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मासूम बच्चों के पोषाहार पर भी ग्रहण, चार माह से नहीं मिल रहा पोषाहार, कैसे तंदरूस्त होंगे बच्चे

27 लाख से अधिक बच्चों पर पड़ रहा है असर

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Ranchi : राज्य के मामूम बच्चों के पोषाहार पर भी ग्रहण लग गया है. नौनिहाल कैसे तंदुरुस्त रहें इस पर भी सवालिया निशान खड़ा हो गए हैं. रेडी टू इट अब रेडी नहीं डिले के चक्कर में फंसता जा रहा है. बताते चलें कि पूरे प्रदेश में इस योजना के तहत 34 लाख 85 हजार 416 लाभुक हैं. इसमें 27 लाख दो हजार 944 बच्चे के साथ 20 हजार 216 अति कुपोषित बच्चे और 7 लाख 62 हजार 256 गर्भवती और बच्चों को दूध पिलाने वाली माताएं भी शामिल हैं. वहीं इस योजना के शुरू नहीं होने पर केंद्र ने भी कड़ी आपत्ति जतायी है.

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एक्सटेंशन और टेंडर के चक्कर में फंस रहा मामला

योजना एक्सटेंक्शन व टेंडर के चक्कर में पिछले चार माह से फंसी है. एक्सटेंशन देते-देते कंपनियों का विभाग पर करोड़ों का बकाया हो गया था. झारखंड में 38640 आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार की आपूर्ति करने वाली तीन कंपनियों ने सरकार पर 335 करोड़ रुपये का दावा भी ठोंका. पहली बार पूरक पोषाहार के लिए जो टेंडर निकाला गया उसके नियम इतने सख्त थे कि पूरे देश भर से इतने बड़े काम को करने के लिए सिर्फ छह कंपनियों ने ही रुचि दिखायी. इन छह कंपनियों में तीन वो कंपनियां थी जो पहले से ही राज्य में पूरक पोषाहार बांटने का काम कर रही थी. बाकी तीन कंपनियों में यूपी की चेमेस्टर, महाराष्ट्र की महिला गुट और तमिलनाडू की राशि न्यूट्री फूड शामिल थीं.

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दोबारा भी मामूली बदलाव के बाद निकाला टेंडर

दोबारा विभाग की तरफ से 21 मई को जो टेंडर निकाला गया, उसमें भी मामूली बदलाव था. टेंडर भरने के लिए कंपनी के टर्नओवर में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है. पहली बार की तरह इस बार भी कंपनी के टर्नओवर को 95 करोड़ रखा गया. स्वयं सहायता ग्रुप और सखी मंडलों के लिए टर्नओवर 24 करोड़ रखा गया. बदलाव सिर्फ ईएमडी (अर्नस्ट मनी डिपोजिट) में किया गया. इसके बाद मनचाही कंपनियों को टेंडर देने के लिए समाज कल्याण विभाग के द्वारा छोटी-छोटी बातों पर पोषाहार का टेंडर रद्द कर दिया गया.

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तीन कंपनियों को मिला था काम

पूरक पोषाहार के रूप में रेडी टू इट भोजन बांटने के लिए सरकार ने तीन कंपनियों को टेंडर के जरिए काम दिया था. इन तीन कंपनियों में इंटरलिंक लिमिटेड, कोटा दाल मिल और मेसर्स आदित्य शामिल थे. इन कंपनियों का करार 31 जुलाई 2017 को ही खत्म हो गया था. सरकार उस वक्त टेंडर की प्रक्रिया दोबारा ना करते हुए उन्हीं कंपनियों को तीन-तीन महीने का एक्सटेंशन देकर उनसे काम लेती रही. पांच महीने काम करने के बाद विभाग ने 14 दिसंबर को टेंडर निकाला. लेकिन 10 जनवरी को विभाग ने टेंडर रद्द कर दिया. जिसके बाद 21 मई को विभाग ने दोबारा टेंडर निकाला है.

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सरकार की ओर से हुई लेटलतीफी

कंपनी के साथ करार खत्म होने से पहले ही सरकार को टेंडर के लिए कार्यवाही शुरू कर देनी थी. लेकिन सरकार ने इसमें लेटलतीफी की. जनवरी में टेंडर कैंसिल करने के बाद मामले को सरकार ने फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया. चार महीने के बाद एक बार फिर से सरकार की नींद खुली. विभाग की तरफ से आरपीएफ टेंडर निकाला गया है.

क्या कहते हैं निदेशक कल्याण

कल्याण विभाग के निदेशक मनोज कुमार ने न्यूज विंग को बताया कि टेंडर हो गया है. लेकिन काम कब से शुरू होगा इसके लिए एक टाइम बाउंड बताना मुश्किल है.

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