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जनहित के मुद्दों का समाधान नहीं कर सकती सरकार तो बंद कर दें सदन, बोलते ही भावुक हुए स्पीकर

- दो बजे तक सदन दो बार स्थगित

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Ranchi: झारखंड विधानसभा में आज वह हुआ जो पिछले 18 साल में कभी विधानसभा के अंदर होते हुए नहीं देखा गया. विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बजट पर चर्चा नहीं होकर जेपीएससी का मुद्दा गरमाया रहा. सदन शुरू होते ही विपक्ष ने जेपीएससी मुख्य परीक्षा को स्थगित करने या रद्द करने की मांग करने लगा. जिसके बाद काफी देर तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच नोंकझोंक होती रही. कई बार विधानसभा स्पीकर दिनेश उरांव ने विधायकों को समझाने की कोशिश भी की. लेकिन विपक्ष के विधायक नहीं माने. सदन की कार्यवाही के दौरान कहीं ना कहीं जेपीएससी  मुख्य परीक्षा के होने से और सरकार का इसपर अपना रुख साफ नहीं करने से विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव नाराज दिख रहे थे.

कार्यवाही चलने के दौरान वह अपने आप को नहीं रोक पाए और कहा कि मैं अपनी सीमा को समझता हूं. सदन की भी गरिमा बनी रहनी चाहिए. 2014 में सरकार बनी और जेपीएससी का मामला 2015 से लगातार अब तक हर विधानसभा सत्र में आता रहा है. बीते 4 साल में सरकार इस मसले का निदान नहीं ढूंढ पाई. यह छठी जेपीएससी का परीक्षा है इस बात से जाहिर होता है कि जेपीएससी मामले में कहीं न कहीं कमी है. हर बार जेपीएससी का विषय ही सदन में क्यों आता है. जिस तरह का हाल जेपीएससी का होता जा रहा है, उससे जाहिर होता है कि सरकार किसी निदान तक नहीं पहुंच सकी है. सदन का स्तर अब और कितना गिरेगा. अगर जनहित के मुद्दे का सरकार निदान नहीं कर सकती है, तो सदन को बंद कर देना चाहिए. इतना कहने के थोड़ी देर बाद ही विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव को भावुक होते हुए देखा गया. उन्होंने अपनी रुमाल निकाली और चश्मा साफ करने के बाद अपनी आंखों को भी पोछा. सदन की कार्यवाही देखने वालों में कईयों ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष भावुक हो गए हैं. वही हेमंत सोरेन ने इस मामले पर कुछ भी कहने से न्यूज विंग को मना कर दिया. लेकिन जिस तरह का वाकया सदन के अंदर देखा गया, उससे साफ तौर पर कहा जा सकता है कि विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव भावुक हो गए थे. और उनकी आंखों में आंसू आ गया था. जिसे छलकने से पहले ही विधानसभा अध्यक्ष ने रुमाल से पोंछा.

सत्ता और विपक्ष की भावनाएं एक लेकिन सरकार जिद पर अड़ी : हेमंत

सदन के शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष नेता हेमंत सोरेन अपनी बातों को रखने के लिए खड़े हुए और कहा कि इस बजट सत्र के शुरू होने के पहले दिन से ही चलती सदन में जेपीएससी की चर्चा हो रही है. सत्ता और विपक्ष दोनों की भावनाएं एक जैसी हैं. आसन यानी विधानसभा अध्यक्ष की भी भावना यह है कि जेपीएससी परीक्षा का निदान निकले. उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के पास असीम शक्ति है, वह अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए परीक्षा को रद्द करने का निर्देश सरकार को दें. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि जो परीक्षा चल रही है, वह एक तरह से बंदूक की नोंक पर चल रही है. अगर 27,000 के बदले 33,000 लोगों को परीक्षा देने का मौका मिल रहा है, तो कुछ को क्यों रोका गया है, सभी को मौका दे दीजिए. साथ ही सोरेन ने कहा कि पूरे मामले की जांच गहनता से होनी चाहिए, उसके बाद ही सरकार को जेपीएससी की मुख्य परीक्षा लेनी चाहिए.

