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#DoubleEngine की सरकार में बेबस छात्र-4 : स्कूलों में 668 हेडमास्टर नियुक्त करने में भी फेल हो गयी सरकार

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Kumar Gaurav

Ranchi : ‘डबल इंजन की सरकार’ कहती है कि उसने कई आयाम स्थापित किये हैं. दावा करती है कि रोजगार देने में कीर्तिमान स्थापित किया है. लिम्का बुक में रिकॉर्ड भी दर्ज है.

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ये रिकॉर्ड प्राइवेट नौकरी देने की है जिसमें 5 हजार तक की नौकरियों को भी गिना गया है. हालांकि सरकार के इस दावे की हकीकत राज्य के अधिकतर बेरोजगार युवाओं को पता है.

डबल इंजन की सरकार छात्रों को अच्छी शिक्षा देने और हुनरमंद बनाने की बात करती है. मगर सरकार के 1336 सरकारी स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई बिना हेडमास्टर के हो रही है.

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23 फरवरी 2017 को निकला था विज्ञापन

सरकार ने 23 फरवरी 2017 को 668 हेडमास्टर पदों के लिए विज्ञापन निकाला था जिसे भी बहाल करने में सरकार नाकाम हो गयी. कुल आधे खाली पदों को जेपीएससी के जरिये भरा जाना था.

अब 18 सितंबर 2019 को सरकार ने अपनी इस नाकामी को छुपाने के लिए अपरिहार्य कारण बताकर 668 हेडमास्टरों की नियुक्ति वाले विज्ञापन को रद्द कर दिया है.

नौकरी की आस लिये बेरोजगारों का एक और आस सरकार ने तोड़ दी है. वहीं अच्छी शिक्षा की आस में बैठे छात्र बिना हेडमास्टर के अपने स्कूलों में पढ़ाई करने को विवश हैं.

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1336 में आधे पद प्रोन्नति से भी भरे जाने थे, उसमें भी सरकार नाकाम

राज्य सरकार के अधिकतर सरकारी स्कूलों के हेडमास्टर के पद प्रभार के भरोसे चल रहे हैं.
2017 के जनवरी महीने में आधे पदों को प्रोन्नति के माध्यम से और आधे पदों को जेपीएससी के अनुशंसा पर भरा जाना था. मतलब 668 जेपीएससी के जरिये और 668 प्रोन्नति से.

सरकार दो साल हो जाने के बाद भी न तो पदों को प्रोन्नति से भर पायी और ना ही जेपीएससी के जरिये नियुक्ति पूरी करा सकी. नियुक्ति प्रक्रिया सिर्फ आवेदन मांगने तक ही सीमित रही.

24 जुलाई को जारी किया था सिलेबस, 18 सितंबर को परीक्षा ही रद्द

जेपीएससी ने विज्ञापन जारी करने के दो साल के बाद सिलेबस जारी किया था. सिलेबस जेपीएससी ने 24 जुलाई को जारी किया था. सिलेबस जारी होने से उम्मीदवारों की आस बढ़ी थी.

इसे सरकार ने दो महीने के बाद ही तोड़ दिया. 28 सितंबर 2019 को जेपीएससी ने परीक्षा ही रद्द करने की घोषणा कर दी. हेडमास्टर के पदों के लिए 35 साल से 50 साल तक के अभ्यर्थी आवेदन कर सकते थे.

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