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आर्थिक मंदी की चपेट में गिरिडीह का लौह उद्योग भी, 50 प्रतिशत तक घट गया उत्पादन

उद्योगपतियों ने बतायी उद्योग की हालत

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Manoj Kumar Pintu

Giridih: केन्द्र व राज्य सरकार को करोड़ों का राजस्व देने वाला गिरिडीह का लौह उद्योग आर्थिक मंदी को लेकर भयभतीय है. क्योंकि लौह उद्योग का उत्पादन पिछले एक दशक की तुलना में सबसे अधिक निचले स्तर पर पहुंच चुका है. यानि कि उत्पादन 50 फीसदी गिर चुका है. फिलहाल जो आंकड़े मिले हैं वह यही बतातें है कि गिरिडीह की हर टीएमटी फैक्ट्री में जहां हर रोज 300 से 350 सौ टन छड़ का उत्पादन हुआ करता था. वह अब घटकर महज सौ से 160 टन पहुंच चुका है.

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खरीदार है नहीं, तो टीएमटी कारखानों के मालिकों ने उत्पादन ही घटा दिया है. हालांकि अभी तक किसी टीएमटी फैक्ट्री ने छंटनी तो नहीं की है. लेकिन स्थिति यही रही तो हर फैक्ट्री प्रबंधन के लिए मजदूरों और कर्मियों की छंटनी करना मजबूरी हो जाएगा. बहरहाल, ग्लोबल आर्थिक मंदी का डर साफ तौर पर देखा जा सकता है.

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नो प्रोफिट ने लोस पर माल बेचने को तैयार

मार्केट में टीएमटी के खरीदारी नहीं रहने के कारण अब हर फैक्ट्री प्रबंधक पहले से उत्पादित माल को खपाने के लिए आफर दे रहे हैं. बावजूद खरीदार नहीं मिल रहे हैं. स्थिति यह है कि फैक्ट्री मालिक तैयार टीएमटी को  नो प्रोफिट नो लोस पर बेचने के लिए तैयार हैं.

गिरिडीह के मोंगिया स्टील, लाल स्टील, सलूजा गोल्ड, बालमुंकुद स्टील, अतिवीर स्टील, टॅफकान स्टील, सिस्कॉन स्टील, रौनक टीएमटी, गौरीशंकर इलेक्ट्रोकॉस्ट समेत करीब एक दर्जन से अधिक कारखानों में प्रतिदिन उत्पादन 300 सौ 350 टन हुआ करता था. वहीं यह उत्पादन घट कर प्रतिदिन सौ से 160 टन पहुंच गया है. कुछ फैक्ट्री मालिकों ने डीवीसी से विद्युत आपूर्ति लेना कम कर दिया है.

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शुरू हो चुका है मंदी का असर – गुणवंत सिंह मोंगिया

मोंगिया स्टील के चेयरमैन गुणवंत सिंह मोंगिया ने कहा कि मंदी कब तक दूर होगी, यह बता पाना संभव नहीं है. लेकिन यह सही है कि मंदी का असर शुरू हो चुका है. कहा कि यह गिरिडीह की अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं है. बड़े ऑटोमोबाइल सेक्टर में तो खलबली मची हुई है. साथ ही लौह उद्योग पर खतरा मंडरा रहा है.

छोटे कारोबारियों की हालात सबसे खराब है. हर 10 से 15 दिन में एक ना एक कारखाना शटडाउन किया जा रहा है. वहीं सलूजा स्टील के प्रबंध निदेशक सतविंदर सिंह सलूजा का मानना है कि टैक्स का बोझ छोटे उद्योगपतियों पर सबसे अधिक है.

बाजार में टिके रहना मुश्किल – अमरजीत सिंह सलूजा

मंदी का एक बड़ा कारण यह भी है कि उद्योगपतियों को निवेश करने में भय लग रहा है. सतविंदर सिंह सलूजा ने यह भी कहा कि आर्थिक मंदी अगर अधिक दिनों तक रही तो बाजार में खड़े रह पाना संभव नहीं होगा. क्योंकि लौह उद्योग बैंकों के कर्ज पर ही चल रहा है. ऐसे में बैंकों को अभी से ही ब्याज देना मुश्किल हो रहा है. वहीं एसएसपीएल के निदेशक अमरजीत सिंह सलूजा ने भी कहा कि मंदी का ही प्रभाव है कि वह अपने प्लांट में एक भट्टी को ब्रेकडाउन कर चुके हैं. हालांकि अभी कामगारों को नहीं हटाया है. लेकिन स्थिति देख कर कुछ भय भी लग रहा है.

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