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13 सालों में टाटा को देने थे 325 करोड़, दिये सिर्फ 25, फिर भी सरकार फ्री में दे रही है टाटा को अस्पताल के लिए जमीन

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  • प्रदीप यादव के सवाल से सदन में हुआ खुलासा
  • स्वास्थ्य विभाग का दावा मिले हैं 75 करोड़

Ranchi: एक बार फिर से सदन में हंगामे का सबब प्रदीप यादव का सवाल रहा. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रदीप यादव ने अल्प सूचित प्रश्नकाल में सरकार से सवाल किया, कि क्या यह बात सही है कि झारखंड में टाटा ट्रस्ट द्वारा 23.5 एकड़ में 302 बेड का कैंसर अस्पताल रिनपास, रांची परिसर में खोला जा रहा है. जिसमें 50 फ़ीसदी बेड झारखंड के मरीजों के लिए आरक्षित रहेंगे.

उनका दूसरा सवाल था कि क्या यह बात सही है, कि 23.5 एकड़ भूमि के लिए सरकार ने टाटा को निःशुल्क जमीन उपलब्ध कराई है.

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सरकार से प्रदीप यादव का तीसरा और सबसे जरूरी सवाल यह था, कि क्या यह बात सही है कि टाटा कंपनी ने टाटा लीज नवीकरण के समय ₹25 करोड़ हर साल गरीब मरीजों के इलाज के लिए देने का एकरारनामा 2005 में किया था. जिसकी अब तक की उपलब्धि जीरो रही है.

तीसरे सवाल पर फंसी सरकार और हुआ एक बड़ा खुलासा

प्रदीप यादव के तीसरे सवाल पर सरकार जवाब देने में फंसती नजर आई. सरकार के मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने जवाब दिया. उन्होंने अपने जवाब में कहा कि 2005 में ही टाटा से सरकार का करार हुआ था. यह करार लीज नवीकरण के वक्त हुआ था. 20 अगस्त 2005 को करार करते वक्त एकरारनामा में इस बात का उल्लेख किया गया था, कि टाटा की तरफ से हर साल गरीब मरीजों के इलाज के लिए ₹25 करोड़ दिए जाएंगे. लेकिन इन 13 वर्षों में टाटा ने बस 2015-16 में ही ₹25 करोड़ गरीब मरीजों के इलाज करने के लिए दिये हैं. जबकि इन 13 सालों में टाटा को 325 करोड़ रुपए सरकार के खाते में जमा करवाने थे. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से दावा किया गया है कि एक नहीं बल्कि तीन साल टाटा की ओर से पैसे दिए गए हैं, यानी 75 करोड़ रुपए अबतक मिले हैं.

क्या झारखंड के लोगों का फ्री में होगा टाटा कैंसर अस्पताल में इलाज ?

प्रदीप यादव ने इस बात पर शंका जताते हुए कहा कि, जब टाटा ने पिछले 13 सालों में बस एक किस्त का ही भुगतान किया है. तो यह कैसे कंपनी विश्वास दिला सकती है कि झारखंड में फ्री में जमीन लेने के बाद उस पर बनने वाले कैंसर अस्पताल में झारखंड के लोगों के लिए बेड आरक्षित रहेंगे. प्रदीप यादव ने कहा कि यह अस्पताल 302 बेड का बनना है. करारनामा के मुताबिक 50 फ़ीसदी बेड झारखंड वासियों के लिए आरक्षित रहेंगे.

लेकिन सरकार ने अपने जवाब में यह कहीं नहीं कहा है कि झारखंड वासियों के लिए आरक्षित बेड के मरीजों का इलाज मुफ्त में होगा. एक तरफ सरकार टाटा को कैंसर अस्पताल बनाने के लिए फ्री में जमीन दे रही है, बदले में टाटा कैंसर अस्पताल झारखंड वासियों के इलाज के एवज में उनसे फीस लेगा. करारनामे में इस बात का उल्लेख है, कि इलाज राज्य या केंद्र सरकार के बीमा योजना के तहत होगा. तो सवाल उठता है कि आखिर कैसे कहा जा रहा है कि झारखंड वासियों का इलाज टाटा कैंसर अस्पताल में मुफ्त में किया जाएगा. इस बात से यह साफ होता है कि झारखंड के वैसे लोग, जो टाटा कैंसर अस्पताल में अपना इलाज करवाना चाहेंगे उन्हीं का इलाज मुफ्त में होगा जिनके पास केंद्र या राज्य सरकार की कोई बीमा योजना हो. जिनके पास बीमा योजना नहीं होगी कंपनी उस मरीज से फीस वसूलेगी.

प्रदीप यादव के इन बातों पर विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने कहा कि तो फिर आप कहना क्या चाहते हैं. वह साफ करें. प्रदीप यादव ने जवाब देते हुए कहा कि विभाग को टाटा कंपनी के साथ एक बार फिर से करारनामा दोहराना चाहिए. 50 फ़ीसदी आरक्षण को तय नहीं माना जाना चाहिए. अगर इससे ज्यादा मरीज झारखंड के आए तो उसका इलाज भी अस्पताल में फ्री में होना चाहिए. जब सरकार फ्री में कंपनी को जमीन दे रही है, तो आखिर इलाज के लिए कंपनी फीस कैसे वसूल सकती है. इस पर मंत्री ने कहा कि आपका विचार स्वागत योग्य है, उस पर हम लोग विचार करेंगे.

मंत्री और मुख्य सचेतक में नोकझोंक

हर बार की तरह इस बार भी सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक राधा कृष्ण किशोर और स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी आपस में तकरार करते दिखे. राधा कृष्ण किशोर ने अल्प सूचित काल में प्रश्न किया कि राज्य भर में एनेमिया और कुपोषण से मरने वाले बच्चों की संख्या क्या है. और इसके लिए विभाग की तरफ से क्या हो रहा है. मंत्री जी ने जवाब में कहा कि आपको साफ-साफ जवाब दे दिया गया है, गोल-गोल घुमाकर पूछने की आदत अब छोड़ दीजिए. इस पर मुख्य सचेतक नाराज हुए उन्होंने, मंत्री को सीधे तौर पर कहा कि आप कितने काबिल हैं पूरे राज्य को इस बात का पता है.

आप कम से कम इस तरह की बात ना करें. मंत्री पद की गरिमा को बरकरार रखें. उन्होंने बातों-बातों में मंत्री जी को नॉन सीरियस स्वास्थ्य मंत्री की संज्ञा दे दी. इन दोनों का तकरार यही नहीं रुका. मंत्री जी ने अपनी रिपोर्ट का हवाला देते हुए रिपोर्ट को राधा कृष्ण किशोर के पास भिजवाना चाहा. लेकिन मुख्य सचेतक ने मना कर दिया. रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखने को कहा. तकरार के दौरान फिर से एक बार राधा कृष्ण किशोर ने मंत्री जी से कहा कि आप मुझे प्रदीप यादव ना समझे. सदन में कोई भी बात अध्यक्ष के माध्यम से रखें. वैसे भी स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग के मंत्री से मैं कोई उम्मीद नहीं करता हूं. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आप बेवजह गुस्सा हो रहे हैं. आपके हर सवालों का जवाब दिया जा चुका है. अब इससे ज्यादा हम क्या करे.

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