न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

लातेहार और टंडवा में हो रहा कोयले का अवैध कारोबार, गुप्ता जी हैं संरक्षक

1,452

Ranchi: लातेहार और टंडवा स्थित कोल परियोजना से हर दिन 20 से 25 ट्रक कोयले की चोरी हो रही है. अवैध कोयले का यह कारोबार प्रशासन की नाक के नीचे किया जा रहा है.
पुलिस को जब इसकी जानकारी मिलती है, तो समय-समय पर कार्रवाई भी की जाती है.

लेकिन इसके बावजूद भी कोयले का काला कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस अवैध कारोबार को कोल कारोबार से जुड़े दो लोगों का संरक्षण प्राप्त है.

JMM

इसे भी पढ़ेंःवोट बहिष्कार की तैयारी में 5000 लोग, वोटर कार्ड राजभवन भेजने का किया दावा

साहू सरनेम वाले कारोबारी के बारे में बताया जाता है कि वह माइंस से साइडिंग तक कोल ट्रांसपोर्टिंग का काम करने के अलावा कोयले का अवैध कारोबार भी करता है. और गुप्ता सरनेम वाला व्यक्ति उसके लिये पुलिस अफसरों को मैनेज करता है.

गुप्ता कई पुलिस अफसरों के लिए काम करता है. साथ ही सत्ता शीर्ष पर बैठे एक व्यक्ति से भी उसके मधुर संबंध हैं.

ट्रक व डंपर में चालान से अधिक लोड किया जाता है कोयला

लातेहार के पांच रेलवे साइडिंग (बालूमाथ, टोरी, फुलबसिया, बुकरु व कुसमाही बीराटोली) है. जहां से रैक के जरिये कोयला दूसरे राज्यों में भेजा जाता है.

जानकारी के मुताबिक,कोयला ट्रांसपोर्टिंग का अधिकांश काम तीन बड़े ट्रांसपोर्टर के जिम्मे है. चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र स्थित मगध और आम्रपाली कोल परियोजना से इन पांचों रेलवे साइडिंग में कोयला भेजा जाता है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इसी दौरान सीसीएल कर्मी और कोयला कारोबारी की मिलीभगत से ट्रक व डंपर में चालान से अधिक कोयला लोड कर दिया जाता है. फिर उसे लातेहार के बालूमाथ थाना क्षेत्र के बरियातू इलाके के आरा, चमातू व अमरवाडीह में उतारकर जमा किया जाता है.

यह काम हर दिन होता है. रात के अंधेरे में जमा किये गये कोयले को ट्रकों के जरिये फिर रात में ट्रक पर लोड कर ईंट-भट्ठों व खुले बाजार तक पहुंचाने का काम पिछले कई सालों से चल रहा है.
मीडिया में भी खबरें छपी.

Related Posts

लघु कुटीर बोर्ड ने मार्च 2018 से कर्मियों को नहीं दिया ट्रैवल एक्सपेंस, CEO ने कहा- चल रही कार्रवाई, जल्द मिलेगा बकाया

28 ब्लाॅक संयोजकों ने लचर व्यवस्था के कारण छोड़ा काम, 30 हजार ग्राम संयोजकों के लिये आवंटित एक करोड़ अब तक नहीं मिला.

फिर भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की.इस काम में ट्रांसपोर्टर, लोडर और सीसीएल के अधिकारी शामिल हैं.पुलिस को प्रति ट्रक 17 हजार रुपये दिये जाने की भी सूचना है.

लातेहार के तेतरिया और सिकनी कोल परियोजना से हो रहा लिंकेज कोयले का कारोबार

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लातेहार जिले तेतरिया और सिकनी कोल परियोजना से बड़े पैमाने पर लिंकेज कोयले का कारोबार हो रहा है. तेतरिया और सिकनी कोल परियोजना में कोल कारोबारी फैक्ट्री में कोयला भेजने के नाम पर कम दाम में करीब 1200 से 2000 रुपए प्रति टन की दर से कोयला खरीदते है और फिर कोयले का आधा से अधिक हिस्से को सबंधित फैक्ट्री में भेज दिया जाता है.

इसे भी पढ़ेंःपांकी विधानसभा क्षेत्रः दो दशक तक एक ही परिवार के पास रही बागडोर लेकिन बुनियादी सुविधा के लिए आज भी तरसते हैं लोग

जबकि बाकी के कोयले को मंडी भेज दिया जाता है. जहां कोयले 6000 रुपया प्रति टन की दर से बेच दिया जाता है. इन कोल परियोजना से निकलने वाले कोयले को अवैध रूप से अधिकारियों, ट्रांसपोर्टर और लोडर की मिलीभगत से बेचने का काम किया जा रहा है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लिंकेज कोयले का कारोबार बेरोकटोक जारी है.

किसके संरक्षण में अवैध कारोबार कर रहा साहू सरनेम वाला व्यक्ति?

साहू सरनेम वाले शख्स का जिसने लोकसभा चुनाव भी लड़ा, कोयला कारोबार से गहरा जुड़ाव है. बहुत कम समय (पिछले दो-तीन) साल में ही कोयले का अवैध कारोबार कर करोड़पति बन गया है.

लोकसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी भाषण में दो बातें कही थी- पहला कि लटपट करके कमा लिया है. दूसरा यह कि चुनाव बाद सरकार हिसाब-किताब करेगी. अब सवाल यह उठता है कि झारखंड में पिछले पांच सालों से तो भाजपा की सरकार है. वह भी जीरो टॉलरेंस वाली. फिर कोयला में लटपट करके कैसे कोई कमा लिया.

सवाल यह भी उठ रहा है कि कोयला में लटपट करके कमाई करने की जानकारी मुख्यमंत्री को अब मिली है, या पहले से थी. पहले से थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई. आखिरकार सवाल यह उठता है कि साहू सरनेम वाले इस व्यक्ति को किसका संरक्षण प्राप्त है.

इसे भी पढ़ेंःझारखंड में “अभूतपूर्व” जीत की तरफ तो नहीं बढ़ रही #BJP!

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like