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भारत के रिटायर्ड जस्टिस लोकुर पाकिस्तान के सीजेआई खोसा के शपथ ग्रहण में शामिल हुए

जस्टिस आसिफ सईद खोसा ने शुक्रवार 18 जनवरी को पाकिस्तान के 26वें चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली.  उनका शपथ ग्रहण समारोह बेहद सादे तरीके से राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया

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NewDelhi : भारत के रिटायर्ड जस्टिस मदन भीमराव लोकुर पाकिस्तान के चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए. बता दें कि पिछले सत्तर से ज्यादा सालों में ऐसा पहली बार हुआ जब कोई भारतीय जज (रिटायर्ड) पाकिस्तान के नये मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुआ हो.  जस्टिस आसिफ सईद खोसा ने शुक्रवार 18 जनवरी को पाकिस्तान के 26वें चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली.  उनका शपथ ग्रहण समारोह बेहद सादे तरीके से राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया जिसमें भारत समेत विदेशों के कई कानूनी दिग्गज शामिल हुए. राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने नये चीफ जस्टिस (64) खोसा को शपथ दिलाई. बता दें कि जस्टिस खोसा ने चीफ जस्टिस साकिब निसार के रिटायर्ड होने के बाद यह पद संभाला है.

खोसा का कार्यकाल करीब 337 दिनों का होगा. वह 21 दिसंबर, 2019 को रिटायर्ड होंगे. डॉन समाचारपत्र की खबर के अनुसार समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, उच्च न्यायालयों के न्यायधीश, मंत्री, राजनयिक, असैन्य एवं सैन्य अधिकारी, वकील और भारत समेत अन्य देशों के मेहमान मौजूद थे.

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पहली बार हुआ जब कोई भारतीय जज पाकिस्तानी कोर्ट की बेंच का हिस्सा बना हो

जानकारी दी गसी कि भारत के सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और राष्ट्रमंडल न्यायिक शिक्षा संस्थान की शासी समिति के अध्यक्ष जस्टिस मदन भीमराव लोकुर और रिटायर्ड जस्टिस एवं राष्ट्रमंडल न्यायिक शिक्षा संस्थान, कनाडा की शासी समिति की संस्थापक अध्यक्ष सैंड्रा ई ऑक्सनर इस समारोह में शामिल हुए.  तुर्की, दक्षिण अफ्रीका एवं नाइजीरिया के पांच वरिष्ठ न्यायाधीशों ने भी इस समारोह में हिस्सा लिया. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार पिछले सत्तर से ज्यादा सालों में ऐसा पहली बार हुआ जब कोई भारतीय जज (रिटायर्ड) पाकिस्तानी कोर्ट की बेंच का हिस्सा बना हो. साथ ही पाकिस्तान की नये मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाले रिटायर्ड जस्टिस मदन भीमराव लोकुर शुक्रवार को एक बेंच का हिस्सा भी बने.

उन्होंने करीब 45 मिनट में तीनों केसों की सुनवाई की.  पहले में दोषसिद्धि के खिलाफ चुनौती, दूसरी जमानत और तीसरे में सिविल मामले को लेकर सुनवाई की.  इस मामले को दोनों पक्षों के बीच सुलाह करके मामले को सुलझाया गया.

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अपने लंबे करियर में करीब 50,000 मामलों का निपटारा किया है

बता दें कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के डेरा गाजी खान में 1954 में जन्मे न्यायमूर्ति खोसा ने पंजाब विश्वविद्यालय और कैंब्रिज विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी की है.  न्यायमूर्ति खोसा को अपराध कानून में पाकिस्तान का शीर्ष विशेषज्ञ माना जाता है. उन्होंने 1977 में वकालत शुरू की थी और 1998 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत किये गये थे. उन्हें 2010 में उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया था.  उन्होंने अपने लंबे करियर में करीब 50,000 मामलों का निपटान किया है. साथ ही वह उस तीन सदस्यीय पीठ का हिस्सा रहे हैं जिसने ईशनिंदा मामले में ईसाई महिला आसिया बीबी को बरी किया था. पूर्व प्रधानमंत्रियों यूसुफ रजा गिलानी एवं नवाज शरीफ को अयोग्य ठहराने वाली पीठ में भी वे शामिल रह चुके हैं.

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