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नवगठित यूनियन टेरिटरी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में IAS, IPS, अधिकारी पहले की तरह देंगे सेवाएं

नये आइएएस, आइपीएस को दिया जायेगा अरुणाचल गोवा मिजोरम यूनियन टेरिटरी (एजीएमयूटी) कैडर

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New Delhi: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद जम्मू-कश्मीर कैडर के आइएएस, आइपीएस और अन्य केंद्रीय सेवा अधिकारियों की सेवाएं फिलहाल पहले की तरह जारी रहेंगी.

नये बनने वाले दो केंद्र शासित प्रदेशों में अधिकारी पूर्व की तरह ही अपनी सेवाएं देंगे. वहीं इन सेवाओं के तहत नियुक्त किए जाने वाले नये लोगों को अरुणाचल गोवा मिजोरम यूनियन टेरिटरी (एजीएमयूटी) कैडर दिया जायेगा.

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जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 के मुताबिक, दो नये केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू कश्मीर और लद्दाख) के लिए प्रांतीय सेवा अधिकारी फिलहाल अपने पद पर सेवाएं जारी रखेंगे. जहां भी उनकी पोस्टिंग है, वहां सेवाएं देंगे, जबतक उपराज्यपाल की ओर से नया आदेश जारी नहीं होता है.

नये अधिकारियों की नियुक्ति एजीएमयूटी कैडर में

केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से सोमवार को राज्यसभा में पेश किए गये विधेयक के मुताबिक, “भविष्य में, दोनों केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख में नियुक्त किए जाने वाले अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को अरुणाचल गोवा मिजोरम यूनियन टेरिटरी (एजीएमयूटी) कैडर का माना जाएगा.

साथ ही इसके अनुरूप कैडर आवंटनों के नियमों में केंद्र सरकार की तरफ से जरूरी बदलाव किये जायेंगे. इस विधेयक में दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख के गठन का प्रावधान किया गया है.

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जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 में कहा गया कि मौजूदा जम्मू-कश्मीर प्रदेश के लिए आइएएस, आइपीएस और आइएफओएस के कैडर मौजूदा कैडरों में काम करना जारी रखेंगे. विधेयक में कहा गया कि दोनों नये केंद्र शासित प्रदेशों के गठन और अधिसूचना जारी होने के बाद उपराज्यपाल (एलजी) अधिकारियों की संख्या, संरचना और आवंटन पर निर्णय लेंगे.

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इसके अलावा विधेयक में कहा गया कि राज्य सरकार के कर्मचारियों के पास इन दोनों में से किसी एक में सेवा देने का विकल्प होगा और इस स्थानांतरण पर उपराज्यपाल फैसला लेंगे.

विधेयक में इस बात का भी प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार के पास इस सेक्शन के तहत जारी किसी भी आदेश की समीक्षा करने की शक्ति होगी.

इसके साथ ही लोक सेवा आयोग जम्मू और कश्मीर अब लोक सेवा आयोग केंद्र शासित जम्मू और कश्मीर होगा. गौरतलब है कि सोमवार को मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला लिया.

वहीं मंगलवार को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 लोकसभा से भी पारित हो गया. इससे पहले ही ये राज्यसभा से पारित हो चुका था. और राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दे दी है.

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