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बिजली ट्रांसमिशन टावर के लिए काटे गये गांव वालों के 300 फलदार वृक्ष, नहीं मिला मुआवजा

फरवरी में मेदिनीपुर जीरत ट्रांसमिशन लिमिटेड की ओर से काटे गये वृक्ष, हुवांगहातु गांव में कुसुम, महुआ, पलाश के काटे गये वृक्ष ग्रामीणों की आजीविका खतरें में

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Chhaya

Ranchi :  पावर ग्रिड मेदिनीपुर जीरत ट्रांसमिशन लिमिटेड की ओर से राज्य में बिजली ट्रासंमिशन टावर बिछाये गये हैं. जो राज्य के विभिन्न गांवों से होकर गुजरे हैं. रांची से सटे हुवांगहातु गांव से करीब एक किलोमीटर की दूरी में कंपनी की ओर से बिजली ट्रांसमिशन टावर लगाये गये हैं. इस जगह में हुवांगहातु गसमेत आसपास के कई गांव वालों की जमीन है. जिन पर ये ट्रांसमिशन टावर लगाये गये है. कंपनी की ओर से गांव वालों से उनकी जमीन तो ले ली गयी. लेकिन इसके बदले में अब तक उन्हें मुआवजा नहीं दिया गया.

गांव जाकर जानकारी हुई कि हुवांगहातु गांव में लगभग 150 घर है. जो मुख्यत:  खेती पर निर्भर है. डिंबा मुंडा नामक एक ग्रामीण ने जानकारी दी कि फरवरी में कंपनी की ओर से उनकी निजी जमीन में लगे वृक्षों को काट दिया गया. जिसका मुआवजा अभी तक नहीं दिया गया. जबकि कंपनी ने उस जगह में ट्रांसमिशन टावर लगा दिया है. कुछ ने बताया कि बगल के ही सिंगासराय गांव में भी एक साल पहले पेड़ काटे गये लेकिन वहां के लोगों को भी अब तक मुआवजा नहीं मिला.

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काटे गये लगभग 300 फलदार वृक्ष

ग्रामीणों ने जानकारी दी कि क्षेत्र में गांव वालों की काफी जमीन है. जिसमें वे खेती या वृक्षारोपण करते हैं. जो उनकी आजीविका का एक मुख्य स्रोत है. कई ग्रामीणों से जानकारी हुई कि गांव में लगभग 300 फलदार वृक्षों को काटा गया है. ये वृक्ष लगभग सौ घरों की अपनी निजी संपत्ति थी. ग्रामीण राम कुमार मुंडा ने जानकारी दी कि उनके पांच कुसुम और दो महुआ के वृक्ष थे. जो टावर के लिए काट दिये गये.

उन्होंने बताया कि कुसुम में वे साल में दो बार लाह पालन करते थे. जिसमें एक पेड़ से इन्हें साल भर में पचास हजार तक की कमाई होती थी. वहीं कुसुम को कभी कभी बेच कर भी कुछ पैसे कमा लेते थे. महुआ वृक्ष के बारे में बताते हुए कहा कि महुआ को चुन कर वे बाजार में बेचते हैं. महुआ तेल से भी अच्छी कमाई, लगभग पचास हजार की कमाई होती थी.

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आधार कार्ड, खाता संख्या सब कुछ लिया पर मुआवजा नहीं मिला

ग्रामीणों से जानकारी हुई कि कंपनी की ओर से कुछ लोग आये थे, जिन्होंने जमीन और पेड़ के बदले मुआवजा देने की बात की थी. इसके लिए आधार कार्ड, जमीन का खाता संख्या और बैंक खाता संख्या ले गये. मुआवजा देने के लिए एक रसीद भी कंपनी की ओर से काट कर दी गयी. कहा गया था कि बैंक खाता में मुआवजा राशि दे दी जायेगी. फरवरी में पेड़ काटे गये,  लेकिन अब तक मुआवजा किसी भी ग्रामीण को नहीं मिला. कुछ ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में लाह पालन काफी अधिक होता है.

कंपनी या बिजली विभाग की ओर से अन्य वृक्षों को भी चिन्हित किया गया है. जिसमें लाह के साथ आम, कुसुम आदि फलदार वृक्ष हैं. कुछ ने बताया कि टावर से तीन लाख वोल्ट के बिजली तार लगायें गये हैं. शिवनारायण कैता ने जानकारी दी कि कंपनी की ओर से रसीद भी काटी गयी लेकिन अब तक पैसा नहीं मिला.

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ग्रामीणों की बिना अनुमति काटे गये वृक्ष

कुछ ग्रामीणों ने बातचीत के दौरान बताया कि ग्रामीणों की जमीन से वृक्ष पहले काट दिये गये थे. जब ग्रामीणों को इनकी जानकारी हुई तो पेड़ काटे जाने और टावर लगाये जाने का कारण पूछा तो कर्मचारियों ने इसकी कोई जानकारी नहीं दी. जेनेंद्र कैता नामक एक ग्रामीण ने बताया कि उनके पांच कुसुम के पेड़ काटे गये. वो भी लाह लगे हुए. अगर अभी वो वृक्ष होते तो उन्हें लगभग 60 से 70 हजार की कमाई होती.

बताया कि वृक्ष काटने आये लोगों से पूछा गया कि कितना मुआवजा मिलेगा तो उन्होंने कहा कि इस पर कुछ नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि खेती का समय आने वाला है. टावर लगाने के लिए जमीन में इस तरह से गढ्डा किया गया है कि अब इसमें खेती भी नहीं हो सकती. खेती योग्य बनाने के लिए इस जमीन में डेढ़ लाख रुपये खर्च करने होंगे. कहां से लायें इतने पैसे.

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