचालय ना बनने का मलाल है.

JMM

सरकार द्वारा लगाया गया ”खुले में शौच मुक्त गांव” का बोर्ड ग्रामीणों का मुंह चिढ़ा रहा है. यह टोला अन्य मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है.

इसे भी पढ़ें : पीएम नरेंद्र मोदी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा का इस्तीफा एक रहस्य

चापाकल का हेड खोलकर ले गया मिस्त्री

अगोईया गांव के जाहेर टोला में करीब पंद्रह घर हैं. इसकी जनसंख्या करीब 120 है. जाहेर टोला में सरकार की तरफ से एक भी शौचालय नही बना है. टोला में कुल दो चापाकल हैं जिसमें एक मंझी मरांडी के घर के सामने का चापाकल पांच वर्ष से खराब है. विभाग के मिस्त्री चापाकल का हेड खोलकर कहीं दूसरी जगह लेकर चले गये हैं. अब यह चापाकल बेकार हो गया है.

Bharat Electronics 10 Dec 2019

दूसरा चापाकल बड़का टुडू के घर के सामने है जिसे चलाने के दस मिनट बाद पानी निकलता है. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इसमें पाइप सड़ जाने के कारण कुछ पाइप निकाल दिये गये हैं और कुछ लीक है जिस कारण बहुत देरी से पानी उठता है. इससे टोला में पीने के पानी की हमेशा किल्लत रहता है. इस टोला में दो कुएं हैं वे भी जर्जर हो गये हैं. ये कभी भी धंस सकते हैं.

जान जोखिम में डाल कुएं से निकालते हैं पानी

गांव में पानी की किल्लत के कारण ग्रामीण जोखिम उठाकर इन कुओं से पानी लेने को मजबूर हैं. इस टोले की कच्ची सड़क आज भी विकास की बाट जोह रही है.

ग्रामीणों का कहना है कि जन प्रतिनिधियों और सरकार/प्रशासन की उदासीनता के कारण इस टोला में विकास नही हो पा रहा है. ग्रामीणों की मांग है कि इस टोला में सभी घरों को जल्द से जल्द शौचालय की सुविधा दी जाय, कुओं का जीर्णोद्धार किया जाय, टोला में पीसीसी ढलाई की जाय, खराब पड़े चापाकल की मरम्मत किया जाय और दो नये चापाकल लगाये जायें. इसके साथ-साथ सोलर टंकी भी लगाया जाय.

इसे भी पढ़ें : पुलिस सहकारी समिति ने ओरमांझी में घेरा CNT और GM लैंड, म्यूटेशन कराने की हो रही है कोशिश

क्या कहते हैं ग्रामीण, ‘सरकार! जरा हमारी बात भी सुनिये’

मखादी हेम्ब्रोम : टोला में शौचालय नहीं होने के कारण बहु, बेटियों, महिलाओं के साथ बुजुर्गों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है. सभी खुले में शौच करने के लिये मजबूर हैं. किसी कारण रात में बहु, बेटियों और महिलाओं को खुले में शौच जाना पड़ता है तो किसी अनहोनी की शंका सदा सताती रहती है.

सोना बास्की : इस टोला में एक ही चापाकल होने के कारण हम महिलाओं और स्कूल और आंगनबाड़ी के बच्चों को बहुत दिक्कत होती है. एक मात्र चापाकल होने के कारण लाइन लगाना पड़ता है जिस कारण खाना बनाने, खेत व मजदूरी में ठीक से समय नही दे पाते हैं. बच्चों को ठीक समय में स्कूल और आंगनबाड़ी भी नही भेज पाते हैं.

सूर्यमुनि किस्कू : टोला में पीसीसी ढलाई नही होने के कारण हम ग्रामीणों के साथ अन्य गांव और टोला के लोगों को आने जाने में बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है. वर्षा के मौसम में कुल्ही में चलना मुश्किल हो जाता है.

बड़का टुडू : कुओं का जीर्णोद्धार हो जाने से पानी की समस्या कुछ हद तक दूर हो जायेगी. सिचाई में भी सुविधा मिल जायेगी.

इसे भी पढ़ें : एनआईए का कमाल, ब्लड टेस्ट रिपोर्ट को हवाला लेन-देन समझ  हृदय रोग विशेषज्ञ से पूछताछ की

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like