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हुजूर! डीपीओ अरुण सिंह के पास है अकूत संपत्ति, मिलता है एक साथ दो-दो प्रमोशनः BJP MLA

विधानसभा में निरसा विधायक अरुप चटर्जी ने उठाया मुद्दा, कोयला कारोबार से जुड़े असंगठित मजदूरों के आ सकते हैं अच्छे दिन, नियमित वेतन के लिए एक महीने के अंदर आ सकता है फैसला

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  •  सुखदेव सिंह करेंगे गुमला के डीपीओ अरुण सिंह से जुड़े मामले की जांच
  •  सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए बिरंची ने की जमीन बदलने की मांग
  •  मंत्री नहीं, सीएम के जवाब से संतुष्ट हुए सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर

Ranchi:  धनबाद और आस-पास के इलाकों में कोयला कारोबार से जुड़े असंगठित मजदूरों के अच्छे दिन आ सकते हैं. ऐसा निरसा से मासस विधायक अरूप चटर्जी की पहल से होने जा रहा है. विधायक अरूप चटर्जी ने विधानसभा के ध्यानकर्षण में कोयला कारोबार से जुड़े असंगठित मजदूरों की बात उठायी. उन्होंने सदन में कहा कि धनबाद जिला क्षेत्र में 500 कोयला आधारित छोटे बड़े उद्योग हैं.  जो बीसीसीएल की विभिन्न कोलियरियों से अपने नाम आवंटित कोयले का उठाव, रैक और ट्रकों के माध्यम से करते हैं. इन रैकों और ट्रकों में विभिन्न कोलियरी में कार्यरत असंगठित मजदूरों के दंगल को मिलने वाली मजदूरी में काफी विसंगतियां हैं.  उन्होंने कुछ कोलीयरी का  उदाहरण देते हुए कहा कि हर कोलियरी में प्रति टन कोयला का उठाव की मजदूरी अलग अलग है.  उन्होंने कहा कि कोलियरी में मजदूरों पर हमेशा से कोयला माफियाओं का वर्चस्व रहा है. जिसके दबाव  में यह असंगठित मजदूर लोडिंग का काम करते हैं.  इसी का परिणाम है कि इनकी मजदूरी का एक बड़ा हिस्सा कोल माफिया की जेब में चला जाता है. श्री चटर्जी ने विधानसभा से इस मामले में पहल करने को कहा कि ऐसे सभी मजदूरों की पहचान की जाए और एक समान वेतन का प्रावधान कर इन्हें कोल माफिया के चंगुल से छुटकारा दिलाया जाए.

मंत्री के जवाब के बावजूद अध्यक्ष ने कहा एक महीने में ध्यानाकर्षण समिति दे जवाब

इस मामले पर सरकार की तरफ से श्रम मंत्री राज पलिवार ने जवाब दिया कि मामला केंद्र सरकार से जुड़ा हुआ है. इसलिए केंद्रीय श्रमायुक्त से जवाब की मांग की गयी है. जवाब से नाखुश बाघमारा और धनबाद के विधायक ढुल्लु महतो और राज सिन्हा ने भी सदन में इस विषय को लेकर अपनी बात को रखने की कोशिश की. राज सिन्हा और ढुल्लु महतो की बात कुछ देर सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मामला ध्यानाकर्षण समिति के पास भेज दिया जाए. साथ ही एक महीना के अंदर मामले को लेकर समिति अपनी जवाब दे.

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शिवशंकर उरांव ने अपने ही जिले के अफसर पर उठाये सवाल

ध्यानाकर्षण में गुमला से बीजेपी विधायक शिव शंकर उरांव ने अपने ही जिले के जिला योजना पदाधिकारी पर संगीन आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कनीय होने के बावजूद उन्हें जिला योजना पदाधिकारी बना दिया गया. उनकी पहुंच इतनी है कि उन्हें नियम विरुद्ध दो बार प्रमोशन दे दिया गया. उनका कहना था कि सरकार ने इस मामले में उन्हें संतोषप्रद जवाब नहीं दिया है. वो बार-बार मामले की जांच एसीबी से कराने की मांग कर रहे थे. उन्हें जवाब देते हुए मंत्री अमर बाउरी ने कहा कि साक्ष्य का अभाव रहने की वजह से वो एसीबी से जांच नहीं करा सकते हैं. आयुक्त या उपायुक्त की अध्यक्षता में जांच करायी जा सकती है. विधायक के संतुष्ट ना होने पर आखिर में योजना सह वित्त विभाग के प्रधान सचिव सुखदेव सिंह को पूरी जांच का जिम्मा दिया. अब जिला योजना पदाधिकारी के प्रमोशन से लेकर तमाम चीजों की जांच सुखदेव सिंह करेंगे.

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर विधायकों ने किया हंगामा

विधानसभा में अल्पसूचित प्रश्न काल में धनबाद विधायक राज सिन्हा ने कचरा प्रबंधन पर सवाल पूछा कि सदन में बवाल हो गया. इस मामले पर विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष के तमाम विधायकों ने अपने क्षेत्र के सवाल रखे. सभी ने योजना को लेकर जमीन विवाद को लेकर चिंता जतायी. राज सिन्हा ने कहा कि धनबाद में जिस एजेंसी को यह काम मिला है, वो एजेंसी कई जगहों पर निगम के द्वारा काली सूची में डाली गयी है. वहीं बोकारो विधायक बिरंची नारायण ने कहा कि सरकार की तरफ से चास में जो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए जमीन का चयन हुआ है, उसे लेकर ग्रमीणों में काफी आक्रोश है. कहा कि ग्रामीण के आक्रोश को देखते हुए कहा जा सकता है कि प्लांट वहां ग्रामीण लगने ही ना दें. इसलिए प्लांट बनाने के लिए कहीं और जमीन आवंटित की जाए.

सीएम से जवाब मिलने के बाद संतुष्ट हुए सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक

सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक राधा कृष्ण किशोर ने सदन में सवाल किया कि एक आदमी एक आदमी को प्रति दिन 55 लीटर साफ पानी की आवश्यकता होती है. झारखंड में प्रति व्यक्ति कितना लीटर पानी जल संसाधन विभाग लोगों को उपलब्ध करा पा रहा है. इसके जवाब में मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के जवाब से राधा कृष्ण किशोर संतुष्ठ नहीं दिखे. दरअसल जवाब में मंत्री जी ने कहा कि अभी झारखंड के 32 फीसदी लोगों को साफ पानी विभाग की तरफ से मिल रहा है. 2020 तक यह 50 फीसदी हो जायेगा. 2022 तक यह 100 फीसदी हो जाएगा. लेकिन इस जवाब से राधा कृष्ण किशोर संतुष्ट नहीं हुए. बाद में सीएम ने खड़े होकर जवाब दिया कि आजादी के 70 सालों के बाद भी ग्रामीण जनता को पानी नसीब नहीं था. अब झारखंड सरकार आदिम जनजाति को भी साफ पानी देने का काम कर रही है. पाइप लाइन के माध्यम से सुदूर गांव में भी पानी पहुंचाने का काम हो रहा है. विपक्ष को हंगामा करते देख सीएम ने कहा कि विपक्ष को प्रकाश में भी अंधेरा ही दिखता है. कहा कि एक साल के अंदर सभी गरीब के घर में साफ पानी पहुंच जाएगा.

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