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हाल ए रिम्सः डीआर मशीन की मरम्मत के नाम पर हर तीसरे महीने तीन लाख का होता है खेल!

रिम्स में 90 लाख की लागत से खरीदी गयी डीआर मशीन की मरम्मत के लिए हर तीसरे महीने तीन लाख की लागत दिखायी जाती है, पर मशीन का उपयोग ना के बराबर होता है.

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Ranchi : राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल रिम्स. गरीबों के इलाज का एकमात्र सहारा. इस अस्पताल में भले ही लोगों से इलाज के पैसे नहीं लिये जाते हों पर यह माफियाओं की कमाई का एक बड़ा ठिकाना भी बताया जाता है. आरोप है कि रिम्स में कई मशीनें हैं जिनकी खरीद करोड़ों रुपये की लागत से हुई है, लेकिन इन मशीनों को बरबाद होने के लिए छोड़ दिया गया है.

इसके अलावा मेंटेनेंस के भाव में भी मशीनें बरबाद हो रही हैं. रिम्स में 90 लाख की लागत से खरीदी गयी डीआर मशीन की मरम्मत के लिए हर तीसरे महीने तीन लाख की लागत दिखायी जाती है, पर मशीन का उपयोग ना के बराबर होता है. मरम्मत के एक सप्ताह के बाद ही मशीन फिर से खराब हो जाती है. जिसके बाद फिर से मरम्मत के लिए आवेदन किया जाता है. मशीन खराब हो जाने की स्थिति में मरीजों और रिम्स में कार्यरत स्टॉफ को परेशानी होती है.

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सैकड़ों मरीज एक्सरे कराने के लिए आते हैं

रिम्स में हर दिन सैकड़ों मरीज एक्सरे कराने के लिए आते है. एक्सरे डिपार्टमेंट में मरीजों का डिजिटल एक्सरे और सीआर एक्सरे किया जाता है. ऐसे में डिजिटल एक्सरे के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. चूंकि मशीन की खराबी के कारण कई बार एक्सरे में कुछ भी साफ नजर नहीं आता. ऐसे में मरीजों को दोबारा एक्सरे कराने के लिए भेज दिया जाता है. मशीन में खराबी आने की वजह से यह परेशानी दिनों दिन बढ़ती जा रही है.

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90 लाख की है मशीन

8 साल पहले एक्सरे डिपार्टमेंट में 90 लाख रुपए की मशीन खरीदी गयी थी. जिसका उद्देश्य रिम्स में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का था. वहीं इससे कई तरह की जांच भी हो सकती है. इसके लिए मरीजों को ज्यादा पैसे भी नहीं चुकाने पड़ते. इसके बावजूद मशीन के मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ पैसों का खेल हो रहा है. मशीन में गड़बड़ी को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों ने कई बार रिम्स प्रबंधन को पत्र भी लिखा. इसके बावजूद आज तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

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