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एनएच-23 से 13 सौ मीटर की है दूरी, अब तक नहीं बन सकी पक्की सड़क

हाल गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के एक गांव टोला बोनघर का

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Prakash Mishra

Bokaro :  एनएच -23 से करीब 13 सौ मीटर की दूरी पर बसा है कल्याणपुर गांव का टोला बोनघर. यह टोला जरीडीह प्रखंड मुख्यालय से महज छह किलोमीटर की दूरी पर बसा है. एनएच से गुजरने वाले हर आम और खास की नजर इस गांव पर पड़ती है, लेकिन गांव की सड़क क्यों नहीं बनी. यह पूछने कोई राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता नहीं पहुंचते. पांच वर्ष पूर्व जब लोकसभा का चुनाव हो रहा था, उन दिनों इस गांव की सड़क समस्या को ग्रामीणों ने मीडिया में प्राथमिकता से रखा था. चुनाव में ग्रामीणों को आश्वासन भी मिला था कि चुनाव के बाद गांव की सड़क बन जायेगी, लेकिन अब फिर से लोकसभा का चुनाव होने वाला है. पांच साल बीत गये, लेकिन इस गांव के लोगों को एक छोटी दूरी की पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी.

वर्ष 2013-14 में मनरेगा से बनी थी कच्ची सड़क

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एनएच-23 पर जरीडीह प्रखंड के बाराडीह मोड़ के पास से एक कच्ची सड़क, जो कहीं पगडंडी का भी रूप ले चुकी है. उसका निर्माण प्रखंड की ओर से मनरेगा के तहत वर्ष 2013-14 में तीन लाख 87 हजार रुपये के लागत से हुआ था. यह सड़क एक-दो बरसात के बाद फिर अपने पुराने रूप में आ गयी. बरसात में छोटी से दूरी लोग साइकिल से भी तय नहीं कर पाते हैं. गांव में किसी भी प्रकार का आयोजन हो, तो लोगों को काफी परेशानियों से गुजरना होता है. गांव में काफी दिक्कत से चार पहिया वाहन पहुंच पाती है. इस सड़क होकर हर दिन बक्सपुरा, धधकीडीह, महलीडीह, रोहनटांड और कोयरी बस्ती के सैकड़ों ग्रामीण आना-जाना करते हैं.

सड़क के साथ पानी की भी है किल्लत

गांव में करीब 50 परिवार रहता है. गांव के रहने वाले महेंद्र रजवार, संजय रजवार, भुवनेश्वर रजवार, प्रकाश रजवार आदि ने बताया कि सड़क को लेकर कुछ माह पूर्व स्थानीय विधायक योगेश्वर महतो बाटुल को आवेदन भी दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. सांसद से तो उनकी मुलाकात तक नहीं हो पाती है. इसलिए उनको कभी आवेदन नहीं दिया. सड़क के साथ पानी की काफी किल्लत है. मनरेगा से तीन कुंआ बने हैं. जबकि दो चापानल में एक खराब पड़ा हुआ है. वहीं सार्वजनिक स्थान पर कोई तालाब नहीं होने से हर मौसम में पानी की काफी दिक्कत ग्रामीणों को होती है.

अब पेंशन की भी उम्मीद भी छोड़ चुके हैं

हाल में बिजली की समस्या हो गयी है. गांव से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर ट्रांसफार्मर लगा हुआ हैं. जिस कारण वोल्टेज सहीं मिल पाता है. अगर बल्व जलाये, तो टीवी नहीं चलती. न तो किसी को मिलता है वृद्धा पेंशन और विधवा पेंशन गांव में रहने वाले दो दर्जन से अधिक विधवा और बुजुर्ग लोगों को सामाजिक सुरक्षा सुरक्षा पेंशन भी नहीं मिलता है. कई बार लोग आवेदन भी जमा कर चुके हैं. जिस कारण अब पेंशन की भी उम्मीद भी छोड़ चुके हैं. पंचायत के स्तर से भी कभी कोई जानकारी उन्हें नहीं दी जाती है. अभी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गांव में सात लोगों का घर बन रहा है. जबकि कई लाभुक आवास पाने की अर्हता रखते हैं.

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