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किसान-इंजीनियर जान दे रहे हैं और सरकार मुस्कुरा रही है

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Surjit singh

गढ़वा में कर्ज में डूबे किसान ने दो बच्चियों व पत्नी की हत्या कर खुद आत्महत्या कर ली. जमशेदपुर में बेरोजगार होने पर इंजीनियर ने जान दे दी. उद्योग-धंधे बंद हो रहे हैं. कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है. शो-रुम बंद हो रहे हैं.

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व्यापारी परेशान हैं. और हमारी सरकार क्या कर रही है ? चौक-चौराहों पर होर्डिंग में मुस्कुरा रही है.

तो क्या यह मान लिया जाये कि झारखंड में सब ठीक है. लोगों को दिक्कतें नहीं हो रही हैं. या यह माना जाये कि सरकार और आम जनता दोनों राष्ट्रवाद के घोड़े पर सवार हैं.

पहले इस तरह की घटनाओं पर विपक्ष शोर मचाता था. धरना-प्रदर्शन करता था. सरकार को मजबूर करता था कि वह सुधार के उपाये करें. अब विपक्ष भी चुप है. क्यों. यह कोई नहीं जानता. क्या विपक्ष खत्म हो गया है. क्यों जनता विपक्ष की बात नहीं सुन पा रही. या फिर जनता को ही अब सिर्फ राष्ट्रवाद की भाषा पसंद आने लगी है.

सो कुछ दिख नहीं रहा. सब ठीक लग रहा है. किसान की आवाज भी सुनाई नहीं दे रही है, जिसमें वह कह रहा हैः 3.54 लाख रुपया कर्ज लेकर कुआं बनाया, सरकार पैसा नहीं दे रही. तनाव में हूं, कहीं आत्महत्या ना कर लूं.

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किसान परेशान हैं. मनरेगा के तहत सरकार के कहने पर कर्ज लेकर काम कर लिया. कुआं खोद लिया. अब सरकार पैसा नहीं दे रही. क्यों ? वजह यह कि सरकार के पास पैसा नहीं है.

सरकार के अफसर इसे स्वीकार करते नहीं. पर हालात यही है. अफसरों के पास इस सवाल का जवाब नहीं होता कि पैसा है, तो दे क्यों नहीं रहे. वही पुराना बहाना. प्रक्रियागत परेशानी.

कहना आसाना नहीं है, पर अब कहना ही पड़ेगा. ना भी मानते हैं, तो भी मानना ही होगा. झारखंड में सबकुछ ठीक ठाक है. सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है.

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अगर सरकार वेतन देने में विलंब कर रही है, तो यह पैसे की कमी के कारण नहीं हो रहा है. या तो सरकार देना नहीं चाह रही है या जानबूझ कर लेट करके दे रही है.

दो दिन पहले सरकार के आग्राह पर देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू रांची आये. उन्होंने मुख्यमंत्री कृषि आर्शिवाद योजना का शुभारंभ किया. 13.60 लाख किसानों के बीच 442 करोड़ रुपये बांटे गये. यह राशि सीधे किसानों के खाते में डाली गयी. 5000 से 25000 रुपये तक.

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मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यह भी घोषणा कर रखी है कि जिन गरीबों को सरकार ने गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया है, उन्हें दोबारा गैस उपलब्ध कराया जायेगा. झारखंड में करीब 30 लाख लोगों को गैस सिलेंडर बांटे गये हैं. तो अब सरकार उन सभी 30 लाख गैस सिलेंडर को दोबारा रिफिल करायेगी.

मतलब फ्री में दोबारा गैस भरवा देगी. अब जरा गैस सिलेंडर के दाम पर गौर करें, तो एक गैस सिलेंडर को भरवाने में करीब 600 रुपये खर्च आयेंगे. और जब सरकार 30 लाख गैस सिलेंडर में गैस भरवायेगी, तो खर्च 218 करोड़ रुपया आयेगा.

कहने की जरुरत नहीं. भले ही किसानों का बकाया नहीं चुकाया जा रहा. पर, लोगों को सीधे कैश दिया जा रहा है. क्योंकि यही लोग चार माह बाद होने वाले चुनाव में वोटर के रुप में सामने होंगे. वोट किसे करेंगे, यह समझना बहुत मुश्किल काम नहीं है.

ऐसा नहीं है कि सरकार रोजगार पैदा नहीं कर सकती. नाउम्मीद हो चुके युवकों को रोजगार नहीं दे सकती. वह कर सकती है. पर सरकार को सिर्फ वही काम नजर आ रहा है, जिससे वोट मिलेगी. बाकी की चिंता नहीं. यही कारण है कि सरकार के विभिन्न विभागों में छह लाख से अधिक रिक्तियां हैं. पर, इन रिक्तियों को भरने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे.

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