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करोड़ों साल पुराने जीव डिकिनसोनिया के जीवाश्म की पहचान हुई

विशाल पत्ते या टेबल जितने बड़े ऊंगलियों के निशान की तरह नजर आने वाले एक जीवाश्म ने कई दशकों से वैज्ञानिकों की नींद हराम कर रखी थी.

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London : विशाल पत्ते या टेबल जितने बड़े ऊंगलियों के निशान की तरह नजर आने वाले एक जीवाश्म ने कई दशकों से वैज्ञानिकों की नींद हराम कर रखी थी. आखिरकार उसकी पहचान उजागर हो गयी है. रूस में एक टीले की खुदाई के दौरान मिले काई जैसे जीवाश्म वैज्ञानिकों के लिए कसौटी बने हुए है. वैज्ञानिक इसका विश्लेषण करने में जुटे हैं. क्या यह काई जैसा कोई पौधा है या फिर विशाल एक कोशिकीय जीव यानी अमीबा? वैज्ञानिकों के अनुसार कहीं यह जीवों की उत्पत्ति के दौर का कोई नाकाम जीव तो नहीं या फिर शायद पृथ्वी पर पैदा हुआ सबसे पहला प्राणी. खबरों के अनुसार रिसर्चरों ने एक तरह की वसा यानी कोलेस्ट्रॉल का पता लगाया है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह डिकिनसोनिया है. यानी धरती पर पैदा हुआ सबसे पहला ज्ञात जीव. इस संबंध में ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर जोखेन ब्रॉक्स ने कहा कि वैज्ञानिक 75 साल से भी ज्यादा समय से इन विचित्र जीवाश्मों को समझने के लिए जूझ रहे हैं.

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55.8 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर भारी संख्या में डिकिनसोनिया मौजूद थे

अब इस बात की पुष्टि हो गयी है कि डिकिनसोनिया सबसे पुराना ज्ञात जीवाश्म है. अब कई दशकों पुराना रहस्य रहस्य नहीं रह गया है. बता दें कि वैज्ञानिकों की इस खोज को अमेरिकी जर्नल साइंस ने पिछले गुरुवार को प्रकाशित किया है. जानकारी दी गयी है कि डिकिनसोनिया के अंडाकार शरीर की लंबाई में वालय जैसी संरचना होती है और यह 4.6 फीट तक बढ़ सकता है. विश्लेषण से पता चला कि यह 55.8 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर भारी संख्या में मौजूद थे. यह जीव एडियाकारा बायोटा का हिस्सा है. बैक्टीरिया के दौर में यह जीव पृथ्वी पर थे. इसका मतलब यह कि आधुनिक जीवन शुरू होने के लगभग दो करोड़ साल पहले ये मौजूद थे. वैज्ञानिकों के लिए कार्बनिक पदार्थ से लैस डिकिनसोनिया जीवाश्मों को ढूंढना काफी मुश्किल काम रहा. हालांकि ऐसे बहुत से जीवाश्मों का पता ऑस्ट्रेलिया में चला था.

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साथ ही इन पर करोड़ों सालों में कई और चीजों का असर पड़ा. बहरहाल जिस जीवाश्म का अध्ययन किया गया है, वह उत्तर पश्चिम रूस में व्हाइट सी के पास एक टीले से मिला था.  ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर इल्या बोब्रोव्सकी ने इस संबंध में कहा कि मैं हेलीकॉप्टर लेकर दुनिया के इस सुदूर इलाके में पहुंचा, यह भालुओं और मच्छरों का घर है, यहीं पर मुझे ऐसे डकिनसोनिया जीवाश्म मिले जिनमें कार्बनिक पदार्थ अब भी मौजूद थे.

जीवाश्म व्हाइट सी के 50 से 100 मीटर ऊंचे टीलों के बीच में मिले थे. मुझे टीलों के किनारों पर रस्सी के सहारे लटकना पड़ा और इस तरह से मैंने बलुआ पत्थर के बड़े बड़े ब्लॉक्स की खुदाई की.  तब जाकर  मुझे वह जीवाश्म मिला और मेरी तलाश पूरी हुई

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