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4398 पंचायतों में मात्र 513 पंचायत ही है पूर्ण साक्षर, वाक्य पढ़ना और सरल गणित भी नहीं जानते लोग

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Chhaya

Ranchi : लोगों को साक्षर बनाने के लिए साक्षर भारत अभियान की शुरूआत तो की गयी. लेकिन झारखंड राज्य में यह अभियान समय के साथ फींकी पड़ती जा रही है. राज्य में कुल पंचायतों की संख्या 4398 है. जिनमें से 3885 पंचायत अब भी साक्षर नहीं हो पाये हैं. अब तक राज्य के महज 513 पंचायत ही पूर्ण साक्षर हो पाये हैं. ये खुद राज्य शिक्षा परियोजना परिषद के आंकड़े बताते हैं.

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पूर्व में 496 पंचायतों को पूर्ण साक्षरण घोषित किया जा चुका है. लेकिन बीते दिनों शिक्षा परियोजना की ओर से साक्षर भारत अभियान के तहत एक सर्वे किया गया. सर्वे राज्य के 19 जिलों के 63 प्रखंडों के 106 पंचायतों में किया गया. जिसमें से मात्र 17 पंचायतों को ही पूर्ण साक्षर श्रेणी में रखा गया.

ऐसे में वर्तमान में राज्य के कुल 513 पंचायत ही पूरी तरह से साक्षर हैं. साक्षर भारत अभियान की शुरूआत 2009 में की गयी थी. जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को अक्षर ज्ञान, हस्ताक्षर और सरल गणितीय प्रश्नों को हल करना आदि शामिल है. यह पूर्णता केंद्रीय योजना है, जो राज्य सरकार संचालित करती है.

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1,74,591 परिवारों को किया गया शामिल

राज्य शिक्षा परियोजना की ओर से बीते दिनों किये गये सर्वे में 19 जिलों के 63 प्रखंडों के 592 गांवों को शामिल किया गया. जिसके तहत 1,74,591 परिवार इस सर्वे में शामिल किया गया. परियोजना की ओर से इसके लिए अलग-अलग श्रेणियां भी बनायी गयी थी.

इस सर्वे के तहत जिस पंचायत में 95 प्रतिशत लोग साक्षर पाये गये, उस पंचायत को पूर्ण साक्षर की श्रेणी में रखा गया. अन्य 89 पंचायत पूर्ण सारक्षर की श्रेणी में निम्न पाये गये. इस सूची में सबसे अधिक रांची जिला के सात पंचायत साक्षर पाये गये. वहीं सर्वे के दौरान इन परिवारों की सामाजिक स्थिति का भी आंकलन किया गया.

तीन आधारों पर की गयी जांच

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साक्षरता की स्थिति का आंकलन तीन आधारों पर किया गया. जो साक्षरता अभियान के राष्ट्रीय पैमाने पर की गयी. इसमें लिखने की योग्यता, सरल गणितीय प्रश्नों का हल कर पाने की योग्यता और हस्ताक्षर कर पाना शामिल है.

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वाक्य पढ़ने और सरल गणित भी हल नहीं कर पाये लोग

राज्य शिक्षा परियोजना की रिपोर्ट के मुताबिक, हस्ताक्षर करने और अक्षर ज्ञान लोगों में है. लेकिन वाक्य पढ़ने और सरल गणित हल करने की जानकारी अधिकतर लोगों को नहीं है. लोगों का निरंतर प्रयास नहीं करने की वजह से यह स्थिति आयी है. ऐसे में लोक शिक्षा केंद्रों के माध्यम से लोगों को अभ्यास कराना चाहिए.

साथ ही रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पूर्ण साक्षर पंचायतों की घोषणा में ग्राम पंचायतों की भूमिका और अपनायी गयी प्रकिया स्पष्ट नहीं है. लेकिन लोगों में योजनाओं और अन्य विषयों के संबध में जानकारी में बढ़ोत्तरी पायी गयी.

हालांकि इस संबंध में कुछ दिन पहले ही स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग कार्यकारिणी की बैठक की गयी थी. उसी दौरान परियोजना की ओर से इस संबध में कुछ अनुशंसायें पेश की गयी थी.

परियोजना की रिपोर्ट में यह माना गया कि राज्य में साक्षर पंचायतों की स्थिति में सुधार होना चाहिये. साथ ही परियोजना की रिपोर्ट में इससे संबधित आंकड़ों के रख रखाव में सर्तकता बरतने की बात भी कही गयी है.

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