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सरकार के दबाव में न झुकें मीडिया मालिक, एडिटर्स गिल्ड ने की अपील

मीडिया की स्वतंत्रता पर हमले के लिए की सरकार की आलोचना

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New Delhi: पत्रकारों और संपादकों की कई संस्थाओं ने केन्द्र की मोदी सरकार पर प्रेस की स्वतंत्रता से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है. इसके साथ ही पत्रकारों के संगठनों ने मीडिया मालिकों से सरकार के दबाव में न झुकने की अपील की है.

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आलोचनात्मक खबर दिखाने पर परेशान न करे सरकार- एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक पत्र जारी कर मीडिया मालिकों और सरकार से संयम बरतने की अपील की है. पत्र में एडिटर्स गिल्ड ने लिखा है-

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया स्वतंत्र पत्रकारिता के खिलाफ सियासी हलकों द्वारा अनुचित दबाव बनाने की आलोचना करता है. हाल के दिनों में ये देखा गया है कि सरकार के खिलाफ आलोचनात्मक खबरें दिखाने पर पत्रकारों और मीडिया समूहों पर तरह-तरह के दबाव बनाए गये. यहां तक कि टेलीविजन चैनलों के सिग्नल के साथ भी छेड़छाड़ की गई.

पिछले कुछ दिनों में ये देखने को मिला कि इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया के कम से कम दो पत्रकारों को इसलिए इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि उनके मीडिया मालिकों को लगता था कि उनकी खबरें सरकार की आलोचना कर रही हैं. उनमें से एक पत्रकार ने तो एडिटर्स गिल्ड में लिखित शिकायत दर्ज कराई है.

एबीपी न्यूज के तीन पत्रकारों को देना पड़ा था इस्तीफा

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निजी चैनल एबीपी न्यूज पर ये आरोप लग रहे हैं कि उन्होने सरकार के दबाव में आकर अपने तीन वरिष्ठ पत्रकारों में से दो को इस्तीफा देने को मजबूर किया और एक को लंबी छुट्टी पर भेज दिया. ये पत्रकार हैं पूण्य प्रसून वाजपेयी, मिलिंद खांडेकर और अभिसार शर्मा.

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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा कि

बीते कुछ दिन में कम से कम इलेक्ट्रॉनिक के दो वरिष्ठ पत्रकारों ने सामने आकर कहा है कि उनके मालिकों ने कंटेंट में कटौती कर उसे हल्का बनाने का प्रयास किया ताकि इसे सरकार के प्रति कम आलोचना वाला बनाया जा सके, इस कारण से उनके पास इस्तीफा देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था.

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‘द फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स’ ने भी की सरकार की आलोचना

द फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि जिस तरह एबीवी न्यूज़ से पुण्य प्रसून बायपेयी, मिलिंद खंडेकर और अभिसार शर्मा की विदाई हुई उससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि वर्तमान सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना नहीं की जा सकती. फाउंडेशन ने पुण्य प्रसून बायपेयी द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में केंद्र की मोदी सरकार से जवाब भी मांगा है.

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