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पांचवीं अनुसूची वाले इलाकों में नगर निगम, नगरपालिका, नगर परिषद के हुए चुनाव असंवैधानिक तो नहीं!

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Pravin Kumar

Ranchi : रांची नगर निगम के साथ-साथ पांचवीं अनुसूची वाले इलाके में नगरपालिका, नगर निगम, नगर परिषद का चुनाव कराने से संबंधित कानूनों का विस्तार संसद में कानून बनाकर नहीं किये जाने के कारण पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के नगरपालिका, नगर निगम और नगर परिषद में चुनाव जीत चुके उम्मीदवारों का पद खतरे में पड़ सकता है. जिस प्रकार अनुसूचित इलाकों में पंचायत के कार्य विस्तार के लिए पंचायती राज विस्तार अधिनियम 1996 संसद में पास किया गया है, कानून के जनकारों का मनना है कि नगरपालिका, नगर निगम और नगर परिषद के कार्य के विस्तार के लिए संसद में किसी प्रकार का कानून नहीं बनाया गया है. इसलिए पांचवीं अनुसूची वाले इलाकों में नगरपालिका, नगर निगम और नगर परिषद का चुनाव करना पूरी तरह असंवैधानिक है.

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झारखंड हाई कोर्ट में विचाराधीन है रिव्यू पिटीशन

इस संबंध में झारखंड के पांचवीं अनुसूचित इलाकों में चुनाव के विरोध के स्वर भी पंरपरागत स्वशासन व्यवस्था से उठते रहे हैं. हाल के दिनों में ‘सूरज कुमार शर्मा बनाम स्टेट ऑफ झारखंड’ स्पेशल लीव पिटीशन सिविल सं. 4199/2018 पर अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च 2018 को पिटीशनर सूरज कुमार शर्मा को झारखंड उच्च न्यायालय में रिव्यू पिटीशन फाइल करने का आदेश दिया था. इसका रिव्यू पिटीशन झारखंड उच्च न्यायालय में स्वीकार कर लिया गया है और न्यायालय का फैसला आना बाकी है.

संसद में कानून बनाये बिना अनुसूचित इलाकों में चुनाव कराना माना जा रहा असंवैधानिक

पांचवीं अनुसूची वाले इलाकों में नगर निगम, नगरपालिका, नगर परिषद के हुए चुनाव असंवैधानिक तो नहीं!

यह मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 243जेड सी को आधार मानते हुए झारखंड म्यूनिसिपल एक्ट 2011 को राज्य के अनुसूचित क्षेत्र में लागू करने पर सवाल खड़ा कर दिया. राज्य में झारखंड म्यूनिसिपल एक्ट 2011 के तहत अनुसूचित क्षेत्र में नगर पालिका या नगर निगम की स्थापना और चुनाव कराने से पूर्व संसद द्वारा कानून बनाना जरूरी था, लेकिन अब तक इस संबंध में कानून नहीं बनाया गया है. अब बिना कानून बनाये पांचवीं अनुसूची वाले इलाकों में चुनाव को असंवैधानिक माना जा रहा है.

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क्या कहते हैं अधिवक्ता

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अधिवक्ता रश्मि कात्यान के अनुसार, राज्य में पांचवीं अनुसूची वाले इलाकों में दो बार नगर पालिका, नगर निगम और नगर परिषद का चुनाव कराया जा चुका है. सामान्य भाषा में कहें, तो यह चुनाव गैरकानूनी है, क्योंकि संविधान के भाग 9 (क) का विस्तार नहीं किया गया है. संविधान का अनुच्छेद 243 जेड सी वैसा ही अनुच्छेद है,  जिसके प्रावधान के मुताबिक भाग 9 (क) का जब तक संसद में कानून बनाकर विस्तार नहीं किया जाता है, तब तक पांचवीं अनुसूची वाले इलाके में इसे लागू किया जाना असंवैधानिक है.

राज्य में कौन-कौन से हैं पांचवीं अनुसूची वाले इलाके

राज्य के रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, साहिबगंज, दुमका, जामताड़ा, पलामू जिला के सतबरवा, रबदा, बकोरिया पंचायत, गढ़वा जिला के भंडरिया प्रखंड, गोड्डा जिला के सुंदर पहाड़ी और बोआरीजोर प्रखंड पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं. इन जिलों में जब तक संसद द्वारा संविधान के भाग 9 (क) का विस्तार नहीं किया जाता और इस संबंध में कानून नहीं बनाया जाता, तब तक चुनाव कराना असंवैधानिक है.

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नगरपालिका, नगर निगम, नगर परिषद के क्या हैं कार्य

शहरी संस्थाओं के कार्य दो तरह के होते हैं. कुछ कार्य अनिवार्य होते हैं, जैसे शहर के लिए शुद्ध पानी की व्यवस्था करना, सड़कों पर रोशनी और सफाई की व्यवस्था करना, जन्म-मृत्यु का पंजीयन करना, दमकल की व्यवस्था आदि कार्य नगर पालिका, नगर निगम और नगर परिषद को अनिवार्य रूप से करने ही पड़ते हैं. कुछ कार्य ऐसे भी हैं, जिन्हें करना इन संस्थाओं की इच्छा पर निर्भर है, जैसे सार्वजनिक बाग, स्टेडियम, वाचनालय, पुस्तकालय का निर्माण करना, वृक्षारोपण, आवारा पशुओं को पकड़ना, मेले-प्रदर्शनियों का आयोजन, रैन बसेरों की व्यवस्था आदि. इन संस्थाओं को अपने कार्य में मदद के लिए अधिशाषी अधिकारी या मुख्य कार्यकारी अधिकारी या आयुक्त, इंजीनियर, स्वास्थ्य अधिकारी, राजस्व अधिकारी, सफाई निरीक्षक आदि होते हैं. इन संस्थाओं को तीन स्रोतों से धन प्राप्त होता है. इन्हें केंद्र या राज्य सरकारों से अनुदान और ऋण के रूप में धन मिलता है. दूसरा, इन्हें विभिन्न शुल्कों एवं जुर्माने के रूप में धन मिलता है. तीसरा, ये अपने शहरवासियों पर विभिन्न कर लगाकर धन प्राप्त कर सकती हैं.

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