 

सदन में भावुक हो स्पीकर बोले - जनहित के मुद्दों का समाधान नहीं कर सकती सरकार तो बंद कर दें सदन
सदन के बाहर JMM का प्रदर्शन

 

Bharat Electronics 10 Dec 2019
सदन में भावुक हो स्पीकर बोले - जनहित के मुद्दों का समाधान नहीं कर सकती सरकार तो बंद कर दें सदन
JMM विधायक कुणाल षाड़ंगी का सदन के बाहर प्रदर्शन

55 में से 18 स्क्रूटनी में शामिल और दे रहे हैं परीक्षा : सुखदेव भगत

सदन में अपनी बात को रखते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि जेपीएससी के स्क्रूटनी में शामिल 55 में से 18 लोग ऐसे हैं, जो स्क्रूटनी का काम तो कर रहे हैं. साथ ही साथ वह जेपीएससी की मुख्य परीक्षा में भी शामिल हैं. वह एक परीक्षार्थी भी हैं और चयनकर्ता भी. ऐसे में साफ तौर से कहा जा सकता है कि जेपीएससी में गड़बड़ी हो रही है. छात्र आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उसे देखने वाला कोई नहीं है. उग्रवादियों के साथ सरकार वार्ता करती है, लेकिन छात्रों के साथ वार्ता करने से सरकार पीछे हटती है. ऐसा लग रहा है कि जैसे मध्यप्रदेश का व्यापम घोटाला यहां का जेपीएससी घोटाला होने वाला है.

आसन मजबूर क्यों : बादल

सदन में अपनी बात रखते हुए विधायक पत्रलेख पाल ने कहा कि पूरा झारखंड जनप्रतिनिधि और विधानसभा अध्यक्ष से पूछ रहा है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. क्यों विधानसभा अध्यक्ष अपने आप को मजबूर समझ रहे हैं. छात्र ऐसा सवाल कर रहे हैं. उन्होंने अध्यक्ष से कहा कि वह अपनी आत्मा की आवाज सुने और इस मनमानी को बर्दाश्त नहीं करें. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आप मजबूर नहीं हैं. अध्यक्ष महोदय आप सरकार को इस मामले में निर्देश दें. वही भानु प्रताप शाही ने कहा कि बाउरी कमेटी की रिपोर्ट आखिर सदन के पटल पर क्यों नहीं सार्वजनिक की जा रही है. कमेटी बनाने की अनुशंसा जब विधानसभा के द्वारा की गई थी, तो विधानसभा के पटल पर कमेटी की रिपोर्ट रखने में क्या परेशानी है.

कुछ विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए : राधा कृष्ण किशोर

सदन में अपनी बात रखते हुए सत्तापक्ष के सचेतक राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि कुछ मामले ऐसे होते हैं, जिसपर राजनीति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बाउरी कमेटी का प्रतिवेदन सदन में क्यों नहीं रखा जाना चाहिए. उन्होंने साफ तौर से कहा कि ऐसे-ऐसे लोग परीक्षा की प्रक्रिया में शामिल हैं, जो स्क्रूटनी भी कर रहे हैं और परीक्षा भी दे रहे हैं. ऐसे में यह घोर अनियमितता का विषय है. सरकार को निश्चित तौर पर इसपर संज्ञान लेना चाहिए, अगर जेपीएससी अच्छे उम्मीदवारों को चुनकर झारखंड राज्य के सरकारी कामकाज को निपटाने के लिए देता है, तो झारखंड राज्य का ही भला होगा. यह बात सरकार को समझनी चाहिए. अपनी बात रखते हुए राजकुमार यादव ने कहा कि जेपीएससी परीक्षा लेने में सरकार को आखिर इतनी हड़बड़ी क्यों है. इससे पहले भी सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षा का रिजल्ट बताता है कि यहां उन्हीं का सिलेक्शन होता है, जो बाहर से होते हैं. यहां के लोग आज भी बेरोजगार हैं और बाहर से लोग आकर सरकारी नौकरी का मजा ले रहे हैं.

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