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#EconomicSlowdown: सेल को वेतन व ऋण पर ब्याज चुकाने के लिए भी हर माह लेना पड़ रहा है 1000 करोड़ रुपये कर्ज

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  • प्लांट की विभिन्न इकाइयों को ऑपरेट करने के लिए हर माह 1000 करोड़ कर्ज ले रहा है
  • पहली तिमाही में मुनाफा के बाद दूसरी तिमाही में एक बार फिर घाटा में चला गया आइएसपी
  • अगली तिमाही में स्थिति नहीं सुधरी तो डिमांड पर लगेगा ग्रहण
  • आइएसपी सहित सेल पर संकट के बादल

Burnpur: वित वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में मुनाफा कमाने के बाद भी इस्को स्टील प्लांट (आइएसपी) दूसरी तिमाही में एक बार फिर से घाटा में चला गया है.

हालत यह हो गयी है कि सेल को वेतन के साथ ब्याज चुकाने के लिए भी लोन लेना पड़ रहा है. आइएसपी की देनदारी 1604.48 करोड़ रुपये से बढ़ कर 1685.18  करोड़ रुपये हो गयी है. यानी आइएसपी को लगभग 80.7 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है.

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बाजार में स्टील की मांग कम होने की मार सेल की विभिन्न इकाइयों के साथ-साथ आइएसपी को भी झेलनी पड़ी है. इस्पात बाजार मंदी की चपेट में है.

बाजार में इस्पात उतपादन की मांग पहले से कम हो गयी है. सेल के उत्पादों के दाम अन्य कंपनियों के मुकाबले अधिक होने के कारण कंपनी के प्रॉडक्ट्स को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं.

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इसका असर बीएसएल के साथ-साथ सेल पर दिखने लगा है. सेल का कर्ज 54 हजार करोड़ तक पहुंच गया है, जो  अब तक का सबसे बड़ा ऋण है. प्रबंधन को अपने सभी प्लांट को ऑपरेट करने के लिए हर महीने करीब एक हजार  करोड़ कर्ज लेना पड़ रहा है.

अधिक उत्पादन करने के बाद भी 523 करोड़ के घाटे में

वर्तमान वित वर्ष की दूसरे तिमाही में पिछले वर्ष के इसी अवधि में मुकाबले अधिक उत्पादन करने के बाद भी सेल 523 करोड़ (पीबीटी) के घाटे में चली गयी. एक लाख 20 हजार करोड़ की संपत्तिवाले सेल के कर्ज का आंकड़ा बीते वित वर्ष 2018-19  में लगभग 46 हजार करोड़ था.

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उसके बाद वर्तमान वित्त वर्ष 2019-20  की पहली तिमाही में उसने पहली तिमाही में अधिक यानी 35 सौ करोड़ कर्ज  लिया. पहले छह महीने में ही साढे छह हजार करोड़ का लोन ले चुका है.

इससे सितंबर तक कंपनी लगभग 52 हजार करोड़ के कर्ज में पहुंच चुकी थी. प्रबंधन को अपने सभी प्लांट को ऑपरेट करने के लिए हर महीने करीब एक हजार करोड़ की जरूरत होती है.

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54 हजार करोड़ तक पहुंच चुका है लोन

इसलिए तीसरी तिमाही के पहले दो महीने में लिये गये लोन को जोड़ दिया जाये तो आंकड़ा 54 हजार करोड़ तक पहुंच चुका है. सेल बड़े आर्थिक संकट में घिर चुका है.

इससे सभी ईकाइयां प्रभावित हैं. सेल प्रबंधन अपने अधिकारियों तथा कर्मचारियों को वेतन देने के लिए बैंकों से पहले ही लोन ले रखा था. अब स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि पुराने लिये गये लोन का ब्याज चुकाने के लिए भी बैंकों से लोन लेना पड़ रहा है.

अगर स्टील मार्केट की स्थिति में जल्द सुधार नहीं आया तो मामला और बिगड़ सकता है. सेल में लगभग 72 हजार अधिकारी व कर्मचारी हैं. इनके वेतन में ही हर महीने सौ करोड़ खर्च हो रहा है. मंदी लंबे समय तक चलने पर स्थिति और विकट हो सकती है.

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