न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

#GovtTeachers को मिलेंगे तीन चांस, अगर बच्चे नहीं हुए #Up_to_the_mark तो जायेगी नौकरी

खुद लेगें रिटायरमेंट नहीं तो सरकार देगी वीआरएस

637

Abinash Mishra

Jamshedpur : पूर्वी सिंहभूम जिले के 1997 स्कूलों के करीब 22 हजार शिक्षकों के लिए ये भले ही बुरी खबर हो लेकिन जिला शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ के मूड में नहीं है.

जिला शिक्षा विभाग के नये नियम के मुताबिक अगर शिक्षक की क्लास के 90 फीसदी बच्चे अप-टु-द-मार्क नहीं पाये गए तो उनको खुद रिटायरमेंट का आवेदन देना होगा या फिर सरकार उनको जबरन वीआरएस दे देगी.

Trade Friends

ये नियम कम उम्र के शिक्षकों पर भी लागू होगा. हां ये जरूर है की शिक्षकों को इसके लिए तीन मौका मिलेगा.

जिला शिक्षा पदाधिकारी शिवेंद्र कुमार ने डुमरिया और मुसाबनी के बीइइओ को शोकॉज कर ये दिखा भी दिया है कि इस बार जिले के शिक्षकों को कहीं से कोई राहत नही मिलने वाली. उनको स्कूलों में या तो परफॉर्म करना होगा या फिर घर जाना होगा.

इसे भी पढ़ें : सरकार के दुलारे ये #IAS अधिकारी, जो करीब चार साल से जमे हैं एक ही पद पर

क्यों किया गया ऐसा फैसला

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की तरफ से राज्य भर के 300 स्कूलों का चयन ब्रॉंज सर्टिफिकेशन के लिए किया गया था जिसमें 19 स्कूल पूर्वी सिंहभूम जिले से थे.

लेकिन जिन नौ स्कूलों को ये सर्टिफिकेट मिले उसमें जमशेदपुर से एक भी स्कूल नहीं था. जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इस बात गंभीरता से लेते हुए कठोर नियम लागू किया है ताकि स्कूलों में शिक्षक केवल तनख्वाह के लिए न पहुंचे.

उनको अब किसी भी सुरत में परफॉर्म करना होगा. इसकी निगरानी भी खुद शिवेंद्र कुमार ने अपने हाथों में लिया है.

दरअसल इस तरह की रैंकिग हर महीने स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की तरफ से की जा रही है और अगले माह से इसमें बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद शिवेद्र कुमार चाहते हैं.

इसे भी पढ़ें : झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन : जानिये प्रांतीय अध्यक्ष और महामंत्री के बीच के विवाद की वजह

कैसे मिलती है रैंकिंग

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तीन स्तर पर स्कूलों की जांच हर माह करता है जिसमे गोल्ड,सिल्वर और ब्रॉन्ज सर्टिफिकेट दिया जाता है.

SGJ Jewellers

इसमें सबसे पहले ये देखा जाता है कि सरकारी स्कूलों के 75 फीसदी छात्रों को 99 तक की गिनती, A से Z तक पढ़ना और ककहरे की पूरी जानकारी है या नही.

दूसरा, ये देखती है कि तीसरी से पांचवी क्लास के 90 फीसदी छात्रों को दूसरी क्लास की पढाई में कितनी दक्षता है. इसके बाद छठी से नौंवी के छात्र को पांचवी तक की पढाई में कितनी दक्षता है. इसके लिए भी मापदंड 90 फीसदी रखा गया है.

यदि कोई भी स्कूल इन तीन मापदंडों पर खरा उतरता है तो उसे गोल्ड सर्टिफिकेशन मिलता है. जैसे-जैसे कमी मिलती है सर्टिफिकेशन का स्तर भी गोल्ड से सिल्वर और सिल्वर से ब्रॉन्ज में तब्दील हो जाता है.

kanak_mandir

क्या कहते हैं जिला शिक्षा पदाधिकारी

शिवेंद्र कुमार कहते हैं कि इस महीने हमारे किसी भी स्कूल ने तीसरा स्थान भी प्राप्त नहीं किया जिससे जिले के स्कूलों में पढाई का स्तर का पता चलता है.

अभी हम तीसरा स्थांन यानी ब्रॉंज सर्टिफिकेशन भी हासिल नहीं कर पा रहे हैं तो फिर गोल्ड और सिल्वर की तो बात ही छोड़िए. लिहाजा कड़े और कठोर नियम की सख्त जरुरत थी और विभाग इसे काफी गंभीरता से ले रहा है.

इसकी एक रिपोर्ट विभाग ने डीसी को भी सौप दी है.

इसे भी पढ़ें : अब #Mall में भी #Bike का 5 और कार का 20 रुपये #Parking शुल्क, सिनेमा में MRP पर पानी बोतल

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

kohinoor_add

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like