न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

इतिहासकार हबीब ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370  हटाने की आलोचना की, कहा,  संघ परिवार कश्मीरी  मुसलमानों पर हमले कर रहा था

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को खतरे का बहाना बनाते हुए बिना कश्मीर के लोगों को भरोसे में लिये यह फैसला लिया.

133

NewDelhi : इतिहासकार इरफान हबीब ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने से जुड़े आर्टिकल 370 के प्रावधान खत्म करने के मोदी सरकार के फैसले की आलोचना की है.  हबीब ने इसे कश्मीर के निवासियों के साथ धोखा करार बताया है. जान लें कि 87 साल के इतिहासकार इरफान हबीब अलीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. कहा कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को खतरे का बहाना बनाते हुए बिना कश्मीर के लोगों को भरोसे में लिये यह फैसला लिया.  द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार  इतिहासकार ने कहा किभाजपा  कभी कश्मीर के तत्कालीन शासक महाराजा हरि सिंह की तारीफ करते नहीं थकी, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण विलय का विरोध किया और राज्य की स्वायत्तता की पैरवी की.

Trade Friends

इसे भी पढ़ें- 370 पर बौखलाये पाकिस्तान ने अब दिल्ली-लाहौर बस सेवा निलंबित की

आर्टिकल 370 को खत्म करने का सवाल उठता ही नहीं…

इरफान हबीब के अनुसार आर्टिकल 370 को खत्म करने का सवाल उठता ही नहीं,  अगर महाराजा जम्मू-कश्मीर के साथ किसी अन्य राज्य की तरह ही बर्ताव किये जाने की तत्कालीन केंद्र सरकार की इच्छा से सहमत हो जाते.  इरफान हबीब  ने कहा कि उस समय गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के कश्मीर को विशेष दर्जा दिये जाने से सहमत होने के वाजिब कारण थे.  क्योंकि   वहां  संघ परिवार ने कश्मीरी  मुसलमानों पर हमले करने शुरू कर दिये थे.  संघ के सदस्य स्थानीय मुसलमानों का उत्पीड़न करने लगे थे और उनकी जमीनें छीन ली.  यही कारण था कि सरदार पटेल कश्मीर जाने के लिए परमिट सिस्टम के लिए तैयार हुए ताकि बाहरी लोगों को स्थानीय लोगों की जमीनें हथियाने से रोका जा सके.

WH MART 1

इरफान हबीब के अनुसार इसके बाद भी देश के लोगों को कश्मीर जाने के लिए आसानी से परमिट मिल जाता था. साथ ही कहा कि जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं को वहां जाने से रोका गया , क्योंकि उनकी नीयत ठीक नहीं थी. इस क्रम में हबीब ने  कहा कि   कश्मीर में स्थानीय निवासियों को जमीन, सरकारी नौकरी आदि में खास वरीयता देने से जुड़े र्टिकल 35ए को 1954 में लाने का मकसद यह था कि विभाजन के बाद पाकिस्तान गये कश्मीरियों को वापस लाया जा सके.

 हबीब के अनुसार आर्टिकल 35ए की वजह से लोग वापस भी लौटे. इतिहासकार इरफान हबीब ने कहा कि बेहतर होता अगर लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गयी विधानसभा प्रस्ताव पास कर इन अनुच्छेदों को खत्म किया जाता. 

इसे भी पढ़ें- देश में बाढ़-बारिश से बिगड़े हालात, केरल, महाराष्ट्र बुरी तरह प्रभावित

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

kohinoor_add

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like